Pasala Krishna Murthy:कौन थे यह स्वतंत्रता सेनानी ? पीएम मोदी ने जिनकी 90 साल की बेटी के छुए पैर

भीमावरम (आंध्र प्रदेश), 4 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को आंध्र प्रदेश के भीमावरम में थे। इस यात्रा पर उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों को याद किया और कहा कि अब उनके सपनों को पूरा करना देशवासियों की जिम्मेदारी है। इस यात्रा में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा का भी अनावरण किया और प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पसाला कृष्णा मूर्ति के घर जाकर उनके परिवार वालों से भी मिले। पीएम मोदी ने कृष्णा मूर्ति की 90 साल की उस बेटी का भी पैर छुआ, जो अपने माता-पिता के संघर्षकाल की साक्षात गवाह रही हैं।

स्वतंत्रता सेनानी की 90 साल की बेटी के छुए पैर

स्वतंत्रता सेनानी की 90 साल की बेटी के छुए पैर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के भीमावरम में राज्य के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पसाला कृष्णा मूर्ति के परिवार वालों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी पसाला कृष्णा मूर्ति की 90 साल की बेटी पसाला कृष्णा भारती से भी मिले। 90 साल की भारती व्हीलचेयर पर थीं, जब प्रधानमंत्री ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री की मुलाकात उनकी बहन और भतीजी से भी हुई।

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    कौन थे पसाला कृष्णा मूर्ति ?

    कौन थे पसाला कृष्णा मूर्ति ?

    पसाला कृष्णा मूर्ति का जन्म 26 जनवरी, 1900 को वेस्ट गोदावरी जिले के तादेपल्लिगुडेम तालुका के वेस्ट विप्पार्रु गांव में हुआ था। मूर्ति 1921 में अपनी पत्नी के साथ तत्कालीन कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। 1929 की बात है गांधीजी छगाल्लु के आनंद निकेतम आश्रम पहुंचे थे। वहीं पर कृष्णा मूर्ति दंपति ने खद्दर फंड के लिए सोना दान किया था। तब उनकी एक बेटी भी थी। वे नमक सत्याग्रह में भी शामिल हुए और 6 अक्टूबर, 1930 को उन्हें एक साल की सजा भी सुनाई गई और वे राजमुंदरी और वेल्लोर जेलों में बंद रहे। गांधी-इर्विन समझौते के बाद 13 मार्च, 1931 को उन्हें रिहा कर दिया गया।

    सब-कलेक्टर के दफ्तर में फहराया था राष्ट्रीय ध्वज

    सब-कलेक्टर के दफ्तर में फहराया था राष्ट्रीय ध्वज

    फिर सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ और इस दौरान पसाला मूर्ति ने विदेशी कपड़ों की एक दुकान पर धरना दिया और 29 जून, 1932 को भीमवरम सब-कलेक्टर के दफ्तर में राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया। इसकी वजह से 27 जून, 1932 को उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और एक साल की जेल और 400 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर सजा को 12 हफ्ते बढ़ाने का प्रावधान था।

    मूर्ति ने अपनी संपत्ति भी दी और लोगों के लिए भीख भी मांगे

    मूर्ति ने अपनी संपत्ति भी दी और लोगों के लिए भीख भी मांगे

    पसाला कृष्णा मूर्ति ने एक तरफ तो स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया तो दूसरी तरफ गांधीजी के बताए रास्ते पर चलकर समाज कल्याण की दूसरी गतिविधियों में भी शामिल रहे। इनमें खादी का प्रसार और हरिजनों का उत्थान शामिल है। यही नहीं मूर्ति और उनकी पत्नी अंजालक्ष्मी ने वेस्ट विप्पार्रु में एक अस्पताल का भी निर्माण करवाया, जिसका अनेकों को लाभ मिला। पसाला कृष्णा मूर्ति ने ना सिर्फ अपनी संपत्ति से लोगों की सहायता की, बल्कि उनके लिए भीख मांग कर भी पैसे जुटाए।

    इनके सपनों को पूरा करना हम सब की जिम्मेदारी-पीएम मोदी

    इनके सपनों को पूरा करना हम सब की जिम्मेदारी-पीएम मोदी

    आजादी के बाद मूर्ति तादेपल्लिगुडेम तालुका स्वतंत्रता सेनानी संघ के अध्यक्ष रहे। वे देश के ऐसे गिने-चुने स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने इससे जुड़ा पेंशन लेने से भी मना कर दिया। यही नहीं, उन्होंने अपनी दो एकड़ जमीन वेस्ट विप्पार्रु में हरिजनों को घर बनाने के लिए दे दिया। उनके सम्मान में तादेपल्लिगुडेम नगरपालिका ने उनके नाम पर एक स्कूल बनाया है। 20 सितंबर, 1978 को उनका निधन हो गया। गौरतलब है कि सोमवार को ही इससे पहले पीएम मोदी ने एक और स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती के अवसर पर भीमवरम में उनकी 30 फीट ऊंची कांस्य प्रतीमा का अनावरण किया। भीमावरम की सभा में पीएम मोदी ने कहा भी, 'आज अमृतकाल में इन सेनानियों के सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी हम सभी देशवासियों की है। हमारा नया भारत इनके सपनों का भारत होना चाहिए।'

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