सुदर्शन रेड्डी को विपक्ष ने क्यों बनाया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार? 5 प्वाइंट में समझें पूरी क्रोनोलॉजी
B. Sudershan Reddy (Vice President): विपक्षी INDIA गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके नाम का ऐलान किया, जबकि कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि गठबंधन की सभी पार्टियों ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर सहमति जताई है।
तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी पुष्टि की कि आम आदमी पार्टी सहित सभी सहयोगी दल इस फैसले से सहमत हैं। अब उनका सीधा मुकाबला एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से होगा। सुदर्शन रेड्डी के नाम की घोषणा होते ही INDIA ब्लॉक ने उपराष्ट्रपति चुनाव में एक ऐसी चाल चली है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक NDA को असहज करने वाली और उसके सहयोगियों को कठिन परिस्थिति में डालने वाली बता रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर सुदर्शन रेड्डी पर विपक्ष ने क्यों दांव खेला है।

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: बी. सुदर्शन रेड्डी के चयन के पीछे ये हैं बड़े कारण
🔴 1. दक्षिण भारत का संतुलन
जैसे एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरण साधने के लिए उम्मीदवार बनाया, वैसे ही INDIA ब्लॉक ने भी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से ताल्लुक रखने वाले पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी पर दांव खेला है।
🔴 2. क्षेत्रीय दलों पर दबाव
सुदर्शन रेड्डी का नाम सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की क्षेत्रीय पार्टियां जैसे टीडीपी, वाईएसआरसीपी और बीआरएस अब दोबारा सोचने को मजबूर होंगी कि किसे समर्थन दें। हालांकि, जगन मोहन रेड्डी पहले ही एनडीए के पक्ष में समर्थन की घोषणा कर चुके हैं।
इससे पहले जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी ने एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को समर्थन देने का भरोसा दिया है। उन्होंने राजनाथ सिंह से बातचीत में कहा है कि वाईएसआरसीपी 11 सांसद उनको सपोर्ट करेंगे।
🔴 3. विपक्ष का संदेश - संघ बनाम संविधान
विपक्षी दलों का कहना है कि "एनडीए संघ विचारधारा से जुड़े उम्मीदवार को ला रहा है, जबकि हम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को सामने रख रहे हैं।" यह मुकाबला वैचारिक स्तर पर भी दिखाने की कोशिश की जा रही है।
🔴 4. सभी दलों की शर्तों पर खरा
सुदर्शन रेड्डी का नाम इसलिए भी चुना गया क्योंकि वे विपक्षी खेमे की सभी शर्तों पर फिट बैठते हैं -दक्षिण भारत से उम्मीदवार, जैसा डीएमके चाहती थी। राजनीति से बाहर का चेहरा, जिसकी मांग टीएमसी ने की थी।
- दक्षिण भारत से उम्मीदवार : डीएमके की मांग पूरी हुई।
- राजनीति से बाहर का चेहरा : टीएमसी की शर्त मान ली गई।
- आम आदमी पार्टी का समर्थन : इसे विपक्ष का 'फुल कैंडिडेट' बनाया गया।
🔴 5. साफ-सुथरी छवि
जैसे एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन की छवि बेदाग मानी जाती है, वैसे ही सुदर्शन रेड्डी का नाम भी विवादों से दूर रहा है। विपक्ष चाहता था कि उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसा ही चेहरा उतारा जाए जिसपर कोई आरोप या दाग न हो।
🔴 6. सुदर्शन रेड्डी का नाम इसलिए भी खास मायने रखता है क्योंकि उनका टीडीपी से पुराना संबंध रहा है। 1980 और 1990 के दशक में वकालत करते समय वे चंद्रबाबू नायडू के करीबी माने जाते थे, जो उस दौर में टीडीपी सरकार में दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता थे।
उस दौरान रेड्डी ने न केवल कई विश्वविद्यालयों के कानूनी मामलों की पैरवी की, बल्कि टीडीपी सरकार के विभागीय मामलों को भी संभाला। यही वजह है कि उनका आंध्र प्रदेश की राजनीति से गहरा रिश्ता रहा है।
Who is B. Sudershan Reddy: कौन हैं जज बी सुदर्शन रेड्डी?
🔹 बी. सुदर्शन रेड्डी भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं। बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म रंगारेड्डी जिले में 8 जुलाई 1946 को हुआ था। उनके पास बी.ए., एलएल.बी की डिग्री है। वे 27 दिसंबर 1971 को आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकृत हुए। उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में रिट और सिविल मामलों में प्रैक्टिस की।
🔹 साल 1988 से 1990 तक उन्होंने हाई कोर्ट में सरकारी वकील (Government Pleader) के रूप में काम किया। इसके अलावा 1990 में 6 महीने की अवधि के लिए केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील (Additional Standing Counsel) भी रहे।
🔹 वे उस्मानिया विश्वविद्यालय के लिए विधिक सलाहकार (Legal Adviser) और स्थायी वकील (Standing Counsel) के तौर पर भी कार्यरत रहे।
🔹 2 मई 1995 को उन्हें आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 5 दिसंबर 2005 को उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
🔹 12 जनवरी 2007 को वे भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) के न्यायाधीश नियुक्त हुए। वे 8 जुलाई 2011 को सेवानिवृत्त हुए।
🔹 रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला, हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था।
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