मोदी की जापान यात्रा-नेताजी की अस्थियों की सच्चाई पता लगेगी?
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला)प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा का हालांकि मूल मकसद तो दोनों देशों के बीच आपसी व्यापारिक संबंधों को और मजबूती देना होगा, पर उनकी जापान यात्रा की सार्थकता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत पर से पर्दा हटाने से ही होगी।

नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है। जहां जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका जन्म दिन धूमधाम से मनाया जाता है वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत वर्ष 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नजरबन्द थे। यदि ऐसा नहीं है तो भारत सरकार ने उनकी मृत्यु से सम्बन्धित दस्तावेज़ अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किये?
मोदी की जापान यात्रा से ठीक पहले सवाल पूछा जा रहा है कि वहां रखी अस्थियां क्या वाकई नेताजी की हैं ? वरिष्ठ लेखक पदमपति शर्मा कहते हैं कि मोदी को जापान सरकार से मांग करनी चाहिए ताकि उन अस्थियों की डीएनए जांच की जाए।
उसके बाद ही उनको लेकर दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। अभी तक जितने भी प्रधान मंत्री जापान गये , किसी ने भी इस अतिसंवेदनशील मुद्दे को छेड़ने की जहमत मोल लेना मुनासिब नहीं समझा। क्यों ? यह अनुत्तरित प्रश्न देशवासियों को मथ रहा है। हालांकि कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि मोदी अपनी जापान यात्रा के समय नेताजी से जुड़ा कोई मसला नहीं उठाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डा. पुष्परंजन भी कहते हैं कि मोदी को जापान में स्मार्ट सिटी और बुलेट ट्रेन की बात जरूर करनी चाहिए मगर नेताजी का मुद्दा भूलना नहीं होगा। वे यह भी कहते हैं कि भारत सरकार को उनकी मृत्यु से सम्बन्धित दस्तावेज़ अब सार्वजनिक कर देने चाहिए ताकि देश को पता चल जाए कि उनकी मौत की गुत्थी क्या है।












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