NDA के साथ मिलकर बिहार चुनाव लड़ेगी LJP या अलग? आज होगा फैसला
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों जेडीयू और एलजेपी के बीच खींचतान नजर आ रही है।
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों जेडीयू और एलजेपी के बीच खींचतान नजर आ रही है। सोमवार को एलजेपी यानी लोक जनशक्ति पार्टी ने एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि बिहार विधानसभा का आने वाला चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए में रहकर लड़ा जाए, या फिर अकेले ही मैदान में उतरा जाए। इससे एक दिन पहले रविवार को ही एलजेपी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चिट्ठी लिखते हुए मांग की, कि पिछले 15 सालों में एससी/एसटी वर्ग के जो लोग मारे गए हैं, उनके परिवार के सदस्यों को रोजगार दिया जाए।

नीतीश के फैसले को बताया चुनावी स्टंट
आपको बता दें कि हाल ही में नीतीश कुमार की सरकार ने फैसला लिया है कि एससी/एसटी वर्ग के जिन लोगों की हत्या हुई है, उनके परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाएगी। बिहार सरकार के इस ऐलान के बाद से ही राजनीति तेज हो गई है। सीएम नीतीश के इस फैसले के बाद चिराग पासवान ने चिट्ठी लिखते हुए कहा कि अगर बिहार के मुख्यमंत्री एससी/एसटी वर्ग के उन सभी लोगों को नौकरी नहीं देते, जिनकी हत्या पिछले 15 साल में हुई है, तो उनके इस फैसले को केवल एक चुनावी स्टंट ही माना जाएगा।
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एनडीए के सभी घटक साथ हैं- जेपी नड्डा
बिहार में एलजेपी और जेडीयू के बीच चल रही इस खींचतान को देखते हुए हाल ही में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी दोनों के बीच सुलह की कोशिश की और बयान जारी करते हुए कहा कि एनडीए के सभी घटक नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। गौरतलब है कि एलजेपी के अध्यक्ष चिराग पासवनान पिछले कुछ महीनों से लगातार कोरोना वायरस महामारी से निपटने के बिहार सरकार के इंतजाम, बाढ़ के प्रकोप और लॉकडाउन से बढ़े रोजगार के संकट सहित कई मुद्दों पर सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हैं।

नीतीश पर लगातार निशाना साध रहे चिराग पासवान
रविवार को भी चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में दलित वर्ग से किए गए वादे पूरे नहीं हुए। सीएम नीतीश को लिखी चिट्ठी में चिराग पासवान ने कहा, 'ये वही बिहार सरकार है, जिसने हर दलित परिवार को भूमि देने का वादा किया था। लेकिन, सरकार ने अपना ये वादा ना निभाकर दलितों को निराश किया। आज लोग मुझ से पूछ रहे हैं कि जिन दलितों की हत्या हुआ है, उनके परिवार को नौकरी देने का वादा भी कहीं नीतीश कुमार का चुनावी स्टंट तो नहीं।'












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