BJP President: नितिन नबीन 14 जनवरी के बाद क्या बड़ा करेंगे? बदलेगी बीजेपी की तस्वीर! मोदी सरकार पर भी होगा असर
BJP President Nitin Nabin: दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है कि 14 जनवरी के बाद बीजेपी पहले जैसी नहीं रहने वाली है। वजह हैं 45 साल के नितिन नबीन, जो अभी पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और अब बहुत जल्द बीजेपी के फुल टाइम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक 18 जनवरी से अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी और 20 जनवरी को नितिन नबीन के नाम पर औपचारिक मुहर लग सकती है। अगर ऐसा होता है तो नितिन नबीन बीजेपी के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक रहेगा, लेकिन चूंकि 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं, इसलिए उनका कार्यकाल आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

14 जनवरी के बाद क्यों बदलेगा सब कुछ
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी सूत्रों का कहना है कि मकर संक्रांति के बाद बीजेपी में नियुक्तियों और फेरबदल की झड़ी लग सकती है। 14 जनवरी के बाद से लेकर बजट सत्र शुरू होने तक का वक्त बेहद अहम माना जा रहा है। इसी दौरान संगठन और सरकार दोनों में बड़े फैसले हो सकते हैं।
बीजेपी और आरएसएस की हालिया बैठकों में यह बात जोर देकर कही गई है कि जो लोग पिछले तीन चार दशक से संघ परिवार से जुड़े हैं लेकिन उन्हें अब तक कोई बड़ा मौका नहीं मिला है, उन्हें अब आगे लाया जाए। नितिन नबीन इस पूरी कवायद के अहम समन्वयक माने जा रहे हैं।
बीजेपी की नई टीम कैसी होगी?
नितिन नबीन अपनी टीम को "समावेशी" बनाना चाहते हैं। मतलब ऐसा संगठन जिसमें बीजेपी और संघ परिवार दोनों के बीच बेहतर तालमेल हो। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नई टीम में संगठन और विचारधारा दोनों का संतुलन दिखेगा।
इसका मतलब यह है कि कई पुराने चेहरे, जो लंबे समय से संघ से जुड़े रहे हैं, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। खास तौर पर बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से कई नेताओं को केंद्र में लाने की तैयारी है।

मोदी सरकार पर भी पड़ेगा असर
यह बदलाव सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहेगा। बीजेपी के भीतर चर्चा है कि केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में भी बड़ा फेरबदल हो सकता है। जून 2024 में सरकार बनने के बाद अब तक कैबिनेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अब मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस बार युवा और दूसरी पंक्ति के नेताओं को मौका दिया जा सकता है। साथ ही जाट समुदाय को भी सरकार और संगठन में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो रहा है, क्योंकि फिलहाल उनकी भागीदारी कम मानी जा रही है।
युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका
नितिन नबीन की छवि एक युवा और ऊर्जावान नेता की है। पार्टी में चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी के युवाओं को आगे लाने के विजन के तहत इस बार कई नए चेहरे राष्ट्रीय महासचिव और अलग अलग मोर्चों में अहम पदों पर दिख सकते हैं।
युवा मोर्चा से जुड़े कई नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इससे पार्टी को 2029 की लड़ाई के लिए अभी से तैयार करने की रणनीति मानी जा रही है।

आरएसएस के साथ तालमेल बढ़ाने की कोशिश
नितिन नबीन पहले से ही बीजेपी और आरएसएस के बीच रिश्तों को और मजबूत करने में जुटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों के बीच भी बेहतर तालमेल बनाया जाएगा।
बीजेपी और आरएसएस मिलकर उन राज्यों की सरकारों की भी समीक्षा करेंगे जहां पार्टी सत्ता में है। इसके साथ ही कई आयोगों और अर्धसरकारी संस्थाओं में भी नई नियुक्तियां हो सकती हैं।
जेपी नड्डा की जगह लेंगे नितिन नबीन
जनवरी 2020 से बीजेपी की कमान संभाल रहे जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 में खत्म हो चुका था, लेकिन उन्हें एक्सटेंशन मिला हुआ था। अब पार्टी पूरी तरह नए चेहरे के साथ आगे बढ़ना चाहती है। नितिन नबीन को 14 दिसंबर को ही कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था और तभी से माना जा रहा था कि उन्हें जल्द ही स्थायी अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी जाएगी।
जैसे ही उनकी औपचारिक नियुक्ति होगी, पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और तमाम बड़े नेता उस पर मुहर लगाएंगे और फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
बीजेपी ने अपने आंतरिक संगठनात्मक चुनावों का काम भी लगभग पूरा कर लिया है। 37 में से 29 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों और संगठन के चुनाव पूरे हो चुके हैं। यही प्रदेश अध्यक्ष अब नितिन नबीन के समर्थन में नामांकन दाखिल करेंगे।
राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी अलग से उनके पक्ष में नामांकन करेंगे और इन कागजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हस्ताक्षर भी होंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन ही एकमात्र उम्मीदवार होंगे, इसलिए उनके नाम पर सर्वसम्मति से फैसला हो जाएगा।

कौन हैं नितिन नबीन?
नितिन नबीन बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार जीतते आ रहे हैं। 2006 में राजनीति में कदम रखने वाले नबीन के लिए राजनीति कोई नई दुनिया नहीं है। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा खुद कई बार बीजेपी विधायक रह चुके थे। पिता के निधन के बाद नितिन ने उसी सीट से चुनाव जीतकर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।
वे 2016 से 2019 तक बीजेपी युवा मोर्चा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष भी रहे और युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। 2021 में नीतीश कुमार सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था, लेकिन अब उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया है ताकि संगठन पर पूरा फोकस कर सकें।
बीजेपी के लिए क्यों अहम है यह दौर
असल में बीजेपी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां उसे संगठन और सरकार दोनों को नई ऊर्जा देनी है। नितिन नबीन की ताजपोशी सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं बल्कि पूरी पार्टी के ढांचे में बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।
14 जनवरी के बाद से जो फैसले होंगे, उनका असर सिर्फ बीजेपी पर नहीं बल्कि मोदी सरकार और आने वाले चुनावों की रणनीति पर भी साफ दिखेगा। इसलिए सियासी दुनिया की नजरें अब सिर्फ एक नाम पर टिकी हैं, नितिन नबीन। और यही वजह है कि कहा जा रहा है कि 14 जनवरी के बाद बीजेपी की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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