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Satyendar Jain: जेल में सिर्फ फल और सब्जियां ही क्यों खा रहे थे AAP नेता सत्येंद्र कुमार जैन?

58 वर्षीय दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और AAP नेता सत्येंद्र जैन की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। 25 मई को सत्येंद्र जैन को लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

Satyendar Jain health

सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और AAP नेता सत्येंद्र जैन को मेडिकल ग्राउंड पर 6 हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। सत्येंद्र जैन को 11 जुलाई तक के लिए जमानत दी गई है और गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या उस अवधि के भीतर दिल्ली छोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। कोर्ट मामले की अगली 10 जुलाई को करेगी।

सत्येंद्र जैन को इससे एक दिन पहले 25 मई को तिहाड़ जेल के एक वॉशरूम में गिरने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। उन्हें पहले दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में सांस लेने में तकलीफ के कारण लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।

पिछले सात दिनों में यह दूसरी बार है जब दिल्ली के पूर्व मंत्री को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद पिछले हफ्ते उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था।

इन सभी घटनाक्रम के दौरान एक चीज चर्चा में रही, वो है सत्येंद्र जैन का जेल में रहने के दौरान उनका खानपान। पिछले साल मई 2022 में जेल जाने के बाद से सत्येंद्र जैन ने अन्न ग्रहण नहीं किया है। जेल में रहने के दौरान सत्येंद्र जैन ने सिर्फ फल, सलाद, सब्जियां और ड्राई फ्रूट्स खाई है। जिससे उनका वजन पिछले एक साल में 35 से 40 किलो कम हो गया है।

अब यहां सवाल उठता है कि आखिर सत्येंद्र जैन ने अनाज खाना क्यों छोड़ दिया था। नवंबर 2022 में सत्येंद्र जैन ने दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि जेल प्रशासन उन्हें उनके 'धार्मिक मान्यता' के अनुसार भोजन नहीं दे रहा है।

सत्येंद्र जैन ने मांग थी कि उनके आहार में फल और सलाद और अन्य चीजें शामिल हों जो 'जैन भोजन' का हिस्सा है। अपने आवेदन में सत्येंद्र जैन ने आरोप लगाया था कि उन्हें जैन मंदिर नहीं जाने दिया जा रहा है, जिसकी वजह से वह एक धार्मिक उपवास पर हैं और खाना नहीं खा रहे हैं।

याचिका में यह भी दावा किया गया था सत्येंद्र जैन "जैन धर्म के कट्टर अनुयायी" हैं और गिरफ्तारी के बाद छह महीनों से केवल फल, सब्जियां, शीड्स और सूखे मेवे या खजूर ही खाए हैं।

यही वह वजह है जिससे जेल में सत्येंद्र जैन अन्न ग्रहण नहीं कर रहे थे। असल में जैन धर्म के कट्टर अनुयानी बिना जैन मंदिर में दर्शन किए कोई भी पकाया हुआ खाना नहीं खाते हैं। सत्येंद्र जैन इसी धर्म का पालन करते हुए पका हुआ खाना नहीं खा रहे थे। सिर्फ फल और सब्जियां से ही उनका वजन कम हो गया है।

प्रवर्तन निदेशालय ने का कहना है कि सत्येंद्र जैन का वजन कम होना उनकी आस्था और उपवास की आवश्यकता के कारण हो सकता है।

'जैन भोजन' क्या है और इसका पालन कैसे किया जाता है?

jainworld.com के मुताबिक जैन समुदाय एक शाकाहारी-भोजन-आधारित समुदाय है। जो अहिंसा के सिद्धांत का पालन करता है। जैन दिन के निश्चित समय पर ही कुछ खाद्य पदार्थ खाते हैं। वह कई खाद्य पदार्थ से धार्मिक मान्यताओं की वजह से दूरी बना लेते हैं।

jainworld.com में डॉ. हुकम चंद भारिल की पुस्तक 'शाकाहारी भोजन और जैन आचरण' में लिखा गया है कि जैन खाद्य पदार्थ केवल हरी-सब्जियों पर केंद्रित हैं। सब्जियों में भी जैन जमीन के नीचे उगने वाली सारी सब्जियां नहीं खाते हैं।

यानी जैन समुदाय के लोग प्याज, लहसुन, अदरक, आलू, गाजर, चुकंदर, मूंगफली जैसी चीजें नहीं खाते हैं। कई कट्टर जैन मशरूम भी नहीं खाते हैं। बहुत सारे जैन साबूदाना भी नहीं खाते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इसे बनाने की प्रक्रिया उनके धार्मिक वर्जनाओं का उल्लंघन होता है।

जैन आमतौर पर सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही भोजन करते हैं। इसके अलावा कट्टर जैन अनुयानी साल भर में कुछ ऐसे दिन होते हैं, जब वह खान-पान से परहेज करते हैं। यह उनके आध्यात्मिक विकास के लिए अच्छा माना जाता है।

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