एक बीएसएफ कमांडेंट से कैसे एक एनआईए ऑफिसर बने तंजील
नई दिल्ली। रविवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के ऑफिसर मोहम्मद तंजील अहमद को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गोलियों से भून डाला गया। एक दो नहीं बल्कि उन पर 24 गोलियां बरसाईं गई थीं।

उन पर हुए इस हमले को पूरी तरह से सुनियोजित साजिश बताया जा रहा है। तंजील एक ऐसे एनआईए ऑफिसर थे जिन्होंने इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े कई केसों को हैंडल किया था।
बच्चों के सामने ही गोलियों से छलनी कर दिए गए तंजील
उनकी मौत के पीछे कई वजहें मानी जा रहीं हैं लेकिन एनआईए के डीजी ने कहा है कि हत्या आतंकी हमले से कम नहीं है। कुछ विशेषज्ञ तंजील पर हुए हमले को भारत में हुए पहले लोन वोल्फ अटैक के तौर पर भी देख रहे हैं।
तंजील बीएसफ के कमांडेंट रहे चुके थे जिन्हें उनकी योग्यता की वजह से एनआईए की जिम्मेदारी दी गई थी।
कौन थे तंजील अहमद
- तंजील अहमद ने इंडियन के कई ऑपरेटिव्य की गिरफ्तारी में अहम भूमिका अदा की थी।
- इंडियन मुजाहिद्दीन के फाउंडर यासिन भटकल की गिरफ्तारी और जांच में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है।
- 49 वर्ष के तंजील का जन्म नौ जुलाई 1968 को हुआ था।
- बीएसएफ के डायरेक्ट एंट्री सब-इंसपेक्टर के एग्जाम को पास करने के साथ वह इसका हिस्सा बने।
- वर्ष 2009 में उनकी रैंक बढ़ और साथ एनआईए में डेप्यूटेशन के लिए भेजे गए थे।
- एनआईए ज्वॉइन करने से पहले वह बीएसएफ की विजिलेंस कवर टीम का हिस्सा थे।
तंजील के कत्ल की पूरी कहानी
बीएसफ ट्रेनिंग एकेडमी के ट्रेनर
- वह हजारीबाग स्थित ट्रेंनिंग सेंटर और मध्य प्रदेश के टेकानपुर स्थित बीएसएफ एकेडमी के ट्रेनर भी रहे थे।
- उनके पड़ोसियों की मानें तो वह कभी पांच टाइम की नमाज पढ़ना नहीं भूलते थे।
- पिछले छह वर्षों में वह एनआईए के साथ हर बड़े केस की जांच में शामिल थे।
- अधिकारी उन्हें इंटेलीजेंस में सर्वश्रेष्ठ करार देते हैं।
- इसलिए उन्हें पहले एनआईए की इंटेलीजेंस टीम में रखा गया।
- बाद में जांच टीम का हिस्सा बना दिया गया था।
- वह टेरर फंडिंग और फेक करेंसी सेल के साथ जुड़े हुए थे।
- अहमद ने करीब एक वर्ष पहले सेल को ज्वॉइन किया था।
- वह कभी भी किसी केस की जांच से मुंह नहीं मोड़ते थे।
उर्दू और पर्शियन के मास्टर
- सूत्रों की मानें तो अहमद को उर्दू और पर्शियन भाषा का अच्छा ज्ञान था।
- इस वजह से वह कई ऑपरेशंस की सफलता में सबसे अहम किरदार साबित हुए।
- वह दानिश रियाज और यासिन भटकल का पता लगाने में एक अहम कड़ी थे।
- अहदम की वजह से इंडियन मुजाहिद्दीन के ऑपरेटिव दानिश रियाज को गिरफ्तार किया जा सका था।
- अहमद ने उस मोबाइल का पता लगाया जिससे यासिन भटकल ने अपनी पत्नी जाहिदा से बात की थी।
- यासिन उस समय नेपाल में था और उसका फोन उसका जूनियर तहसीन अख्तर लेकर आया था।
- जो फोन यासिन ने दिया था तहसीन को उसे राजस्थान में मौजूद उसकी पत्नी जाहिदा को देना था।
- फोन की वजह से ही इंटेलीजेंस एजेंसियों को पता लग सका कि यासिन नेपाल में है।
- अहमद ने ही आईएसआईएस के मॉड्यूल का पता लगाया था।
- अक्टूबर 2014 में हुए बर्दवान ब्लास्ट केस में कई संदिग्धों की गिरफ्तारी भी उनकी वजह से हुई थी।












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