वादा करके पलट गए अंपायर और भारत को हरा दिया, तभी आया वैभव सूर्यवंशी को गुस्सा, अब हुआ सबसे बड़ा खुलासा
Vaibhav Sooryavanshi: क्रिकेट के मैदान पर अंपायरों के गलत फैसलों के कई किस्से आपने सुने होंगे, लेकिन दाम्बुला के रंगीरी इंटरनेशनल स्टेडियम में जो हुआ, उसने खेल भावना को तार-तार कर दिया। ट्राई-नेशन सीरीज में इंडिया ए और श्रीलंका ए के बीच मुकाबला सांसें रोक देने वाले रोमांच के बाद टाई पर खत्म हुआ। लेकिन असली ड्रामा मैच खत्म होने के बाद शुरू हुआ, जिसने अंपायरिंग के स्तर पर एक बड़ा कड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक, हर तरफ इस बात की चर्चा है कि क्या भारतीय टीम के साथ सरेआम 'चीटिंग' की गई?
दरअसल श्रीलंका ए को मैच की आखिरी गेंद पर जीत के लिए दो रनों की जरूरत थी। भारतीय गेंदबाज अरशद खान ने शानदार यॉर्कर फेंकी और विकेटकीपर प्रभसिमरन सिंह ने पलक झपकते ही बल्लेबाज को रनआउट कर दिया। मैच टाई होते ही नियम के मुताबिक सुपर ओवर का फैसला हुआ। लेकिन समस्या यह थी कि मैदान पर सूरज डूब चुका था, फ्लड लाइट्स का इंतजाम पर्याप्त नहीं था और प्राकृतिक रोशनी इतनी खराब हो चुकी थी कि हाथ को हाथ नहीं दिख रहा था।

अंपायरों का वो झूठा वादा जिसने भारत को फंसाया
क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार जब भारतीय कप्तान तिलक वर्मा ने इतनी खराब रोशनी में खेलने से मना किया, तो ऑन-फील्ड अंपायरों ने उनके साथ एक डील की। अंपायरों ने भरोसा दिया कि वे खेल शुरू कर रहे हैं, लेकिन अगर रोशनी का स्तर और ज्यादा गिरता है या खिलाड़ियों के लिए खतरा बनता है, तो वे तुरंत मैच रोक देंगे। कप्तान तिलक वर्मा ने अंपायरों की बात पर भरोसा किया और टीम को मैदान पर उतार दिया। यह भी कहा गया कि अगर भारत की पारी के दौरान रोशनी खराब होगी, तो गेम रोक दिया जाएगा।
मैदान से आई आवाज: सुपर ओवर के दौरान डगआउट और क्रीज के पास खड़े खिलाड़ियों को यह कहते सुना गया, "यार, गेंद तो बिल्कुल दिख ही नहीं रही है, शॉट कैसे खेलें?"
अंधेरे में श्रीलंका के तेज गेंदबाज और अंपायर्स की ज़िद
असली यू-टर्न तब आया जब श्रीलंका ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सुपर ओवर में 16 रन बना लिए। इसके बाद मैदान पर विजिबिलिटी (देखने की क्षमता) पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। नियम और वादे के मुताबिक अंपायरों को मैच यहीं रोक देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने श्रीलंका के तेज गेंदबाजों को गेंद थमा दी। 140 किमी/घंटे की रफ्तार से आती गेंद को उस काले अंधेरे में देखना भारतीय बल्लेबाजों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। नतीजा यह हुआ कि इंडिया ए 17 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया हार गई।
श्रीलंकाई अधिकारी भी हैरान
इस मैच के बाद सिर्फ भारतीय खेमा ही नहीं, बल्कि खुद श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के कुछ अधिकारी भी हैरान हैं। बैकस्टेज बातचीत में एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि दाम्बुला की उन परिस्थितियों में सुपर ओवर कराना किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं था। अंपायरों की इस ज़िद ने न सिर्फ खेल का नतीजा बदला, बल्कि खिलाड़ियों को चोटिल होने के एक बड़े रिस्क में भी धकेल दिया। इस घटना के बाद से ही आईसीसी और एशियन क्रिकेट काउंसिल के अंपायरिंग पैनल्स पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं।
अंपायरों की इस वादाखिलाफी को वैभव सूर्यवंशी ने करीब से देखा था, जिससे उनके मन में कहीं न कहीं गुस्सा था और बाद में श्रीलंका के प्लेयर्स ने उनको आकर छेड़ दिया, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया और इसी दौरान धक्का-मुक्की देखने को मिली।












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