Lohri 2021: 'लोहड़ी' पर क्यों जलाते हैं आग, क्या है इसके पीछे की कहानी और महत्व?
Why do we burn fire on Lohri?: आज पूरा देश 'लोहड़ी' के पर्व में मगन है, हालांकि कोरोना महामारी की वजह से इस बार ये पर्व धूम-धाम से मनाया नहीं जा रहा है लेकिन सोशल मीडिया पर लोग जमकर इस त्योहार की बधाई एक-दूसरे को दे रहे हैं। 'लोहड़ी' का त्योहार उत्साह और खुशी वाला है। दरअसल ये त्योहार नई फसल के कटने पर मनाया जाता है। मूलरूप से ये पर्व पंजाब का है, आम तौर पर पंजाब-हरियाणा के किसान काफी संपन्न माने जाते हैं और संक्रान्ति के पहले उनकी नई फसल पककर तैयार होती है, जिसका जश्न वो 'लोहड़ी' पर मनाते हैं।
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'आग' जलाने का क्या है महत्व
इस पर्व पर लोग खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोगों से मिलकर आग जलाते हैं और अग्निदेव से अपने परिवार की सुख-शांति की दुआएं मांगते हैं। उसके बाद लोग रेवड़ी, मूंगफली, लावा खाते हैं और नाचते-गाते हैं। लोग इस दौरान 'दुल्ला भट्टी' की कहानी सुनते और सुनाते हैं और गीतों में भी उन्हें याद करते हैं। आग के चारों ओर घूमने के पीछे एक और बड़ा कारण है।

राजा दक्ष ने किया था बेटी-दामाद का अपमान
दरअसल राजा दक्ष अपने दामाद भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे। उन्होंने अपने घर पर यज्ञ का आयोजन करवाया था लेकिन अपनी बेटी सती और दामाद को नहीं बुलाया। सती को ये बात बहुत ज्यादा खराब लगी, वो अपने पिता के यज्ञ कार्यक्रम में बिना शिव के पहुंची और इस अपमान का कारण पूछा तो राजा दक्ष, भगवान शिव की बुराई करने लगे, जिसे सुनकर सती बहुत दुखी हुईं और इसलिए उन्होंने उसी यज्ञ की अग्नि में कूदकर जान दे दी।

मां सती की याद में जलाते हैं आग
इस बात का पता जब भगवान शिव को लगा तो उन्हें बहुत क्रोध आया और उसके बाद उन्होंने यज्ञ को ही भस्म कर दिया और मां सती के शव को लेकर तांव किया था , बस तभी से सती की याद में इस पर्व पर आग जलाने की परंपरा है। लोग आग जलाकर मां सती और शिव को याद करते हैं, दोनों आदर्श पति-पत्नी के रूप पूजे जाते हैं, जहां प्यार, समर्पण और त्याग तीनों ही था इसलिए जब भी कोई नया जोड़ा शादी करके आता है तो उसे लोहड़ी पर खास तरह से भेंट दी जाती है और उन्हें 'लोहड़ी' की पूजा करने को कहा जाता है।

खास बात
'लोहड़ी' का पर्व पौष के अंतिम दिन यानि माघ संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। 'लोहड़ी' का अर्थ ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) +ड़ी (रेवड़ी) = 'लोहड़ी' .. होता है। ये फसलों का त्योहार कहा जाता है क्योंकि इस दिन पहली फसल कटकर तैयार होती है, जिसके लिए उत्सव मनाया जाता है। वैसे कुछ लोगों का ये भी मानना है कि लोहड़ी शब्द 'लोह' से उत्पन्न हुआ था, जिसका प्रयोग रोटी बनाने के लिए तवे में होता है।
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