क्या ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से कोरोना की तीसरी लहर से होगी नए साल की शुरुआत ? सबकुछ जानिए
नई दिल्ली, 5 दिसंबर: भारत में भी ओमिक्रॉन वेरिएंट के रोजाना नए मामले मिलते जा रहे हैं। इस स्थिति में एक्सपर्ट आशंका जताने लगे हैं कि यह वेरिएंट दुनियाभर में जितनी तेजी से फैल रहा है, उससे लगता है कि कुछ हफ्तों में फिर से देश में एक नई लहर की आशंका पैदा हो सकती है। बच्चों को लेकर भी खास चिंता लगी हुई है, क्योंकि देश में 18 साल से कम उम्र के किशोर और बच्चों को अभी कोरोना का टीका भी नहीं लगाया गया है। आइए इन हर चिंताओं और संभावनाओं के बारे में एकदम ताजा जानकारी लेते हैं और राहत की बात बता दें कि अगर तीसरी लहर जैसी कोई स्थिति पैदा होती भी है तो अब देश पहले के मुकाबले काफी ज्यादा तैयार है और इसके बारे में भी पूरी जानकारी आपके साथ जाहिर कर रहे हैं।

ओमिक्रॉन वेरिएंट-भारत में ताजा स्थिति
दिल्ली में रविवार को कोविड के ओमिक्रॉन वेरिएंट का पहला मामला मिलने के साथ देश में नए वेरिएंट से संक्रमितों की संख्या 5 हो चुकी है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक भारतीय मूल का यह व्यक्ति हाल ही में तंजानिया से राजधानी लौटा है। इससे पहले शुक्रवार को दो मामले बेंगलुरु में, एक गुजरात के जामनगर में और एक मुंबई के डोंबिवली में सामने आ चुका है। कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में कोविड-19 के नए वेरिएंट का कितना और कैसा असर पड़ेगा, इसका सही अंदाजा मिलने में कम से कम 6 से 8 हफ्तों का वक्त लग सकता है। उधर अमेरिका में एक नए रिसर्च से पता चला है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट में जो 32 म्युटेशन हुए हैं, उनमें से एक में सामान्य सर्दी-खांसी वाले वायरस का जेनिटिक मटेरियल भी शामिल है।
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क्या बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है ओमिक्रॉन ?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका में कोरोना की जो मौजूदा लहर (वहां की चौथी) जारी है, उसमें अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों की तादाद बहुत ज्यादा है। शनिवार को वहां के स्वास्थ्य अधिकारियों ने ओमिक्रॉन वेरिएंट की मौजूदगी के चलते निगरानी बढ़ाने पर जोर भी दिया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि लक्षण काफी हल्के हैं। पिछले महीने वहां त्शवेन इलाके में बड़ी तादाद में नवजातों को भी कोविड-19 की वजह से अस्पतालों में दाखिल कराया गया है, जिससे यह चिंता बढ़ी हुई है कि कहीं ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से छोटे बच्चों के लिए खतरा ना पैदा हो जाए। हालांकि, वैज्ञानिक अभी इसकी पुष्टि नहीं कर सके हैं कि क्या बच्चों में बढ़ा संक्रमण, ओमिक्रॉन की वजह से है? दक्षिण अफ्रीका में कोरोना के बहुत कम सैंपल ही जीनोमिक सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि जिन बच्चों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है, वह किस वेरिएंट से संक्रमित हैं।

क्या कोरोना की तीसरी लहर से होगी नए साल की शुरुआत ?
आईआईटी-कानपुर के एक प्रोफेसर के मुताबिक ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से नए साल के शुरुआती महीनो में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रोफेसर डॉक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है, 'अपने देश में ओमिक्रॉन के फैलने का चांस बहुत ही ज्यादा है और क्योंकि यह डेल्टा वेरिएंट से ज्यादा तेजी से फैलता है तो वो भी होगा। इसलिए, हम मान लें कि यह (ओमिक्रॉन)फैलने लगा है तो कहा जा सकता है कि अगले साल के शुरुआती महीनों में तीसरी लहर आ सकती है और अपने चरम पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम हो सकती है। '

क्या दूसरी लहर जितनी घातक होगी तीसरी लहर ?
लेकिन, उन्होंने राहत की बात ये बताई है कि अभी तक जो दक्षिण अफ्रीका और कुछ और देशों से आंकड़े मिले हैं, उससे लगता है कि कोविड-19 की तीसरी लहर कोविड की दूसरी लहर जितनी घातक नहीं होगी। जहां तो कोविड के नैचुरल इम्युनिटी या वैक्सीन इम्युनिटी का सवाल है तो उनका कहना है कि इसके बारे में अभी तक पुख्ता तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। क्योंकि, अभी तक तो यही संकेत हैं कि यह डेल्टा के मुकाबले तेजी से फैलता तो है, लेकिन यह उससे ज्यादा घातक है, इसपर अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता; और दक्षिण अफ्रीका और दूसरे देशों के केसों से पता चलता है कि संक्रमण हल्का है और गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं दिख रहे हैं।

भारत तीसरी लहर के लिए कितना तैयार है ?
इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि ओमिक्रॉन वेरिएंट पूरे विश्व में तेजी से फैलने लगा है। लिहाजा भारत में कोविड-19 को लेकर बनी विशेष एंपॉवर्ड ग्रुप ने भी हर संभावित स्थिति के लिए तेजी से तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में उच्च स्तर पर जो जानकारी साझा की गई है, उसके अनुसार पिछले कुछ महीनों में देश में अस्पताल और ऑक्सीजन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत ज्यादा काम हुआ है। इस तैयारी के संबंध में पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिटेल प्रेजेंटेशन भी दिया गया है। इसके अनुसार कोविड की दूसरी लहर की तुलना में आईसीयू की उपलब्धता 200% बढ़ चुकी है। इसी तरह जानकारी है कि लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) के लिए भारत अब 12,500-13,000 मीट्रिक टन उत्पादन के लिए तैयार है। 25,000-30,000 एमटी उत्पादन के सुझाव पर भी विचार चल रहा है। गौरतलब है कि पहली लहर में एलएमओ की मांग 3,100 एमटी के उच्च स्तर पर गई थी, जबकि दूसरी लहर में यह 9,600 एमटी तक पहुंच गई थी। इसी तरह से ईटी की एक खबर के अनुसार एलएमओ की ढुलाई वाले विशेष टैंकर भी दूसरी लहर के 718 से बढ़कर अब 1,650 टैंकर तक पहुंच गए हैं। इनके अलावा पूरे देश के सरकारी और प्राइवेट अस्तालों में ऑक्सीजन स्टोरेज प्लांट स्थापित किए गएं और पारामेडिकल स्टाफ की संख्या में भी 30%-40% इजाफे का अनुमान है।












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