Arundhati Roy: अरुधंति रॉय पर क्यों लगाया गया UAPA? क्या है वो 14 साल पुराना मामला?
Arundhati Roy: लेखिका और समाजिक कार्यकर्ता अरुधंति रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी है।
अरुधंति रॉय और शेख शौकत हुसैन के खिलाफ 'सार्वजनिक रूप से भड़काऊ भाषण देने' के लिए पहली बार एफआईआर दर्ज होने के 14 साल बाद यूएपीए के कड़े आरोप लगाए गए हैं। आइए जानें वो पूरा मामला क्या है?

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अक्टूबर 2023 में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अरुधंति रॉय और डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए, 153बी और 505 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने यूएपीए की धारा 13 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी लेकिन उपराज्यपाल इनकार कर दिया था। ये प्रावधान अकसर नफरत फैलाने वाले भाषण के मामलों से निपटने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। जिसमें अधिकतम तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
Arundhati Roy Case: किस मामले में अरुधंति रॉय पर चलेगा UAPA के तहत मुकदमा?
अरुधंति रॉय पर जिस मामले में UAPA के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, ये मामला 14 साल पुराना यानी अक्टूबर-नवंबर 2010 का है। अरुंधति राय पर कश्मीर पर आपत्तिजनक भाषण देने का आरोप है। अरुधंति रॉय के खिलाफ सुशील पंडित की शिकायत पर 29 नवंबर 2010 को एफआईआर दर्ज की गई थी।

दिल्ली के उपराज्यपाल के ऑफिस से जो बयान जारी किया गया है, उसके मुताबिक, '' 21 अक्टूबर 2010 को दिल्ली के एलटीजी ऑडिटोरियम में 'आजादी-द ओनली वे' एक प्रेस कॉन्फ्रेंस, में कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए प्रचार-प्रसार किया गया था। इस सम्मेलन में अरुंधति रॉय, डॉ. शेख शौकत हुसैन, सैयद अली शाह गिलानी, एसएआर गिलानी और माओवादी समर्थक वरवर राव शामिल थे।''
दिल्ली के उपराज्यपाल के दफ्तर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'आजादी-द ओनली वे' सम्मेलन में सबसे ज्यादा एसएआर गिलानी और अरुंधति रॉय ने इस बात का प्रचार किया था कि, 'कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं था। उसपर भारत के सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा कर लिया था।'

बयान के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने इस 'आजादी-द ओनली वे' सम्मेलन की रिकॉर्डिंग भी दी है। शिकायतकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत एमएम कोर्ट और नई दिल्ली के समक्ष शिकायत दर्ज की थी। जिसके आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज कर जांच की गई थी।
अरुधंति रॉय और डॉ. हुसैन के खिलाफ अक्टूबर 2010 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, नई दिल्ली की अदालत के आदेश के बाद सुशील पंडित की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले के अन्य दो आरोपी कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और दिल्ली विश्वविद्यालय के लेक्चरर सैयद अब्दुल रहमान गिलानी दोनों की कार्यवाही के दौरान मृत्यु हो गई थी।












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