Trump Tariff: भारत में जाने लगीं नौकरियां, तीन इंडस्ट्रीज पर पड़ा बुरा असर, क्या कर रही सरकार?
Trump Tariff: ट्रंप के टैरिफ वाले चाबुक के बाद भारत में नुकसान होना शुरू हो गया है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि आंकड़े खुद बोल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ से इंडिनय इंडस्ट्रीज में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई। कपड़ा, गहने, हीरे, सी फूड जैसे आयटम जिन्हें भारतीय व्यापारी एक्सपोर्ट कर तगड़ा मुनाफा कमाते हैं, उन पर सीधी गाज गिरी है।
तीन इंडस्ट्रीज की हालत खरा
मैनस्ट्रीम मीडिया जहां ट्रंप के 50% वाले टैरिफ के फायदे गिना रहा है या फिर ये बता रहा है कि इससे कोई नुकसान नहीं होने वाला तो ये वाकई में सोचने वाली बात है। क्योंकि ट्रंप के टैरिफ वाले चाबुक के बाद भारत में नुकसान होना शुरू हो गया है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि आंकड़े खुद बोल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ से इंडिनय इंडस्ट्रीज में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई। कपड़ा, गहने, हीरे, सी फूड जैसे आयटम जिन्हें भारतीय व्यापारी एक्सपोर्ट कर तगड़ा मुनाफा कमाते हैं, उन पर सीधी गाज गिरी है।

तिरुपुर की कारखानों में सन्नाटा
आपने लुधियाना की हौजरी और सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बारे में जरूर सुना होगा। इन सबके अलावा भारत में कई और भी टेक्सटाइल और हौजरी के हब हैं। इन्हीं में से एक बहुत बड़े कपड़ा एक्सपोर्ट हब में से एक, तिरुपुर में सन्नाटा पसरा है। यह शहर अमेरिका को भारत से भेजे जाने वाले कुल कपड़ों का एक तिहाई अकेले भेजता था। यानि अगर अमेरिका में 99 कपड़े जा रहे हैं तो 33 तिरुपुर के टेक्सटाइल से जाते थे। ये कोई साधरण ब्रांड्स में नहीं जाते थे बल्कि Zara, Nike, Levi's जैसे नामचीन ब्रांड्स में जाते थे। लेकिन अब तिरुपुर के पास सितंबर में कोई ऑर्डर नहीं हैं।
अमेरिका से बंद हुआ ऑर्डर आना
बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक तिरुपुर के एन कृष्णमूर्ति की कपड़ा बनाने वाली यूनिट में, लगभग 200 औद्योगिक सिलाई मशीनों में से कुछ ही चल रही हैं और वो भी पुराने पेंडिंग ऑर्डर्स को निपटा रही हैं। उनके इंटरनेशनल ग्राहकों ने आगे के सभी ऑर्डर रोक दिए हैं। जिसके चलते उनके पास काम नहीं बचा और हालात ये हुए कि उन्होंने 250 वर्कर्स को नौकरी से निकालना पड़ा। हालांकि उनका कहना है कि अगर सब कुछ पहले की तरह ठीक हो जाता है तो वो उन्हें वापस भी रख सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसकी उम्मीद उन्हेें नहीं दिख रही।
सिर्फ भारत भरोस चल पाएगा काम?
