I.N.D.I.A. को दिल्ली में क्यों है हेडक्वार्टर की तलाश? मुंबई की बैठक में आ सकता है प्रस्ताव

बीजेपी के खिलाफ 26 विपक्षी दलों के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस-इंडिया की दो बैठकें हो चुकी हैं, तीसरी मुंबई में 31 अगस्त और 1 सितंबर को होने वाली है। अभी तक यह गठबंधन भाजपा के खिलाफ सीटों पर तालमेल के साथ लड़ने और अपने ग्रुप के नाम को लेकर फैसला कर चुका है। मुंबई की बैठक में इसमें शामिल दल दिल्ली में अपना अलग हेडक्वार्टर बनाने पर भी निर्णय ले सकते हैं।

विपक्षी पार्टियों का इंडिया गठबंधन लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के साथ मुकाबला करने की तैयारी में है। लेकिन, तथ्य ये है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन या एनएडीए का इस तरह का कोई मुख्याल या कार्यालय अबतक नहीं है। जबकि, सत्ताधारी गठबंधन ने हाल ही में अपनी स्थापना का 25वां वर्षगांठ मनाया है।

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'इंडिया' की अलग पहचान बनाने का इरादा
जानकारी के मुताबिक इंडिया ब्लॉक की पार्टियां अपने गठबंधन को एक खास पहचान देने के लिए दिल्ली में अलग से मुख्यालय बनाने पर विचार कर रही हैं। इससे पहले कांग्रेस की अगुवाई वाला जो पूराना संयुक्त प्रगतिशील गठंधन या यूपीए था, उसका भी इस तरह से कोई मुख्यालय नहीं था।

मुंबई बैठक में हो सकता है दिल्ली हेडक्वार्टर पर विचार
इंडिया गठबंधन में इस मामले को लेकर जो चर्चा चल रही है, उसकी जानकारी रखने वाले एक नेता के मुताबिक, 'इंडिया के कुछ सहयोगियों ने प्रस्ताव दिया है कि हमारे पास आपसी तालमेल और सचिवालय कार्यों और बैठकों के लिए दिल्ली में एक ऐक्टिव सामूहिक दफ्तर, एक हेडक्वार्टर होना चाहिए। हम गठबंधन के नेताओं के आने वाली बैठक (मुंबई में 31 अगस्त और 1 सितंबर को) में इस प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और एक सामूहिक नजरिया पेश करेंगे।'

'बड़े भाई' की भूमिका से बाहर निकलने की कवायद!
दरअसल, एनडीए हो या यूपीए इन दोनों गठबंधनों की अगुवाई क्रमश: भाजपा के हाथों में है या पहले कांग्रेस के हाथों में रह चुकी है। लेकिन, इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियां अपनी अलग पहचान कायम करना चाहती हैं। शायद इसके पीछे ये वजह है कि कोई भी पार्टी 'बड़े भाई' टाइप भूमिका में नजर न आए।

अलग दफ्तर के प्रस्तावकों को लगता है कि उनके गठबंधन में कुछ ऐसी भी पार्टियां हैं, जो विभिन्न जगहों पर एक-दूसरे की कट्टर विरोधी हैं। अलग मुख्यालय होने से इसकी एक अलग पहचान तो मिलेगी ही, हर पार्टी की अपनी एक स्वतंत्र और समान भूमिका होगी और कोई भी पार्टी 'बड़े भाई' वाली भूमिका में नजर नई आ सकेगी। अगर मुंबई में सहमति बन गई तो दिल्ली में लुटियंस इलाके में इंडिया के लिए नए दफ्तर की तलाश शुरू हो सकती है।

एनडीए में बीजेपी और यूपीएम में कांग्रेस अगुवा की भूमिका में रही है
अभी एनडीए की जब भी बैठक होती है तो बीजेपी हेडक्वार्टर में हो जाती है या फिर गठबंधन के नेता प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर जुट जाते हैं। इसी तरह से यूपीए के दौरान भी घटक दलों के नेता पीएम आवास पर जुट जाते थे या कांग्रेस की सहूलियत के हिसाब से वेन्यू तय हो जाता था। लेकिन, इनका अपना कोई अलग से कार्यालय कभी नहीं बना। मानसून सत्र में जब पहली बार इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियां संसद में रणनीति बनाने के लिए जुट रहे थे तो वे राज्यसभा में विपक्षी दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में इकट्ठे हो रहे थे।

इन गठबंधनों का दिल्ली में रहा है मुख्यालय
लेकिन, ऐसा नहीं है कि देश में किसी भी बड़े राष्ट्रीय सियासी गठबंधन का अलग से कार्यालय या मुख्यालय रखने की परंपरा नहीं रही है। जब वीपी सिंह की अगुवाई में बीजेपी-लेफ्ट के समर्थन से नेशनल फ्रंट की सरकार थी, तब विंडसर प्लेस में इसका मुख्यालय होता था। इसी तरह से जब 1996 से 1998 तक यूनाइटेड फ्रंट की सरकार बनी तो 7 अकबर रोड उसका हेडक्वार्टर होता था। वैसे ये अलग बात है कि ये दोनों ही सरकारें भारतीय राजनीति में आया राम-गया राम के लिए जानी जाती हैं।

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