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जानिए ग्वालियर राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने टोपी पहनकर क्यों ली केंद्रीय मंत्री पद की शपथ

Jyotiraditya Scindia News: गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र से पहली बार भाजपा के टिकट पर सांसद बने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंत्री पद की शपथ ली। वह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी मंत्री बने थे। सिंधिया जब कांग्रेस में थे, तब वो मनमोहन सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रहे।

बता दे पीएम मोदी केबिनेट में दूसरी बार मंत्री बनने जा रहे हैं। आज, 9 जून, राष्ट्रपति भवन में केंद्रीय मंत्री के रूप में गोपनीयता की शपथ ली। वे पीएम मोदी के कार्यकाल में दूसरी बार केंद्रीय मंत्री बनने जा रहे हैं। इससे पहले वे उड्डयन मंत्री के रूप में केंद्र में रह चुके हैं। अब दूसरी बार देखना दिलचस्प होगा कि उन्हें कौन सा मंत्री पद दिया जाएगा। शपथ ग्रहण के दौरान उन्होंने एक अनोखी टोपी पहनी।

Why did Jyotiraditya Scindia of Gwalior royal family take oath as Union Minister wearing a cap

सिंधिया ने टोपी पहनकर क्यों ली शपथ

दरअसल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया लोकसभा चुनाव के दौरान 15 मई को निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार के समय हिंदू रीति रिवाज और परंपरा के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना मुंडन कराया था। इसलिए आज वह टोपी पहन कर शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली।

यूपीए सरकार में मंत्री भी बने

पिता माधवराव सिंधिया की अचानक मौत के बाद राजनीति में कदम रखने उतरे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 6वीं बार लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई और लाखों वोटों के अंतर से अपने प्रतिद्वंदी से जीत दर्ज की। पिता की अचानक मौत के बाद, सिंधिया उपचुनाव में उतरे और गुना-शिवपुरी सीट से सांसद बनने में कामयाब हुए और केंद्र की यूपीए सरकार में मंत्री भी बने। उन्होंने इस जीत की प्रक्रिया को 2019 तक जारी रखा। लेकिन इस लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी लहर में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद, वे 2020 में बीजेपी में शामिल हुए और राज्यसभा से संसद में पहुंचे, इसके बाद केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।

गुना संसदीय क्षेत्र सिंधिया परिवार का प्रमुख क्षेत्र

गुना संसदीय क्षेत्र सिंधिया परिवार का एक प्रमुख आधार रहा है, और इसी कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2002 के लोकसभा उप चुनाव में 4.50 लाख वोटों से जीत मिली। वर्ष 2007 में कांग्रेस नेतृत्वी यूपीए सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। वर्ष 2009 में, ज्योतिरादित्य सिंधिया को वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री के रूप में चुना गया। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2012 में उन्हें विद्युत राज्यमंत्री के रूप में विभाग के सामने उतारा गया। वर्ष 2013 में, ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश से अभियान समिति के प्रमुख के रूप में चुना गया।

2019 में कैसे हारे थे सिंधिया

गुना क्षेत्र से सांसद बनने के बाद, उन्होंने तत्कालीन केंद्र सरकार की सहायता से गुना क्षेत्र में कई विकास कार्य किए, जिसे जनता ने उनकी भी प्रशंसा की। जनता के दिलों में पॉपुलर नेता के रूप में, सिंधिया ने अपनी पहचान बनाई। सिंधिया ने हमेशा गुना के निवासियों के दिलों में ठहराव बनाया। 2002 से 2019 तक, ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा चुनावों में हमेशा विजयी रहे, लेकिन उनके सहयोगी कृष्णपाल सिंह यादव ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया को हरा दिया।

हालांकि, लोकसभा चुनाव हारने के बाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया क्षेत्र में सक्रिय रहे। उन्होंने तत्कालीन कमलनाथ सरकार से समर्थन वापस लेकर मध्य प्रदेश में भाजपा को समर्थन दिया और शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद पर लौटाया। बीजेपी ने 2021 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा सांसद बनाया। मोदी सरकार में, उन्हें सिविल एविएशन और इस्पात मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।

सिंधिया ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से किया ग्रेजुएशन

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के कैंपियन स्कूल और दून स्कूल पढ़ कर पूरी की। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से प्राप्त की, जहां उन्होंने अर्थशास्त्र के विषय में अपनी डिग्री हासिल की।

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