Shaurya Chakra: कौन थे मेजर मुस्तफा बोहरा और मेजर विकास भांभू, जिन्हें दिया गया शौर्य चक्र
Gallantry awards 2023: आजादी की 77वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर जब देश की तीनों सेनाओं और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के लिए 76 वीरता पुरस्कारों का ऐलान हुआ तो उनमें दो नाम ऐसे थे, जिनकी बहादुरी की गाथा आपके भी रोंगटे खड़े कर देगी।
ये दो नाम हैं- मेजर मुस्तफा बोहरा और मेजर विकास भांभू का। इन दोनों के पास मौका था कि वो चाहते तो अपनी जान बचा सकते थे, लेकिन इन्होंने अपनी जान की कीमत पर सैकड़ों लोगों की जान बचाई।

252 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के मेजर विकास भांभू और उनके को-पायलट मेजर मुस्तफा बोहरा अरुणाचल प्रदेश में बॉर्डर पर रुद्र हेलीकॉप्टर के जरिए इंटेलीजेंस सर्विलांस और टोही मिशन पर थे। वो 21 अक्टूबर 2022 का दिन था, जब सुबह करीब 10:30 बजे ये दोनों मिशन कंपलीट कर लौट रहे थे और बॉर्डर से 20 किलोमीटर दूर अचानक इनके हेलीकॉप्टर में आग लग गई।
जा सकती थी सैकड़ों लोगों की जान
ये एक ऐसी स्थिति थी, जब मेजर विकास भांभू और मेजर मुस्तफा बोहरा के सामने मौत खड़ी थी, लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी और फर्ज में से किसी एक को चुनना था। हेलीकॉप्टर में जिस वक्त आग लगी, वो अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में ऐसी जगह पर था कि अगर खुले में लैंडिंग कराई जाती तो दोनों की जान तो बच जाती, लेकिन गोला-बारूद केंद्र तक आग पहुंचती और सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी।
हेलीकॉप्टर को ले गए मिगिंग एरिया से दूर
मेजर विकास भांभू और मेजर मुस्तफा बोहरा ने तुरंत अपने जीवन का सबसे बड़ा फैसला लिया और अद्भुत साहस का परिचय देते हुए लोगों की जिंदगी बचाने के लिए हेलीकॉप्टर को मिगिंग एरिया से दूर ले गए। हेलीकॉप्टर की क्रैश लैंडिग हुई और मेजर विकास भांभू और मेजर मुस्तफा बोहरा शहीद हो गए। इन दोनों ने भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपरा निभाते हुए देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। मेजर विकास भांभू और मेजर मुस्तफा बोहरा को मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया है।
आपको बता दें कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिन 76 वीरता पुरस्कारों को अपनी मंजूरी दी, उनमें 4 कीर्ति चक्र (मरणोपरांत), 11 शौर्य चक्र (5 मरणोपरांत), दो 'बार टू सेना' मेडल, 52 सेना मेडल, तीन नौसेना मेडल और चार वायु सेना मेडल शामिल हैं।












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