कौन थे तेलुगु कवि अप्पाराव, जिनकी कविता को बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने पढ़ा, क्या है उसका हिंदी अर्थ?
Budget 2025: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में लगातार आठवीं बार बजट पेश कर रही हैं। बजट भाषण के शुरुआत में निर्मला सीतारमण ने तेलुगु लेखक और कवि गुरजाड अप्पाराव (Gurajada Apparao) के कविता की कुछ पंक्तियां तेलुगु में बोलीं। निर्मला सीतारमण ने कहा, ''దేశమంటే మట్టి కాదోయ్.. దేశమంటే మనుషులోయ్'' इस तेलुगु पंक्ति का हिंदी में अर्थ है ''देश कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है, देश का मतलब है...इसके लोग''
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कोरोना काल के दौरान कोविड-19 वैक्सिनेशन प्रोग्राम के लॉन्च के मौके कवि गुरजाड अप्पाराव की कविता बोली थी। जिसका हिंदी अर्थ था- 'दूसरों की निस्वार्थ भाव से मदद करना'। आइए जानें कौन थे तेलुगु कवि गुरजाड अप्पाराव?

who was Gurajada Apparao: कौन थे तेलुगु कवि गुरजाड अप्पाराव?
- गुरजाड अप्पाराव भारतीय नाटककार, कवि और लेखक थे। तेलुगु कवि गुरजाड अप्पाराव का जन्म 1862 में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में हुए था।
- गुरजाड अप्पाराव का सबसे ज्यादा मशहूर लेखन 'कन्याशुलकम्' है। ये उन्होंने 1892 में लिखा था। ये तेलुगु के सबसे लोकप्रिय नाटकों में से भी एक है। अप्पाराव के पास कविसेखरा और अब्युदय कविता पिथामहुदु की उपाधियां हैं।
- गुरजाड अप्पाराव ने हाराजा कॉलेज में लेक्चरर के रूप में काम किया था, जहां से उन्होंने पढ़ाई भी की थी। 1911 में वह मद्रास विश्वविद्यालय में एजुकेशन बोर्ड में नियुक्त किए गए थे।
- गुरजाड अप्पाराव ने क्षेत्रीय बोलियों को बढ़ावा देने के लिए आंध्र साहित्य परिषद की शुरुआत की थी। गुरजादा ने अपने भाई सैमाला के साथ मिलकर कई अंग्रेजी कविताएं भी लिखी थीं।
- गुरजाड अप्पाराव का 30 नवंबर 1915 में निधन हो गया था। गुरजाड अप्पाराव को तत्कालीन मद्रास विश्वविद्यालय ने उन्हें "एमेरिटस फेलो" की उपाधि से सम्मानित किया था।












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