क्यों राष्ट्रपति ओबामा नहीं, पुतिन भारत के लिए साबित होंगे मजबूत साझीदार
नई दिल्ली। भारत और रूस के रिश्ते पिछले छह दशकों से मजबूत हैं और इस बात में कोई शक नहीं है कि दोनों देश एक दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझीदार हैं।
इसके बावजूद पिछले वर्ष जब भारत में नरेंद्र मोदी की नई सरकार आई और रूस यूक्रेन संकट से जूझने लगा तो कई लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि दोनों के रिश्तों में दूरियां आ रही हैं। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब रूस ने पाकिस्तान के साथ एक अहम डीफेंस डील कर डाली।
पिछले वर्ष रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन भारत आए और दोनों देशों के रिश्ते एक कदम और आगे बढ़े। पिछले एक वर्ष में अतंराष्ट्रीय स्तर पर रूस की स्थिति में सुधार आ गया है।
जो देश यूक्रेन संकट की वजह से रूस से किनारा करने लगे थे वही अब रूस की ताकत का लोहा मान रहे हैं। सीरिया में जारी आईएसआईएस के खिलाफ हमलों ने रूस को एक नई ताकत दे दी है।
आइए आपको बताते हैं उन वजहों के बारे में कि आखिर क्यों इस समय भारत के लिए अमेरिका से ज्यादा रूस की अहमियत है।

दुनिया को चुनौती
आईएसआईएस के खिलाफ रूस ने जो हमले शुरू किए हैं उनकी वजह से राष्ट्रपति पुतिन दुनिया में सबसे ताकतवर नेता बनकर उभरे हैं। खुद अमेरिका में विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि अब रूस को सीरिया में कार्रवाई करने देनी चाहिए और अमेरिका को हस्तक्षेप से दूर रहना चाहिए।

अगले वर्ष चले जाएंगे ओबामा
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का बतौर राष्ट्रपति कार्यकाल का अंतिम दौर है। जहां एक तरफ उनके देश में ही उन पर उंगलियां उठने लगी हैं तो वहीं भारत को यह समझना होगा कि अगले वर्ष जो नया राष्ट्रपति आएगा भारत पर उसकी नीति को समझने में थोड़ा समय लग सकता है।

अमेरिका की नीति संदेहास्पद
पाकिस्तान पर अमेरिका की नीति हमेशा से संदेहास्पद रही है। साथ ही भारत की नजरअंदाजगी की वजह से रूस पाकिस्तान के करीब हो सकता है। रूस ने पाकिस्तान के लिए एक अहम डील साइन करके इसका संकेत भी दे दिया है।

सीरिया में कमजोर होता आईएसआईएस
पिछले दिनों सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की ओर से बयान दिया गया था कि जब से रूस ने हमले शुरू किए हैं तब से ही आईएसआईएस थोड़ा कमजोर हुआ है। अब जबकि भारत पर भी इस संगठन की ओर से खतरा बढ़ रहा है, उसके लिए जरूरी है कि रूस को अपने साथ रखे।

अमेरिका हुआ पुराना
भारत ने फ्रांस के साथ राफल फाइटर जेट्स की डील जब साइन की तो कई लोगों ने कहा था भारत ने रूस की नजरअंदाजगी की है। भारत को अब यह समझना होगा कि अमेरिका की तकनीक भले ही उन्नत हो लेकिन आज रूस ने उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। सीरिया में लगातार हो रहे हमलों की ओर से यह बात साफ हो जाती है।

भारत के लिए भी अहम
भले ही यूक्रेन संकट ने रूस को आर्थिक तौर पर कमजोर किया हो लेकिन रूस एक बार फिर से ताकतवर हो गया है। ऐसे में व्यापार को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत और रूस के बीच वर्ष 2025 तक व्यापार बढ़कर 30 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। वर्ष 2012 के बाद 24 प्रतिशत की तरक्की दर्ज हुई है।

रूस ने किया है वादा
पीएम नरेंद्र मोदी ने जिस महत्वाकांक्षी मिशन 'मेक इन इंडिया' की शुरुआत की है, रूस उसमें एक अहम भागीदार साबित हो सकता है। रूस ने करीब 100 बिलियन डॉलर की भागीदारी का प्रस्ताव भारत को दिया है। सिर्फ इतना ही रूस देश के कई अहम शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने में भारत की मदद को तैयार है।

भारत और रूस हमेशा रहेंगे साथ
यूक्रेन संकट और अमेरिका के साथ करीबियों के बाद दुनिया के कई देश यह बात मानने लगे हैं कि भारत और रूस के बीच संबंध थोड़े ठंडे पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी का रूस दौरा दुनिया के उन तमाम देशों के लिए एक बड़ा संदेश साबित हो सकता है कि भारत और रूस हमेशा से ही साथ हैं।












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