लोकसभा उपचुनावों में क्यों बेअसर साबित हो रही है 'मोदी लहर'
साल 2014 में हुए सोलहवीं लोकसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने विकास को मुद्दा बनाया था.
इसे लोगों ने वरीयता दी और आम चुनावों में भाजपा को कुल 282 सीटें मिली थीं. पार्टी को मिले इस प्रचंड बहुमत को 'नरेंद्र मोदी की लहर' बताया गया.
लेकिन 2014 के आम चुनावों के बाद अब तक लोकसभा की 16 सीटों के लिए उप-चुनाव हुए हैं जिनमें से केवल दो सीटों पर ही भाजपा जीत हासिल कर पाई है.
वरना बुधवार को गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर मिली हार के बाद 14 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जिनपर भाजपा के विरोधियों की जीत मिली है.
वहीं जिन दो सीटों पर हुए उप-चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल की, वो सीटें 2014 के आम चुनाव में भी भाजपा ने ही जीती थीं.
और 2014 के आम चुनाव के बाद 14 में से 5 सीटें (अजमेर, अलवर, गोरखपुर, फूलपुर और श्रीनगर लोकसभा सीट) ऐसी थीं, जो भाजपा के पास थी और अब वे उनके हाथ से निकल चुकी हैं.
यानी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा को एक भी लोकसभा सीट की बढ़त हासिल नहीं हुई, बल्कि पाँच सीटें घट ज़रूर गईं.
भाजपा का गिरता ग्राफ़
आम चुनाव के बाद सबसे पहले 2014 में ही ओडिशा की कंधमाल लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हुए थे जिसमें बीजेडी उम्मीदवार ने भाजपा को शिकस्त दी थी.
उसके बाद तेलंगाना के मेढक में हुए उप-चुनाव में टीआरएस ने भाजपा को हराया.
2014 में ही उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में हुए उप-चुनाव में सपा ने भाजपा को हराया.
वडोदरा सीट भाजपा ने बचाई
लेकिन 2014 में गुजरात की वडोदरा सीट पर हुए उप-चुनाव में भाजपा अपनी सीट बचाने में कामयाब रही थी.
साल 2015 भी भाजपा के लिए कोई ख़ास अच्छा नहीं रहा. इस साल वारंगल और पश्चिम बंगाल में उप-चुनाव हुए.
एक जगह टीआरएस को जीत मिली तो दूसरी जगह ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को जीत हासिल हुई.
2016 में कुल 3 सीटों के लिए उप-चुनाव हुए. लेकिन भाजपा केवल मध्यप्रदेश के शहडोल को बचाने में ही कामयाब हुई जबकि पश्चिम बंगाल के तामलूक और कूचबिहार में तृणमूल को जीत हासिल हुई.
बीते दो साल में गवाईं 6 लोकसभा सीटें
2017 में केवल एक उप-चुनाव हुए जिनमें भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर लोकसभा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के फ़ारुक़ अब्दुल्लाह विजयी हुए थे.
2018 में अब तक लोकसभा की पाँच सीटों पर उप-चुनाव हुए हैं लेकिन भाजपा एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी है.
राजस्थान के अजमेर और अलवर की सीटों पर कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की. वहीं 11 मार्च को तीन सीटों पर हुए उप-चुनाव में बिहार के अररिया में राष्ट्रीय जनता दल ने जीत हासिल की तो उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की.
गोरखपुर उप-चुनाव क्यों था अहम?
लेकिन इन सभी उप-चुनावों मे शायद यूपी उप-चुनाव नतीजे सबसे अहम हैं.
गोरखपुर इसलिए बहुत अहम है क्योंकि ये सिर्फ़ मौजूदा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की सीट नहीं थी बल्कि 1989 के बाद से भाजपा एक बार भी ये सीट नहीं हारी थी.
ख़ुद योगी ही 1998 से लगातार पाँच बार यहाँ से सांसद चुने जा चुके हैं.
उसी तरह फूलपुर भी अहम है क्योंकि ये मौजूदा उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीट थी और ये सीट उन्होंने 2014 आम चुनाव में तीन लाख से भी अधिक वोटों से जीती थी.












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