कोरोना के सबसे कम मामले आने के बाद भी क्यों रहना होगा सतर्क ? ये चार बातें गांठ बांध लीजिए

नई दिल्ली,4 अप्रैल: सोमवार को देश के लिए एक अच्छी खबर आई कि 715 दिनों बाद कोरोना संक्रमण के सबसे कम मामले सामने आए हैं। देश में वैक्सीनेशन भी काफी हो चुकी है। कोविड से संबंधित सारे आंकड़े सकारात्मक नजर आ रहे हैं। जाहिर है कि अब हमें कोविड-19 से घबराने की आवश्यकता नहीं दिख रही है। लेकिन, हम कोविड अनुकूल बर्ताव का पालन करना छोड़ दें तो ये भी बुद्धिमानी नहीं होगी। शायद कुछ राज्य सरकारें बेवजह की जल्दबाजी दिखा रही हैं। आप यह आर्टिकल पढ़ेंगे तो आपको भी लगेगा कि अगर हम यह मानकर चल रहे हैं कि महामारी खत्म हो चुकी है तो हम सही दिशा में नहीं सोच रहे हैं। हमें अभी भी सतर्क रहना जरूरी है।

देश में 715 दिनों में सबसे बड़ी राहत

देश में 715 दिनों में सबसे बड़ी राहत

पिछले 24 घंटे में देश में कोविड-19 के सिर्फ 913 मामले सामने आए हैं। यह मौका 715 दिनों बाद आया है। यही नहीं देश में सिर्फ 12,597 ऐक्टिव केस हैं, यह भी 714 दिनों बाद हुआ है कि यह आंकड़ा 13,000 से कम हुआ है। हालांकि, 24 घंटों में 1,316 लोक रिकवर भी हुए हैं, लेकिन 13 लोगों की जान भी गई है। देश में आज की तारीख में डेली पॉजिटिविटी रेट कम होकर सिर्फ 0.29% रह गई है। कोविड की 3 लहरें झेल चुके भारत के लिए यह आंकड़े काफी उत्साह वाले लग रहे हैं, लेकिन अभी भी हमें सतर्क रहना बहुत जरूरी है। इसके ये महत्वपूर्ण कारण हैं।

शंघाई से सीख लेने की जरूरत

शंघाई से सीख लेने की जरूरत

चीन को शंघाई में कोरोना वायरस से निपटने के लिए सेना उतारनी पड़ गई है। यहां सोमवार को भी मामले बढ़ने का सिलसिला जारी रहा, जिसके चलते 2.60 करोड़ निवासियों की जांच के लिए उसने सेना के साथ हजारों हेल्थकेयर वर्करों को लगा दिया है। चीन में यह अबतक का यह सबसे बड़ा स्वास्थ्य अभियान है। चीनी सेना के एक अखबार के मुताबिक पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के 2,000 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों को शंघाई में तैनात किया है। इसके अलावा जिआंग्सु, झेजियांग प्रांतों और राजधानी बीजिंग से भी 10,000 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी शंघाई में जी-जान से कोविड ऑपरेशन में लग गए हैं। जिस चीन के वुहान शहर से कोरोना शुरू हुआ था, उसने अभी तक कभी भी इतने बड़े पैमाने पर संक्रमण की बात नहीं मानी थी। उसने जीरो कोविड नीति अपना रखी है, लेकिन आज उसकी भी हालत खराब हो रही है। भारत अपने पड़ोसी मुल्क में कोविड के इस कहर को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

