दिल्ली विधानसभा चुनाव: डोंट अंडरइस्टीमेट द पॉवर ऑफ कॉमन मैन
दिल्ली के लोगों के सामने इस बार कांग्रेस और भाजपा के अलावा एक तीसरा विकल्प था जिसका नाम है 'आप' यानी की आम आदमी पार्टी। जिसके लिए ना तो कोई बड़ा फिल्म स्टार प्रचार करने आया और ना ही किसी बड़े राजनैतिक हस्ती ने इस पार्टी से चुनाव लड़ा। यह पार्टी है आम लोगों की जिसने केवल सच्चाई, ईमानदारी और अपने पर लोगों को भरोसा करना सिखाया। जिसका सारा श्रेय जाता है निश्चित तौर पर पार्टी के संयोजक अऱविंद केजरीवाल को।
जिन्होंने एक रिक्शेवाले के अंदर भी देश के आदर्श नागरिक बनने की चेष्टा पैदा कर दी। इस साल की सुपरहिट फिल्मों में से एक है शाहरूख खान की 'चेन्नई एक्सप्रेस' जिसका मशहूर संवाद है Dont underestimate the power of common man. जिसे कि पूरी तरह से चरितार्थ कर दिया केजरीवाल और उनकी टीम ने।
आम आदमी को कीड़े-मकौड़े समझने वाले राजनौतिक पुरोधा को आज इस बात पर पूरी तरह भरोसा करना होगा कि देश की जनता बहुत कुछ कर सकती है। जिसके सहारे वो सत्ता हासिल करते हैं उसे ही वह चुनावों के बाद भूल जाते हैं लेकिन आप के कदम से अब उन्हें चुनाव के पहले और चुनाव के बाद हर समय केवल आम जनता का ही ख्याल रखना होगा।
दिल्ली विवि की छात्रा अंकिता गोस्वामी ने वनइंडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस और बीजेपी से बराबर दूरी ही आप को दूर तक ले जाएगी। यह आप औऱ केजरीवाल का ही दम था कि भाजपा ने दिल्ली चुनाव के एन मौके पर अपने सीएम प्रत्याशी विजय गोयल की जगह हर्षवर्धन को बदल दिया। अंतिम समय में उनके घोषणापत्र में बिजली का सस्ता होना शामिल हो गया।
मुझे खुशी है कि आज दिल्ली विधानसभा को एक ऐसा विपक्ष मिलने जा रहा है जिसके डर से सत्ता पक्ष भी गलत काम करने से पहले सौ बार सोचेगा क्योंकि इस विपक्ष के पास जनाधार है जो यह कहता है कि Dont underestimate the power of common man.
कुछ ऐसी ही बातें दिल्ली की आईटी कंपनी में काम करने वाले नवीन श्रीवास्तव ने भी वनइंडिया से कही कि मैं दिल्ली के चुनावी नतीजों से बहुत ज्यादा खुश हूं कम से कम बदलाव की शुरूआत तो हुई। आज मुझे एहसास हो रहा है कि मैं भी यानी कि आम आदमी भी देश का जरूरी हिस्सा हूं। अब कम से कम हमारे नाम पर धन उगाही करने वाले नेतागण हमें हल्के में तो नहीं लेंगे। मैं भी शाहरूख की तरह अपने नेताओं को कहना चाहता हूं कि Dont underestimate the power of common man.
तो देखा आपने किस तरह से आज दिल्ली के लोगों के सामने राजनीति की एक नई तस्वीर सामने आयी है जिसमें ना तो किसी परिवार वाद की छाप है और ना ही किसी वंशवाद की परछाई। इस तस्वीर में एक नया आईना है जिसमें केवल आम लोगों का चेहरा दिखता है और जिनसे देश की तस्वीर मुकक्मल होती है।













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