क्या लड़की के साथ छेड़छाड़ करना मानवाधिकार है?

इस सवाल के उत्तर को खोजने से पहले हम आपको एक सप्ताह पीछे ले चलते हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखने का अपना फरमान सुनाया। उस वक्त तमाम मानवाधिकार संगठन व खुद मानवाधिकार आयोग सुप्रीम कोर्ट के विरोध में उतर आया और कहा कि हर मनुष्य को अपने तरह से जीने का अधिकार है। इसलिये इसे अपराध की श्रेणी में लाना गलत होगा। अगर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की इस लाइन को इंटर्न के यौन शोषण पर प्रतिबिंबित करें, तो कितना शर्मनाक होगा इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं।
कुल मिलाकर कहनो का तात्पर्य यह है कि जिस तरह कोई भी घोटाला होने पर देश का कानून बनाने वाले नेता आरोपित नेता या अधिकारी को पद से इस्तीफा देने की मांग करने लगते हैं, या फिर दबाव बनाने लगते हैं, उस तरह जस्टिस गांगुली पर अब तक दबाव क्यों नहीं बनाया गया। जो लोग मेंरी इस खबर का विरोध करते हैं, या यह कहते हैं, कि अब तक गांगुली पर कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ, तो वो इस्तीफा क्यों दें? तो उनसे मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि देश में अब तक किसी भी बड़ी हस्ती ने पद से इस्तीफा देने के लिये कोर्ट के फैसले का इंतजा नहीं किया, यूं कहिये कि उन्हें इतजार करने का समय ही नहीं दिया गया, तो गांगुली को क्यों? और फिर भी अगर गांगुली के हिमायती को यह लगता है कि उन्हें इस पद पर बने रहना चाहिये, तो इससे साफ है कि उस व्यक्ति की नजर में लड़की से छेड़खानी करा भी मानवाधिकार है।
हम आपको बता दें कि जस्टिस गांगुली को इस पद से हटाने का मामला मंगलवार को संसद में भी उठा। जल्द ही केंद्र सरकार इस मामले को संज्ञान में ले सकती है। यह मामला उठाने वाले कोई और नहीं बल्कि बंगाल से सांसद सुखेंशु शेखर रॉय ने उठाया।












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