स्थानीय स्तर पर ओमिक्रॉन का भी नया रूप मिला-रिपोर्ट

स्थानीय स्तर पर ओमिक्रॉन का भी नया रूप मिला-रिपोर्ट

चीन में रविवार को कोविड के 13,000 से भी ज्यादा केस आए, जो कि महामारी के दो वर्षों में सबसे ज्यादा है। दरअसल, स्वास्थ्य अधिकारियों ने शंघाई इलाके में ओमिक्रॉन वेरिएंट के एक नए संदिग्ध सबटाइप मिलने की बात कही है। चीन की सरकारी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शंघाई के पास ही सुझोउ शहर के अफसरों ने ओमिक्रॉन वेरिएंट के एक म्यूटेशन का पता लगाया है, जो कि लोकल या फिर अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस में भी मौजूद नहीं है। शिन्हुआ की एक रिपोर्ट मुताबिक एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है, 'इसका मतलब ओमिक्रॉन का एक नया वेरिएंट है, जो स्थानीय स्तर पर पाया गया है।' ग्लोबल टाइम्स ने स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से प्राप्त सीक्वेंसिंग डेटा के आधार पर बताया है कि यह ओमिक्रॉन वेरिएंट के बीए.1.1 से विकसित हुआ है, जो कि कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले मरीज में मिला है।

ओमिक्रॉन के चचेरे भाई 'एक्सई' ने बढ़ाई चिंता

ओमिक्रॉन के चचेरे भाई 'एक्सई' ने बढ़ाई चिंता

उधर ओमिक्रॉन के नए चचेरे भाई बताए जा रहे 'एक्सई' वेरिएंट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले से ही चेतावनी जाहिर कर रखी है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ओमिक्रॉन का यह नया वेरिएंट कोविड-19 के अबतक के सभी वेरिएंट से ज्यादा संक्रामक हो सकता है। यह नया रूप ओमिक्रॉन वेरिएंट के दोनों पुराने वंशज बीए.1 और बीए.2 का भी हाइब्रिड है। अभी तक बीए.2 का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा गया है और कुल केस में इसके अकेले 86% हैं। डब्ल्यूएचओ फिलहाल 'एक्सई' को नया संभावित वेरिएंट ऑफ कंसर्न मानकर चल रहा है, जो पहली बार 19 जनवरी को यूके में पाया गया था। शोध से पता चला है कि बीए.2 पहले ही डेल्टा के मुकाबले 5 से 6 गुना ज्यादा संक्रामक है; और 'एक्सई' वेरिएंट अगर उसका हाइब्रिड है तो यह वेरिएंट आने वाले दिनों महामारी की नई लहर शुरू होने का कारण बन सकता है।

मास्क छोड़ने की जल्दबाजी सही नहीं-एक्सपर्ट

मास्क छोड़ने की जल्दबाजी सही नहीं-एक्सपर्ट

कोविड-19 से भारत ने दूसरी लहर के बाद अच्छे से संघर्ष किया और इससे उबरा भी है, इसमें कोई शक नहीं है। देश में कुल 1,84,70,83,279 वैक्सीनेशन हो चुके हैं। इसलिए, हमें घबराने की आवश्यकता तो नहीं है। लेकिन, विशेषज्ञों की सलाह है कि यह समझ लेना कि महामारी खत्म हो चुकी है, उचित नहीं है। मसलन, टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी ने देशवासियों से चिंतित नहीं होने को तो कहा है। लेकिन, साथ ही हाइब्रिड स्ट्रेन को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। इस इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर राकेश मिश्रा का कहना है, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज के कुछ लोग महामारी खत्म होने की घोषणा करने के लिए उतावले हैं।' हाल में कई राज्यों ने मास्क की अनिवार्यता खत्म करने की घोषणा की है। लेकिन, एक्सपर्ट इस जल्दीबाजी को नहीं समझ पा रहे हैं। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेसिडेंट डॉक्टर अरुण गुप्ता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है, 'महामारी अभी भी चल रही है। अमेरिका, यूके, चीन और हॉन्ग कॉन्ग जैसे देशों में केसों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि भारत को ऐसी स्थिति का सामना फिर नहीं करना होगा। इसलिए कम से कम एक साल तक, जबतक लगातार नए संक्रमण कम न हो जाएं, कोविड प्रोटोकॉल जारी रखनी चाहिए।'

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