'RSS मॉडल' अपनाने से ही मिलेगी जीत- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का बयान

नई दिल्ली- असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई ने कहा है कि लोगों से जुड़ने के लिए कांग्रेस को 'आरएसएस मॉडल' अपनाने की जरूरत है। गोगोई का मानना है कि आरएसएस के जन संपर्क की मदद से ही बीजेपी को चुनावों में जीतने में मदद मिली है। लोकसभा चुनावों में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद गोगोई के इस बयान को कांग्रेस के संदर्भ में बहुत अहम माना जा रहा है।

आरएसएस से जनसंपर्क सीखें- गोगोई

आरएसएस से जनसंपर्क सीखें- गोगोई

2014 के लोकसभा चुनाव से कांग्रेस को हर चुनाव में असम में बीजेपी से मुंह की खानी पड़ी है। 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी वहां 15 साल की सत्ता से बेदखल हो गई और पिछले दो लोकसभा चुनावों में वह राज्य की 14 में से सिर्फ 2 सीटें ही जीत सकी है। खासकर जब से असम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हिमांता बिस्वा सर्मा ने बीजेपी ज्वाइन किया है, कांग्रेस की स्थिति राज्य में बेहद कमजोर हो चुकी है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक गोगोई ने कहा है कि, "मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि हमें यह स्टडी करने की जरूरत है कि कैसे आरएसएस जैसे सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन ने राज्य में अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। इस नेटवर्क से आरएसएस को जनसंपर्क बढ़ाने में मदद मिली है। हम जानते हैं कि कैसे आरएसएस के प्रचारक गांवों में जाते हैं, वहां ठहरते हैं और लोगों के बीच अपना एक संबंध विकसित करते हैं। अगर कांग्रेस इस तरह का जनसंपर्क करती है, आरएसएस की विचारधारा को अलग रखकर, तो इसमें हर्ज ही क्या है।" असम के पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को 'आरएसएस मॉडल' अपनाने की सलाह वाला बयान खास तौर पर असम के संदर्भ में दिया है।

तो इसलिए हारती है कांग्रेस?

तो इसलिए हारती है कांग्रेस?

तरुण गोगोई ने एक तरह से माना है कि सिकुड़ते जनसंपर्क के कारण ही कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ रहा है। गोगोई ने कहा है कि, "लगातार तीन टर्म सत्ता में रहने के कारण हम लोग आत्मसंतुष्ट हो गए थे। अब हम लोग तबाह हो चुके हैं, हमें इसे एक अवसर के तौर पर लेना चाहिए, गलतियों की पहचान होनी चाहिए, उसे सुधार करके और ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करना चाहिए।" 2021 के असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 126 में से 80 सीटों का टारगेट रखा है, जिसे 'मिशन 80' का नाम दिया गया है। इसके लिए गोगोई का मानना है कि उन्हें आरएसएस की तरह मिशन मोड में काम करना होगा। हालांकि, उन्होंने ये साफ किया कि वो आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस के उलट बीजेपी ने असम में 2021 के लिए 100 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

पवार भी दे चुके स्वयंसेवकों से सीखने की सलाह

पवार भी दे चुके स्वयंसेवकों से सीखने की सलाह

इससे पहले कांग्रेस की सहयोगी एनसीपी के प्रमुख शरद पवार भी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सीखने की नसीहत दे चुके हैं। उन्होंने एनसीपी कार्यकर्ताओं से कहा था कि लोगों के साथ संपर्क में कैसे रहा जाय, यह आरएसएस के स्वयंसेवकों से सीखा जा सकता है। पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि, 'आपको देखना चाहिए कि आरएसएस के स्वयंसेवक कैसे प्रचार करते हैं। अगर वे पांच घरों में जाते हैं और एक बंद रहता है तो वे बार-बार वहां जाते हैं, जब तक कि अपना संदेश ना पहुंचा दें। लोगों के संपर्क में कैसे रहना है, इसे आरएसएस के कार्यकर्ता अच्छे से जानते हैं।' दरअसल, महाराष्ट्र में इसी साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसलिए पवार को भी आरएसएस की याद आ रही है।

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