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BJP CPC meeting: बीजेपी मुख्यालय क्यों पहुंचे चीनी वामपंथी नेता? ये हैं 5 बड़ी वजहें

BJP Chinese Communist Party Meeting: नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने देश के राजनीतिक पारे को गरमा दिया है। गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों सत्तारूढ़ दलों के बीच करीब पांच साल तक बंद रहे संवाद की यह बहाली कई सवाल खड़े करती है। एक तरफ बीजेपी घरेलू राजनीति में वामपंथी विचारधारा और कांग्रेस के चीन के साथ रिश्तों को 'राष्ट्र-विरोधी' बताकर हमलावर रही है।

वहीं दूसरी ओर सीपीसी नेताओं का मुख्यालय में स्वागत करना उसकी बदलती विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि, आखिर वो क्या मजबूरियां या रणनीतियां हैं, जिन्होंने धुर विरोधी विचारधाराओं को एक मेज पर ला दिया?

BJP CPC meeting

Why BJP met Chinese leaders: सीमा पर तनाव कम करने की कूटनीति

अक्टूबर 2024 में एलएसी (LAC) पर सेनाओं के पीछे हटने (Disengagement) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। बीजेपी का मानना है कि केवल सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों के बीच भी सीधा संवाद होना जरूरी है। यह बैठक सीमा पर स्थायी शांति और भविष्य में गलवान जैसी झड़पों को रोकने के लिए 'ट्रस्ट बिल्डिंग' यानी विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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अमेरिका के 'टैरिफ वार' का जवाब

भारत और अमेरिका के बीच हालिया टैरिफ विवाद ने नई दिल्ली को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने के बाद, भारत अब पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। चीन के साथ राजनीतिक संवाद बढ़ाकर भारत यह संदेश देना चाहता है कि उसके पास वैश्विक मंच पर अन्य मजबूत विकल्प भी मौजूद हैं, जिससे अमेरिका पर दबाव बनाया जा सके।

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आर्थिक और व्यापारिक हितों की रक्षा

चीन ने हाल ही में भारतीय कंपनियों के लिए 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' के एक्सपोर्ट लाइसेंस जारी किए हैं और भारत ने भी चीनी नागरिकों के लिए बिजनेस वीजा नियमों में ढील दी है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक स्तर पर संवाद होने से व्यापारिक बाधाएं जल्दी दूर होती हैं। बीजेपी इस बैठक के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आर्थिक मोर्चे पर चीन के साथ चल रहे नए समझौतों को राजनीतिक स्थिरता का समर्थन प्राप्त हो।

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India-China relations 2026 update: 'पार्टी-टू-पार्टी' संवाद से रिश्तों में सुधार

अतीत में बीजेपी कांग्रेस पर चीन के साथ गुप्त समझौते (2008 MoU) करने के आरोप लगाती रही है। अब सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने 'पार्टी-टू-पार्टी' संवाद को आधिकारिक और पारदर्शी बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सीधे संचार में विश्वास रखती है। सीपीसी की पहल पर हुई यह मुलाकात चीन को भारतीय नेतृत्व की चिंताओं और प्राथमिकताओं से सीधे अवगत कराने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई है।

BJP CPC meeting Delhi 2026: क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक दबाव

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, दो एशियाई महाशक्तियों का आपस में बात न करना क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और डायरेक्ट फ्लाइट्स शुरू होने जैसे कदमों के बाद, राजनीतिक दलों के बीच यह मुलाकात शांति का माहौल बनाने की कोशिश है। बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि वह राष्ट्रवादी रुख बरकरार रखते हुए भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीतिक लचीलापन दिखाने में सक्षम है।

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