कोविड-19 की जांच में CT Value क्यों महत्वपूर्ण है, किस मरीज को अस्पताल पहुंचना जरूरी ?
नई दिल्ली, 16 अप्रैल: कोरोना की जांच में सीटी वैल्यू संबंधित व्यक्ति की संक्रामकता मापने का मूल पैमाना है। इससे आरटी-पीसीआर टेस्ट के दौरान कोविड संदिग्धों के सैंपल में वायरल जेनेटिक मटेरियल के कंसेंट्रेशन का पता चलता है। देश में इसको लेकर शुरू से कंफ्यूजन रहा है कि कम सीटी वैल्यू यानी कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीज। लेकिन, असल में हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। गौरतलब है कि देश में जिस तरह से अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे हैं, बेड हैं तो आईसीयू की किल्लत देखी जा रही है और आईसीयू है तो वेंटिलर खाली नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में सीटी वैल्यू या सीटी स्कोर को लेकर कंफ्यूजन को पूरी तरह से दूर कर लेना जरूरी है और यह जान लेना आवश्यक है कि मरीज या उनके परिजनों को कब अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है।

सीटी वैल्यू क्यों महत्वपूर्ण है ?
सामान्य शब्दों में समझें तो सीटी या साइकल थ्रेशोल्ड संदिग्धों के स्वैब में वायरस के जेनेटिक मटेरियल के कंसेंट्रेशन (गाढ़ापान) का अनुमान देता है। इसमें जो संख्या बताई जाती है वह वायरस के जेनेटिक मटेरियल के कंसेंट्रेशन (गाढ़ापान) का विपरीत समानुपाती होता है। यानी सीटी स्कोर कम है तो इसका मतलब है कि वायरल जेनेटिक मटेरियल का कंसेंट्रेशन ज्यादा है और यदि सीटी स्कोर अधिक है तो इससे पता चलता है कि वायरल जेनेटिक मटेरियल का कंसेंट्रेशन कम है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने इसके लिए जो मानक निर्धारित किया है, उसमें सीटी वैल्यू का कटऑफ 35 रखा गया है। जिन मरीजों के सैंपल का सीटी वैल्यू 35 से कम रहता है, वही 'पॉजिटिव' माने जाते हैं। जिनके सैंपल का सीटी वैल्यू 35 से ज्यादा होता है, वह 'निगेटिव' होते हैं।

सीटी वैल्यू को लेकर क्या है कंफ्यूजन ?
वैज्ञानिक तौर पर सीटी वैल्यू से मरीज की संक्रामक क्षमता का पता चलता है। मसलन, एक मरीज का सीटी वैल्यू अगर 12 है तो इसका मतलब है कि वह बहुत तेजी से कोरोना फैला सकता है। लेकिन, अगर कोई मरीज कोविड-19 पॉजिटिव भी है और उसका सीटी वैल्यू मान लीजिए कि 32 है तो संभत: वह दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकता। भारत में इसी बात को लेकर बहुत ज्यादा कंफ्यूजन रहा है। सीटी वैल्यू को अक्सर बीमारी की गंभीरता का पैमाना मान लिया जाता है। यहां गलती से यह मान लिया जाता है कि कम सीटी वैल्यू है यानी उसमें ज्यादा वायरल लोड है या उसकी बीमारी गंभीर है।

किस मरीज को अस्पताल पहुंचना जरूरी ?
मुंबई के सबअर्बन डायग्नोस्टिक्स की डॉक्टर अनूपा दीक्षित ने सीटी वैल्यू के आधार पर मरीजों के अस्पताल में भर्ती करवाने को लेकर देश में मौजूद कंफ्यूज को बहुत ही स्पष्टता के साथ दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है, 'सीटी वैल्यू बीमारी की गंभीरता का पैमाना नहीं है, यह सिर्फ संक्रामकता का इंडिकेटर है। हमारे पास ऐसे मरीज आ सकते हैं, जिनका सीटी स्कोर 8 हो, लेकिन उनमें किसी तरह का लक्षण न हो, लेकिन वह बहुत ही तेजी से बीमारी फैलाने में सक्षम होते हैं। दुर्भाग्य से मरीज सीटी स्कोर देखकर सोच लेते हैं कि उनकी हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है।' इसलिए सीटी स्कोर के आधार पर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, अस्पताल में उन्हें बेड की पहले दरकार है, जिनके खून में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है और सांस लेने में तकलीफ होने लगी है या फिर और भी किसी तरह के गंभीर लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं।

महाराष्ट्र ने सीटी वैल्यू घटाने का दिया था प्रस्ताव
इस महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना संक्रमण का आंकड़ा कम करने के लिए एक नायाब कोशिश भी की थी। राज्य सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को खत लिखकर कहा था कि सीटी वैल्यू के कटऑफ को घटाकर 35 से 24 कर दिया जाए। लेकिन, केंद्र सरकार ने इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि ऐसा करने से कई पॉजिटिव मरीज भी निगेटिव हो जाएंगे, जो वायरस फैलाने में सक्षम हो सकते हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के शुक्रवार सुबह के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों में महाराष्ट्र में कोरोना के 61,695 नए मरीज सामने आए हैं, जबकि पूरे देश में एक दिन में अबतक के रिकॉर्ड 2,17,353 नए केस सामने आए हैं।












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