कौन हैं केशव महतो? जिन्हें कांग्रेस ने बनाय झारखंड प्रमुख, चुनाव से पहले बिठाया जबरदस्त जातीय समीकरण
Jharkhand Congress Keshav Mahto Kamlesh: झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी बहुल राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजेश ठाकुर को हटाकर केशव महतो कमलेश को तत्काल प्रभाव से झारखंड कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह घोषणा 16 अगस्त की देर शाम की गई। हालांकि केशव महतो के नाम पर मुहर एक मबीने पहले ही लग गई थी।
झारखंड कांग्रेस के राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सबसे ज्यादा आबादी वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एसटी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) के नेता को आगे लाने से बड़ा संदेश जाएगा। इसी वजह से राजेश ठाकुर को हटाकर केशव महतो को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि झारखंड कांग्रेस में भूमिहार जाति के सवर्णों की भूमिका होने से पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा।

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who is Keshav Mahto Kamlesh: कौन हैं केशव महतो कमलेश
- केशव महतो कमलेश झारखंड के सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक थे। उनकी गिनती झारखंड के जाने-माने नेताओं में होती है।
- केशव महतो पूर्व राज्यसभा सदस्य और झारखंड में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्ञान रंजन के काफी करीबी थे।
- महतो समुदाय से ताल्लुक रखने वाले केशव महतो कमलेश ओबीसी हैं। कमलेश कुड़मी जाति से आते हैं।
- केशव महतो कमलेश काफी सालों से कांग्रेसी नेता हैं। पहली बार 1985 में केशव महतो सिल्ली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। केशव महतो 1989 में बिहार सरकार में मंत्री भी बनाए गए थे।
- 1995 में केशव महतो को सिल्ली सीट से जीते थे। साल 2000 के चुनाव में केशव महतो को आजसू नेता सुदेश महतो ने हराया था।
- केशव महतो रामेश्वर उरांव की कमिटी में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर थे। केशव महतो राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य भी थे।
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क्यों केशव महतो कमलेश को कांग्रेस ने बनाया झारखंड प्रमुख?
झारखंड में आदिवासियों के बाद सबसे बड़ी संख्या ओबीसी की है। इस समुदाय का एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। जनसंख्या के लिहाज से झारखंड में भूमिहार जाति (विशेष रूप से भूमिहार) की संख्या 1.5 प्रतिशत से अधिक नहीं है, इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने ओबीसी, एसटी और एसटी के नेताओं की तुलना में उच्च जाति के नेता पर भरोसा किया था। जो उनका दांव विफल हो गया था।
2011 की जनगणना के अनुसार, झारखंड की आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति (एसटी) की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत, अनुसूचित जाति (एससी) की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत और सामान्य की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत है।
ऐसे में केशव महतो कमलेश को झारखंड प्रमुख बनाना, कांग्रेस की सोची-समझी योजना है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आदिवासी वोट हासिल करेंगे, तो कमलेश ओबीसी वोट खींचेंगे।
राजेश ठाकुर को सितंबर 2021 में झारखंड प्रमुख बनाया गया था और माना जाता है कि पूर्व कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने राजेश ठाकुर को यह पद दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। वह उस समय एआईसीसी झारखंड प्रभारी थे और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में हैं।
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भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं केशव महतो कमलेश
कमलेश जो जाति से कुड़मी हैं, झारखंड में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भी नींद हराम कर सकते हैं। भाजपा के पास महतो वोट बैंक के मामले में केवल एक ही सहारा है, वह है सुदेश महतो। भाजपा को सुदेश महतो की पार्टी झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) से अच्छे संबंध बनाकर रखने होंगे।
ऐसा माना जाता है कि कमलेश को झारखंड प्रमुख इसलिए बनाया गया है क्योंकि कुमड़ी जाति भाजपा से खुश नहीं है, क्योंकि पूर्व भाजपा नेता और आदिवासी मामलों और कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने पद पर रहते हुए कुड़मी को एसटी की सूची में शामिल करने की मांग को खारिज कर दिया था।












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