एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को ही क्यों मिला हेलीकॉप्टर क्रैश की जांच का जिम्मा ? जानिए उनके बारे में
नई दिल्ली, 9 दिसंबर: तमिलनाडु में कल हुए हेलीकॉप्टर हादसे में आज बड़ी कामयाबी ये मिली है कि उसका ब्लैक बॉक्स मिल गया है। सीडीएस बिपिन रावत को ले जा रहे यह हेलीकॉप्टर कैसे दुर्घटनाग्रस्त हुआ इसकी जांच तीनों सेनाओं की जांच टीम मिलकर कल से ही शुरू कर चुकी है, जिसे एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह लीड कर रहे हैं। मानवेंद्र सिंह अभी कमांडिंग इन चीफ, ट्रेनिंग कमांड हैं और वह खुद भी एक बेहतरीन और काफी अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट हैं। इस्पेक्शन एंड सेफ्टी से जुड़े विषय में भी उनका खास अनुभव रहा है और मुश्किल से मुश्किल इलाकों में भी हेलीकॉप्टर उड़ाने में वह माहिर माने जाते हैं।

एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह कर रहे हैं हादसे की जांच
भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर एमआई-17 की दुर्घटना की पड़ताल के लिए गठित तीनों सेनाओं की जांच की अगुआई एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह कर रहे हैं। वायु सेना के अधिकारियों ने बताया कि एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह इंडियन एयर फोर्स ट्रेनिंग कमांड के कमांडर हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा में गुरुवार को जानकारी दी है कि इंडियन एयर फोर्स ने घटना की ट्राई सर्विस इंक्वायरी का आदेश दिया है, जिसकी अगुवाई एयर ऑफिसर, कमांडिंग इन चीफ ट्रेनिंग कमांड, एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह कर रहे हैं। रक्षा मंत्री के मुताबिक जांच टीम कल ही (बुधवार को) वेलिंगटन पहुंच गई थी और जांच शुरू कर दी थी।
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कौन हैं एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह ?
एयर फोर्स में 38 साल से अधिक के करियर में एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पोजिशन संभाल चुके हैं। मौजूदा दायित्व से पहले इसी साल फरवरी में ही उन्हें साउदर्न एयर कमांड का नया कमांडर इन चीफ नियुक्त किया गया था। इनके पास विभिन्न फ्रंटलाइन एयर बेस को कमांड करने के अलावा कांगो के बुकावु में भी इंडियन एयर फोर्स की शांति सेना की अगुवाई करने का अनुभव है। एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह नेशनल डिफेंस अकैडमी, डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और ज्वाइंट फोर्सेज स्टाफ कॉलेज, अमेरिका के भी छात्र रह चुके हैं। इंडियन एयर फोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में ये 29 दिसंबर, 1982 को हेलीकॉप्टर पायलट के तौर पर ही ये शामिल हुए थे।

एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को क्यों मिला जांच का जिम्मा ?
एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को इतने बड़े हादसे की जांच का जिम्मा सौंपे जाने की वजह यह मानी जा रही है कि वह खुद ही हेलीकॉप्टर पायलट हैं और बहुत ही हार्डवर्किंग ऑफिसर माने जाते हैं। एयर ऑफिसर के पास विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टर और ट्रेनेर एयरक्राफ्ट उड़ाने का लंबा अनुभव है। इस साल फरवरी तक ही इनके पास 6,600 घंटों से भी ज्यादा बेहद चुनौतिपूर्ण इलाकों में उड़ान भरने का अनुभव था, जिसमें सियाचिन, उत्तर-पूर्व भारत, उत्तराखंड और पश्चिमी मरुस्थल से लेकर कांगो तक का इलाका शामिल है। इनके पास एयर हेडक्वार्टर में डायरेक्टर जनरल इंस्पेक्शन एंड सेफ्टी जैसी अहम जिम्मेदारी संभालने का भी अनुभव है। (पहली तीनों तस्वीर फाइल-सौजन्य- पीआरओ डिफेंस)

कई विशिष्ट राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित हैं एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह
एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए जो सैन्य सम्मान मिल चुका है उनमें, अति विशिष्ट सेवा मेडल, वीर चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल जैसे सम्मान शामिल हैं। उनकी जांच टीम को सीडीएस बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर हादसे में जो सबसे पहली बड़ी कामयाबी मिली है कि एमआई-17 वी-5 का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) दुर्घटनास्थल से बरामद हो गया है। उम्मीद है कि इसमें मौजूद डेटा की डिकोडिंग से हादसे की असल वजह का कोई सुराग मिल सकता है।

एमआई-17 हेलीकॉप्टर हादसे में हुआ सीडीएस रावत का निधन
बुधवार को तमिलनाडु में ऊटी के पास नीलगिरी के पहाड़ी इलाके वायुसेना का बहुत ही कारगर माना जाने वाला हेलीकॉप्टर एमआई-17 वी-5 दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत के अलावा एयर फोर्स और थल सेना के 11 अधिकारी और सैनिकों की मौत हो गई थी। इस हादसे में ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह बुरी तरह जख्मी हुए हैं, जिनका अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है और वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर बताए जा रहे हैं।












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