बिन केजरीवाल के कैसा होगा अन्ना का लोकपाल आंदोलन?
इस बार ना तो उनके अनशन में उनके साथ दिल्ली के नये हीरो अरविंद केजरीवाल साथ होंगे औऱ ना ही दिल्ली का रामलीला मैदान जहां आज से दो साल पहले एक ऐसा लोगों का हूजूम एकत्र हुआ था जिसकी वजह अन्ना का आंदोलन केवल देश में ही नहीं बल्कि एशिया की एक बड़ी खबर बन गया था। तब अन्ना अनशन पर बैठे उनका साथ देने के लिए उनके अर्जुन बनें अरविंद केजरीवाल भी उनके बगल में बैठे थे जो हर सही-गलत बात का विश्लेषण करते थे।
लेकिन केजरीवाल को लगा कि केवल अनशन और नारेबाजी करने से वह देश की भ्रष्ट व्यवस्था से नहीं लड़ सकते हैं, उन्हें भी ताकतवर दुश्मनों का नाश करने के लिए शस्त्र उठाने होंगे और उन्होंने ऐसा करके दिखाया, वह राजनीति में उतर आये, आम लोगों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और आज वह दिल्ली के नये हीरो बन गये हैं।
इसमें कोई शक नहीं कि अन्ना के सहयोग से मिले जनतंत्र को केजरीवाल ने अपने साथ ले लिया और अपना रास्ता बदल दिया लेकिन अन्ना आज भी वहीं खड़े हैं जहां आज से दो साल पहले थे।
इस बार भी अन्ना ने कहा है कि वह सरकार से अपनी बात को मनवा कर रहेंगे, अन्ना वही है, उनका जोश भी वही है लेकिन उनके आस-पास चेहरे इस आंदोलन में बदल जायेंगे। अन्ना को पूरा भरोसा है कि सरकार उनकी बात को सुनेगी और अपना अंहकार छोड़ेगी।
अन्ना के भरोसे का इम्तहान एक बार फिर से शुरू होने जा रहा है नये चेहरों के साथ, देखना दिलचस्प होगा कि अन्ना के आंदोलन की वजह से दिल्ली की सत्ता को गंवाने वाली कांग्रेस सरकार इस बार अन्ना के अनशन पर क्या एक्शन लेती है? अन्ना के जनलोकपाल बिल को सरकार की हरी झंड़ी मिलती है या फिर अन्ना के इस नये आंदोलन से किसी नये केजरीवाल का जन्म होता है?
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