मोदी से लेकर केजरीवाल से क्यों मिलते हैं गजल गायक गुलाम अली
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) गजल गायकी में गुलाम अली का कोई सानी नहीं है। एक से बढ़कर एक गजलें उन्होंने गाकर अपने शैदाइयों को गदगद किया है। पर इधर हाल के दौर में पाकिस्तान के लाहौर शहर से संबंध रखने वाले गुलाम अली साहब लगता है कि भारत में खास हस्तियों से संबंध मधुर और मजबूत बनाने में लग गए हैं।
मिले मोदी से
गुलाम अली ने इसी क्रम में पिछले अप्रैल महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके साउथ ब्लाक स्थित दफ्तर में जाकर मुलाकात की। बता दें कि उस मुलाकात के बाद मोदी ने ट्वीट करके लिखा, ''गुलाम अली से मिलकर अच्छा लगा। हम दोनों ने बहुत बातें की। उन्होंने बताया कि वह 9 साल की उम्र से गाने लगे थे। उनकी साधना कफी लंबी है।"
संसद भवन में
गुलाम अली साहब कुछ समय पहले संसद भवन भी पहुंच गए थे। बीते महीने गुलाम अली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मिलने दिल्ली सचिवालय चले गए। उनके साथ फोटो खिंचवाई। केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा कि वे गुलाम अली की गजलों के फैन हैं।

पर सवाल उठता है कि इतने नामवर गजल गायक को प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक से मिलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? वे क्यों इनसे मिल रहे हैं ? इन्हें फूलों का बुके दे रहे हैं। क्या इतने बड़े कलाकार को शोभा देता है कि वे नेताओं के दर पर हाजिरी देने जाएं? गजलों का गहन अध्ययन करने वाले सुरक्षित सिंघल कहते हैं कि गुलाम साहब बेहतरीन गजल गायक हैं। उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। पर ये भी शोभा नहीं देता कि वे मोदी से लेकर केजरीवाल के पास जाएं।
लाभ के लिए मिलना
उनका इन नेताओं के पास शिष्टाचार के लिए भी जाना कहां तक मुनासिब है। इससे लगता हैं कि वे इन नेताओं से किसी तरह का लाभ लेन चाहते हैं। जानकारों का कहना है कि गुलाम अली साल में पांच-छह महीनें तो भारत में घूमते हैं अपने कार्यक्रमों के सिलसिले में। वे मोटा पैसा कमाते हैं भारत आकर। गुलाम अली को जानने वाले कहते हैं कि वे भले ही भारत आते रहें पर उन्हें यहां के नेताओं से मिलने से बचना चाहिए। अगर वे उनके दफ्तरों में जाकर मिलेंगे तो उन पर शक तो किया ही जाएगा।













Click it and Unblock the Notifications