टैरिफ का ऐलान ऐसे समय पर हुआ है जब एक्सपोर्ट बिजनेस की लगभग तैयारी आने वाले क्रिसमस के लिए जोरों से चल रही थी। लेकिन अब ये सब दिवाली और मौसमी कपड़ों पर अटक गए हैं। जो कमाई होगी इन्हीं दो इवेंट से होगी बाकी का नुकसान बेहिसाब ही रहेगा। राफ्ट गारमेंट्स के मालिक शिवा सुब्रमण्यम ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया कि "हमें उम्मीद थी कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कर लेगा, लेकिन ऐसा न होने से हमें बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो मैं कर्मचारियों को भुगतान कैसे कर पाऊंगा?" ये अकेले शिवा सुब्रमण्यम की नहीं बाकी सभी व्यापारियों की चिंता है।
अमेरिकी लोगों पर क्या असर
अब भारत पर लगाए गए इस 50 % वाले टैरिफ का अमेरिकी लोगों पर क्या असर पड़ रहा है उसे भी समझ लीजिए। 50% टैरिफ दर के साथ, $10 की भारतीय शर्ट अब अमेरिकी खरीदारों के लिए $16.40 की हो जाएगी, जो कि चीन की $14.20, बांग्लादेश $13.20 और वियतनाम $12 से महंगी होगी, क्योंकि इन तीनों देशों पर भारत से कम टैरिफ लगा है। अगर ट्रंप भारत पर 25 % टैरिफ कम भी कर देते हैं तो भी भारत कॉम्प्टीशन में टक्कर दे रहा होगा लेकिन स्थिति तुलनात्मक रूप से गड़बड़ ही रहेगी। अमेरिकी लोगों की पहली पसंद अब वियतनाम और बांग्लादेश के कपड़े होंगे और भारतीय कपड़ा कहीं पीछे सिसकियां ले रहा होगा।
हीरे और गहनों पर भी असर
एक और उदाहरण समझ लीजिए। मुंबई में, जहां भारत के $10 अरब के हीरे और दूसरे नग और गहने जोकि एक्सपोर्ट बिजनेस का बड़ा हिस्सा होता है, उस पर भी टैरिफ की मार पड़ी है।सितंबर और अक्टूबर में, 3 से 4 अरब डॉलर की कीमत के आभूषण अमेरिका भेजे जाते हैं। यहां क्रिएशन ज्वैलरी के आदिल कोटवाल, जो अपने 90% हीरे जड़े गहने अमेरिका में बेचते हैं, उनका कहना है कि भारत ने अमेरिका में अपने आप को एस्टेब्लिश करने में सालों लगाए हैं जो कुछ महीने में बर्बाद हो सकता है। जिस उद्योग में पूरा धंधा ही 3-4 % पर होता हो उस पर अगर 50% टैरिफ लगेगा तो क्या होगा इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
गिर गई सूरत के हीरे की डिमांड
सूरत के हीरा व्यापारियों की हालत भी खराब है। उनकी भी डिमांड गिर गई और अमेरिकन ग्राहक अब इन्हें खरीदने से बचने लगे हैं। जिन फैक्ट्रियों पर काम का बोझ होता था अब वे महीनेभर में बमुश्किल 15 दिन ही चल रही हैं। वर्कर्स और बिना किसी नोटिस के काम छोड़ने और अनपेड लीव पर भेजा जा रहा है। जहां कभी 300 वर्कर्स काम करते थे वो फैक्ट्री अब सिर्फ 70 लोगों के सहारे जैसे-तैसे चल रही है। और ये हाल शुरुआती दिनों का है, आने वाला समय और मुश्किल भरा होगा ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है।
नहीं बिक रहा झींगा!
सी-फूड यानी समुद्री खाद्य प्रोडक्ट्स का धंधा करने वाले किसानों और मछुआरों स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है। भारत के झींगा किसान भी अब दूसरे धंधे तलाशने लगे हैं। जहां भारत पूरी दुनिया में झींगा एक्सपोर्ट में टॉप पर रहता आया है वहां के किसानों के सामने अब झींगा ही चुनौती बन गया है। भारत के झींगे के यूं तो पूरी दुनिया में कई ग्राहक हैं लेकिन अमेरिका बड़े ग्राहकों में से एक था। जहां सबसे ज्यादा बिक्री क्रिसमस और न्यू ईयर के समय होती है, वहां ठीक उसके पहले इतना बड़ा झटका किसानों की जिंदगी में उठापटक कर देगा।
30% तक गिरा उत्पादन
झींगे की हैचरी में जहां 100 मिलियन लार्वा का उत्पादन हर साल होता था इस साल सिमटकर 70 मिलयन पर आ गिरा है। इसका असर सीधा किसानों और हैचरी मालिकों के रोजगार पर पड़ रहा है। ट्रंप के टैरिफ के बाद 5 लाख किसानों की सीधे-सीधे और 25 लाख किसानों की अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका के बैंकों की ट्रंप को चेतावनी
अमेरिका में भी इसका असर हो रहा है लेकिन उतना नहीं। बैंक ऑफ अमेरिका के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि टैरिफ की वजह से वहां महंगाई बढ़ रही है। वहां महंगाई की ताजा दर 2.5% हो गई है। मई और जून में टैरिफ के असर के कारण 2,58,000 नौकरियां जा चुकी हैं। इस मामले में एक अच्छी खबर ये भी है कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने उम्मीद जताई है कि भारत-अमेरिका व्यापार में जल्द समझौता कर सकते हैं। कब करेंगे इसके बारे में उन्होंने कोई हिंट नहीं दिया।
इस मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
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