माया-अखिलेश के साथ आने पर केवल इतनी सीटें पा सकती है बीजेपी
नई दिल्ली। यूपी में महागठबंधन का ऐलान हो गया है। शनिवार को अखिलेश यादव और मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सपा-बसपा गठजोड़ की घोषणा की। बुआ-बबुआ ने 2019 लोकसभा चुनाव में 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने कांग्रेस और आरएलडी के लिए दो-दो सीटें छोड़ी हैं। मोदी लहर पर सवार एनडीए ने जिस उत्तर प्रदेश में 2014 लोकसभा चुनाव में 80 में से 73 सीटें जीती थीं, उसी यूपी में 2019 लोकसभा चुनाव में उसके लिए बड़ी कठिन चुनौती पैदा हो गई है। महागठबंधन से जुड़े सर्वेक्षण तो कम से कम इसी ओर इशारा करते हैं।

सबसे पहले 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करते हैं। पिछले आम चुनाव में एनडीए ने यूपी में 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा 05, बीएसपी-0 और कांग्रेस 2 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी। अब महागठबंधन से जुड़े एबीपी न्यूज के नवंबर-दिसंबर 2018 के बीच कराए गए सर्वे के अनुमान पर एक नजर डालते हैं।
एबीपी न्यूज के सर्वे में महागठबंधन न बनने की स्थिति में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में 2014 जैसे परिणाम मिलने का अनुमान लगाया गया है, लेकिन महागठबंधन बनने की स्थिति में बीजेपी को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है। चूंकि, अब यूपी में सपा-बसपा गठजोड़ हो गया है तो पहले उसी स्थिति पर नजर डालते हैं, जिसमें महागठबंधन होने के बाद का अनुमान लगाया गया है।
यूपी में सपा-बसपा महागठबंधन बन गया है। ऐसे में एबीपी न्यूज का सर्वे एनडीए की 28 सीटों पर जीत की संभावना जता रहा है, जबकि सपा-बसपा-आरएलडी को 50 सीटें मिल सकती हैं। सर्वे में कांग्रेस को अलग रखकर अनुमान लगाया गया, जिसमें कांग्रेस को 02 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। सर्वे में महागठबंधन न बनने की स्थिति में बीजेपी को 72 सीटों पर जीत मिलने की संभावना जताई गई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अखिलेश यादव और मायावती का साथ आना बीजेपी के लिए कितनी बड़ी चुनौती है। महागठबंधन बनने पर आंकड़ों का यूं पलट जाना सिर्फ एबीपी न्यूज के सर्वे में ही नहीं दिख रहा है बल्कि सी वोटर के सर्वे में भी ऐसी ही संभावना जताई गई है।
दिसंबर 2018 में कराए गए सी वोटर के सर्वे में महागठबंधन बनने की स्थिति में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में 36 सीटें मिलने की संभावना जताई गई, जबकि महागठबंधन को 42। अब देखना होगा कि महागठबंधन की चुनौती से निपटने के लिए अब बीजेपी आखिर क्या दांव चलती है।












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