पिछले 2 सालों में क्यों बढ़ा आपके खाने का बिल? क्यों बढ़े हैं सब्जियों के दाम? आर्थिक सर्वे में बताई गई वजह
Economic Survey: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 जुलाई को आर्थिक सर्वे (इकोनॉमिक सर्वे) पेश किया है। निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2025 में 6.5 से 7 फीसदी रहने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण 2024 में खाने-पीने की चीजों की बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताई गई है। इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि खाद्य महंगाई लगातार ऊंची बनी हुई हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 22 में 3.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 23 में 6.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 24 में 7.5 प्रतिशत हो गई है। जो पिछले 2 सालों में 97 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। सर्वे में कहा गया है कि पिछले 2 सालों में आम आदमी के खाने के बिल का बोझ काफी बढ़ा है। सर्वे में ये भी बताया गया है कि किन-किन चीजों के दाम बढ़े हैं और क्यों बढ़ा है?

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खाने की चीजें क्यों हो रही है महंगी?
🔴इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि देश में बढ़ती महंगाई का सबसे बड़ा कारण क्लाइमेट यानी जलवायू में बदलाव है। दस्तावेज में जलवायु परिवर्तन, गर्मी की लहरें, असामान्य मानसून, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, मूसलाधार बारिश और शुष्क परिस्थितियों के कारण खाने-पीने की चीजें महंगी हुई है।
🔴सर्वे में कहा गया है कि किसी राज्य में भीषण गर्मी तो किसी राज्य में भारी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। भारी बारिश की वजह से फसल और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
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आपके रसोई के खाने-पीने की चीजों पर क्यों पड़ रहा है असर?
🔴 सर्वे में कहा गया है कि सब्जियों के दाम इसलिए बढ़े हैं क्योंकि ज्यादा गर्मी और भारी बारिश की वजह फसल खराब हुई है। यही वजह है कि प्याज और टमाटर के दाम बढ़े हैं।
🔴 जुलाई 2023 में टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी फसल उत्पादन में मौसमी बदलाव, क्षेत्र-विशिष्ट फसल रोग जैसे कि सफेद मक्खी का संक्रमण और देश के उत्तरी भाग में मानसून की बारिश के जल्दी आने के कारण हुई।
🔴 प्याज की कीमतों में उछाल कई कारणों से हुआ, जिसमें पिछले कटाई सीजन के दौरान बारिश की वजह से रबी प्याज की गुणवत्ता प्रभावित होना, खरीफ सीजन के दौरान बुवाई में देरी, खरीफ उत्पादन पर लंबे समय तक सूखे की वजह से असर पड़ना और दूसरे देशों द्वारा व्यापार से जुड़े कदम भी शामिल हैं।
🔴 सर्वे में कहा गया है कि दाल इसलिए महंगे हुए हैं क्योंकि बीते दो साल में दालों का उत्पादन कम हुआ है। कम उत्पादन की वजह से कीमतों में तेजी देखने को मिली है। खास तौर पर अरहर की कीमतों में उछाल आया है।
🔴 रबी सीजन में धीमी बुवाई की वजह से उड़द का उत्पादन प्रभावित हुआ और दक्षिणी राज्यों में जलवायु परिवर्तन की वजह से भी इसके दाम बढ़े हैं। पिछले रबी सीजन की तुलना में चने का रकबा और उत्पादन भी कम रहा।
दूध के दामों में क्यों बढ़ोतरी हो रही है?
2023 की शुरुआत से ही दूध की कीमतों में उछाल आया है। इसकी वजह महामारी के चरम दिनों में कृत्रिम गर्भाधान में कमी और पशु आहार की बढ़ती लागत है। दूध सहकारी समितियों ने बढ़ी हुई लागत को ध्यान में रखते हुए दूध और दूध उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 24 के अंत तक दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कम होगी।












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