2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को भारी पड़ सकती है दिल्ली में अजय माकन की कमी

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन तबियत खराब होने की वजह से काफी लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति में सक्रिय नहीं रहे, उसका पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। दरअस चुनाव से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इतने लंबे समय तक लोगों के बीच नहीं होना पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। दिल्ली में माकन की गैरमौजूदगी का असर पार्टी को आगामी चुनाव में देखने को मिल सकता है।

वरिष्ठ नेता गैरमौजूद

वरिष्ठ नेता गैरमौजूद

अजय माकन दिल्ली कांग्रेस का जाना-माना चेहरा हैं। इससे पहले शीला दीक्षित ने प्रदेश में 15 साल तक सरकार की कमान संभाली थी और वह भी दिल्ली का चुनाव हारने के बाद से लगभग सक्रिय राजनीति से दूर हैं। हालांकि कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया है कि अजय माकन ने दिल्ली अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी ने इस बात को स्वीकार किया है अजय माकन पिछले कुछ दिनों से तबियत खराब होने की वजह से छुट्टी पर हैं।

वापसी करेंगे

वापसी करेंगे

मंगलवार को इस तरह की खबरें सामने आई कि अजय माकन ने दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन बाद में दिल्ली कांग्रेस इंचार्ज पीसी चाको ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि वह चेकअप के लिए छुट्टी पर हैं और उनकी तबियत खराब है। चाको ने कहा कि इलाज के लिए अजय माकन कुछ समय के लिए छुट्टी पर हैं और वह एक बार फिर से 22 सितंबर को अपनी जिम्मेदारी संभाल लेंगे। वहीं नई दिल्ली कांग्रेस जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कसाना ने भी अ्जय माकन के इस्तीफे की खबर का खंडन किया है।

क्यों खास हैं अजय माकन

क्यों खास हैं अजय माकन

दो बार दिल्ली लोकसभा से कांग्रेस के सांसद और तीन बार कांग्रेस विधायक रहे अजय माकन दिल्ली में पार्टी के कद्दावर नेता के रूप में जाने जाते हैं। माकन का अधिकतम समय दिल्ली में ही गुजरा और वह यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। 1985 से अजय माकन ने डूसू के छात्र संघ चुनाव से राजनीति में कदम ऱखा था। वह दिल्ली और एनसीआर से काफी अच्छी तरह से वाकिफ हैं और दिल्ली में लोगों का अजय माकन पर काफी भरोसा है।

कई अहम पद संभाले

कई अहम पद संभाले

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहने के दौरान माकन डूसू की राजनीति में सक्रिय रहे और संस्थान में अपनी मौजूदगी को दर्ज कराते रहे। महज 39 वर्ष की उम्र में माकन दिल्ली विधानसभा के स्पीकर बने और कांग्रेस पार्टी की सरकार में कई अहम मंत्रालय बतौर कैबिनेट मंत्री संभाले। इसके अलावा माकन ट्रे्ड यूनियन लीडर के तौर पर भी जाने जाते हैं, इसका श्रेय ट्रेड यूनियन के नेता ललित माकन को जाता है। ललित और अपनी पत्नी के निधन के बाद अजय माकन सक्रिय रूप से राजनीति में आ गए।

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