नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन, एकमात्र मिशन जो सूर्य के सबसे करीब गया, क्या आदित्य तोड़ेगा इसका रिकॉर्ड
Aditya L-1 Mission: सूर्य से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने के लिए भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 को लॉन्च किए जाने में अब 48 घंटे से भी कम का समय बचा है। धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह मिशन किस तरह से कार्य करता है, इसपर सभी लोगों की नजरें टिकी रहेंगी। बता दें कि आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को 2 सितंबर 2023 को दिन में 11 बजकर 50 मिनट पर श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। चलिए आज हमलोग सौर मिशन से जुड़ा एक रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं।
क्या आपको पता है कि भारत से पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कई सोलर मिशन अंतरिक्ष में भेजे हैं। नासा ने तीन मुख्य मिशन भेजे हैं- जिनमें सोहो (सोलर एंड हेलियोस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी), पार्कर सोलर प्रोब और आइरिस (इंटरफेस रिजन इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ) हैं। इनमें से सबसे कामयाब पार्कर सोलर प्रोब रहा जो कि चार साल से सूर्य की सतह के सबसे करीब चक्कर लगा रहा है। इसके अलावा आइरिस (इंटरफेस रिजन इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ) सूर्य के सतह की हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें ले रहा है। लेकिन आज हमलोग जानेंगे कि क्या आदित्य एल-1 नासा के पार्कर सोलर प्रोब मिशन का रिकॉर्ड तोड़ पाएगा।

आदित्य L-1 VS सोलर प्रोब मिशन
बता दें कि आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित भारतीय मिशन होगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में भेजा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। यह अंतरिक्ष यान सात पेलोड्स लेकर अंतरिक्ष में जाएगा जो फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूर्य के सबसे बाहरी परत का अध्ययन करेंगे। वहीं सूर्य के अध्ययन में अभी तक सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन, जो सूर्य के सबसे करीब पहुंचने वाला एकमात्र अंतरिक्षयान है। सोलर प्रोब रहा जो कि चार साल से सूर्य की सतह के सबसे करीब चक्कर लगा रहा है।
आदित्य L-1 मिशन नासा के सोलर प्रोब का तोड़ सकता है रिकॉर्ड
इसरो के वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि आदित्य L-1 मिशन चंद्रयान-3 की तरह ही इतिहास रचेगा और दुनिया के लिए मिसाल साबित होगा। आदित्य एल-1 को लैग्रेंज बिंदु 1 के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने से उपग्रह को बिना किसी रुकावट के सूर्य लगातार दिखेगा। इसरो प्रमुख ने कहा कि प्रक्षेपण के बाद इसे पृथ्वी से लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल1) तक पहुंचने में 125 दिन लगेंगे। आदित्य एल-1 मिशन लैग्रेंज प्वॉइंट-1 के आसपास का अध्ययन करेगा। दरअसल, लैग्रेंज पॉइंट अंतरिक्ष में स्थित वो स्थान हैं, जहाँ सूर्य और पृथ्वी जैसे दो पिंड प्रणालियों के गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण और प्रतिकर्षण के उन्नत क्षेत्र उत्पन्न करते हैं।












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