हिंदी के प्रति जागी दीदी की ममता, निशाने पर पीएम मोदी की कुर्सी

डिमोनेटाइजेशन के विरोध में लखनऊ और पटना में रैलियों को संबोधित करेंगी ममता। केंद्र की राजनीति में अपना और पार्टी का कद बढ़ाने की कोशिश में सीख रही हैं हिंदी।

दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार के डिमोनेटाइजेशन का मुखर विरोध कर रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हिंदी में भी अपनी आवाज बुलंद करती दिख रही हैं। हिंदी में वह ट्वीट भी कर रही हैं। अचानक ममता के इस हिंदी प्रेम की क्या वजह है?

ममता बनर्जी जब दार्जिलिंग जाती हैं तो वह नेपाली में बोलती हैं, मिदनापुर में संथाली बोलने की कोशिश करती हैं। ममता के बारे में कहा जाता है कि किस मौके पर कौन सी भाषा बोलनी हैं, इसका चुनाव वह बहुत सोच-समझकर करती हैं।

अब हिंदी पर उनका जोर है तो इसके पीछे उनका क्या राजनीतिक मकसद हो सकता है, आइए जानते हैं।

ममता ने खरीदीं बांग्ला-हिंदी डिक्शनरी

ममता ने खरीदीं बांग्ला-हिंदी डिक्शनरी

अपनी हिंदी सुधारने के लिए सीएम ममता बनर्जी, हिंदी टीचर को तलाश रही हैं। उनके बारे में ऐसी खबरें आ रही हैं कि उन्होंने बांग्ला-हिंदी डिक्शनरी भी खरीदी हैं।

हाल में डिमोनेटाइजेशन प्रोटेस्ट के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस और दिल्ली में मंचों से भाषण देते समय ममता, अपनी टूटी-फूटी हिंदी को बांग्ला टोन में बोलती देखी गईं।

नोटबंदी के बाद वह ट्विटर पर भी लगातार हिंदी में अपनी बात ट्वीट कर रही हैं। सीएम ममता बनर्जी अब पश्चिम बंगाल से निकलकर केंद्र की राजनीति में अपना और पार्टी का कद बढ़ाने की कोशिश में हैं। उनकी नजर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है।

डिमोनेटाइजेशन ने दिया ममता को मौका

डिमोनेटाइजेशन ने दिया ममता को मौका

नरेंद्र मोदी सरकार के एक फैसले ने ममता बनर्जी को केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने का मौका दे दिया और अब इसका भरपूर फायदा उठा रही हैं।

देश में कांग्रेस के कमजोर होने के बाद एक पॉलिटिकल वैक्यूम पैदा हुआ है जिसको भरने की कोशिश में कई नेता लगे हुए हैं। इनमें सीएम ममत बनर्जी के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी काफी सक्रियता दिखा रहे हैं।

आजादपुर में केजरीवाल के साथ ममता ने मंच शेयर किया था और डिमोनेटाइजेशन को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला था। जंतर-मंतर पर विरोध रैली के बाद अब ममता लखनऊ और पटना में रैलियों को संबोधित करने वाली हैं।

लखनऊ और पटना में भाषण की तैयारी

लखनऊ और पटना में भाषण की तैयारी

केंद्र की राजनीति में उत्तर भारत के नेताओं का दबदबा रहा है। उत्तर भारत के अधिकांश इलाकों में हिंदी बोली जाती है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार में करोड़ों हिंदीभाषी रहते हैं। यहां लोकसभा सीटें भी ज्यादा हैं। आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 40 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं।

केंद्र की राजनीति में चमकने के लिए हिंदीभाषियों का समर्थन अहम है। इसलिए डिमोनेटाइनजेशन के विरोध में लखनऊ और पटना में हो रही रैली में भाषण देने के लिए ममता बनर्जी हिंदी सीखने की तैयारी में जोर-शोर से जुटी हैं।

ममता बनर्जी की जीवनी हिंदी में

ममता बनर्जी की जीवनी हिंदी में

तृणमूल कांग्रेस अब पश्चिम बंगाल से निकलकर देश में पार्टी का विस्तार करने का प्लान कर रही है। इसी के तहत अब हिंदी पर पार्टी ने बहुत ज्यादा जोर दिया है।

ममता बनर्जी के एक सहयोगी का कहना है कि अब वह हिंदी की एक कविता की किताब पर काम कर रही हैं। साथ ही पार्टी, ममता बनर्जी की हिंदी में छपी जीवनी 'मेरी संघर्षयात्रा' को प्रचारित करने के काम में जुट गई है।

अपनी मुखिया ममता बनर्जी की हिंदी सुधारने में अखबार सन्मार्ग के संपादक और पार्टी सांसद विवेक गुप्ता भी सहयोग दे रहे हैं।

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