कौन होगा जनरल बिपिन रावत का उत्तराधिकारी? दोराहे पर कैसे खड़ी हो गई है भारत सरकार?
जनरल बिपिन रावत देश के पहले सीडीएस थे और भारत में सीडीएस पोस्ट के गठन की मांग काफी सालों से की जा रही थी। कारगिल युद्ध के बाद बनी समिति ने भी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के गठन का सुझाव दिया था।
नई दिल्ली, दिसंबर 09: कई सालों की मांग और चर्चा के बाद भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद का गठन किया गया था और जनरल बिपिन रावत को देश का पहला सीडीएस नियुक्त किया गया था। इसलिए, अब जब देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत का बुधवार को दुखद निधन हो गया और उनके कार्यकाल के खत्म होने में वक्त बचा हुआ है, तो देश की सुरक्षा प्रतिष्ठानों के सामने एक अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो गई है, कि आखिर जनरल बिपिन रावत का उत्तराधिकार कौन होगा? सीडीएस सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) के सचिव भी हैं।

पीएम मोदी ने की थी घोषणा
कई दशकों की मांग के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के गठन की घोषणा की थी। जनरल रावत, जो अपना तीन साल का थल सेनाध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद 31 दिसंबर 2019 को रिटायर्ड हुए थे, उन्हें देश का पहला सीडीएस बनने का गौरव हासिल हुआ था। भारत सरकार ने थल सेना, वायु सेना और नौसेना के नियमों में संशोधन किया था, ताकि सीडीएस को 65 वर्ष की आयु तक सेवा करने की इजाजत मिल सके। जनरल रावत मार्च 2021 में 63 वर्ष के हो गए थे और इसका मतलब था कि उनके पास अभी भी दो साल की सेवा बाकी थी।

कारगिल युद्ध के बाद मांग
पहली बार आधिकारिक तौर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद का सुझाव कारगिल युद्ध के बाद 1999 में दिया गया था। कारगिल समीक्षा समिति ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के गठन का सुझाव दिया था, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 के संबोधन में की थी। 24 दिसंबर 2019 को सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने औपचारिक रूप से इस पद के गठन की घोषणा की, जिसके मुताबिक, एक चार सितारा जनरल, एक त्रि-सेवा प्रमुख रक्षा बलों का नेतृत्व करेगा। लेकिन, जनरल रावत की मौत ने अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है। लेकिन, अब जनरल रावत की दुखद मृत्यु के बाद अब सरकार को एक शीर्ष अधिकारी का चयन करना होगा और उसे सीडीएस के रूप में नियुक्त करना होगा। बाकी सेना में उत्तराधिकारी के लिए तय नियम हैं, लेकिन सीडीएस को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं है, कि नंबर दो को उस पद की जिम्मेदारी दी जाए।

सबसे वरिष्ठ संभालेंगे कार्यभार?
एयर मार्शल बी के पांडे ने वनइंडिया को बताया कि, तीनों प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ पदभार संभालेंगे। और जैसा कि प्रतीत होता है, कि भारतीय सेना प्रमुख, जनरल एम एम नरवणे तीन सेवा प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ हैं। तार्किक रूप से, उन्हें कार्यभार संभाल लेना चाहिए। सरकार या तो जनरल नरवणे के सेना प्रमुख के रूप में रिटायर्ड होने का इंतजार कर सकती है और फिर उन्हें सीडीएस बना सकती है या उन्हें तुरंत नियुक्त कर सकती है। जब नियमों में संशोधन किया गया तो सीडीएस के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष कर दी गई। एयर मार्शल पांडे ने बताया कि सीडीएस का पद पहला था और उनका प्रतिस्थापन भी 'आपातकाल' के कारण पहली बार होगा। वहीं, भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार उनसे लगभग 2 साल जूनियर हैं।

तीनों सेनाओं में से ही होगा चयन!
शेखतकर समिति की एक सिफारिश के अनुसार, सरकार को तीनों सेना प्रमुखों में से ही सीडीएस का चयन करना चाहिए। इसका मतलब यह होगा कि जनरल नरवणे इस पद के लिए सबसे आगे होंगे। जनरल नरवणे अगले साल अप्रैल में रिटायर्ड होने वाले हैं। अगर उन्हें अगले सीडीएस के रूप में नामित किया जाता है, तो सेना प्रमुख का पद खाली हो जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि सरकार को एक नया थल सेना प्रमुख नियुक्त करना होगा। सरकार इस पद को अधिक समय तक खाली नहीं रखेगी, क्योंकि इस समय पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर कई चुनौतियां हैं। इसके अलावा सरकार सीमाओं पर चुनौतियों का सामना करने के कारण भी सेना से ही अगले सीडीएस की नियुक्ति करना चाहेगी।

सरकार का विशेषाधिकार
हालांकि सीडीएस की नियुक्ति करना सरकार का विशेषाधिकार है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि, भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2016 को जनरल रावत को भारतीय सेना प्रमुख के रूप में नियुक्त करने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी को हटा दिया था। सरकार ने जम्मू और कश्मीर और पूर्वोत्तर में जनरल रावत के अनुभव को देखते हुए ये फैसला लिया था। ऐसे में इस वक्त जनरल नरवणे के नाम का कयास जरूर लगाए जा रहे हैं, लेकिन आखिरी फैसला भारत सरकार को लेना है, कि देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ किसी नियुक्त किया जाता है।












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