मायावती को 'पॉलिटिकली डेड' कौन करना चाहता है?

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि मायावती ऐसे भंवरजाल में फंस चुकी है जिसका अंत उनके राजनीतिक करियर के अंत होने के साथ ही होगा।

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी और उसकी मुखिया मायावती दोनों का हाल बुरा है। कुछ बड़े नेता पार्टी छोड़कर चले गए कुछ दिग्गजों को मायावती ने निकाल दिया। ताजा मामला नसीमुद्दीन सिद्दीकी का है, जिन्हे मायावती ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। लंबे समय तक मायावती के खास रहे नसीमुद्दीन ने मीडिया में जिस तरह के खुलासे किए हैं उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि मायावती ऐसे भंवरजाल में फंस चुकी हैं जिसका अंत उनके राजनीतिक करियर के अंत होने के साथ ही होगा। सवाल है कि नसीमुद्दीन की बातों में कितना दम है? क्या वाकई कोई मायावती को 'पॉलिटिकली डेड' करना चाहता है।

बसपा को सतीश चंद्र मिश्रा चला रहे हैं

बसपा को सतीश चंद्र मिश्रा चला रहे हैं

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि बसपा को अब मायावती नहीं मिश्रा एंड कंपनी चला रही है। मतलब ये कि पहले हर फैसले सीधे तौर पर मायावती लेती थी अब हर फैसले में सतीश चंद्र मिश्रा की दखल होती है। सिद्दीकी के मुताबिक सतीश मिश्रा मौका मिलते ही पार्टी की कमान अपने हाथों में ले सकते हैं। वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य ने नसीमुददीन को मायावती का कलेक्शन अमीन बताते हुए कहा है कि जब तक सतीश मिश्रा को निकालने की नौबत आएगी तब तक सतीश मिश्रा खुद माया को हटाकर बसपा अध्यक्ष बनेंगे। बीते सालों में देखा जाय तो बसपा में सतीश चंद्र मिश्रा का कद भी बढ़ा है और उनकी संपत्ती में भी इजाफा हुआ है।

'मायावती पार्टी बसपा को खुद खत्म करना चाहती हैं'

'मायावती पार्टी बसपा को खुद खत्म करना चाहती हैं'

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि मायावती खुद बसपा को खत्म करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि मायावती खुद चाहती हैं कि पार्टी खत्म हो जाए ताकि कोई और पार्टी में खड़ा न हो पाए। वह नहीं चाहतीं कि कोई और दलित चेहरा मुख्यमंत्री बने। नसीमुद्दीन ने कहा कि मायावती ने चुनाव के बाद मुझे बुला कर मुसलमान को गद्दार बताया और खुद मुझे जान से मारने की धमकी भी दी। इस दौरान उन्होंने मायावती के साथ अपनी बातचीत के कई ऑडियो भी जारी किया है।

मायावती के भाई की बढ़ी दखल

मायावती के भाई की बढ़ी दखल

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को पार्टी उपाध्यक्ष बनाया है। मायावती ने आनंद कुमार को इस शर्त पर यह जिम्मेदारी दी गई है कि भविष्य में वो सांसद या मुख्यमंत्री नहीं बनेगे।मायावती के भाई कुमार पर आय से ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप लगा हुआ है। इसको लेकर आयकर विभाग और ईडी जांच कर रहा है। मायावती के भाई आनंद कुमार के अंदर भी पावर सेंटर बनने की तमन्ना हो सकती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

बसपा को एकत्रित रखना मायावती के लिए बड़ी चुनौती

बसपा को एकत्रित रखना मायावती के लिए बड़ी चुनौती

बसपा के हालातों पर गौर करें तो पार्टी न राज्य की सत्ता में है और ना ही केंद्र की सत्ता में उसकी कोई दखल है। ऐसे में पार्टी में टूट- फूट तो होगी ही। राजनीति पंडितों ने तो यूपी चुनावों में हार के बाद ही कह दिया था कि इस हार के बाद बसपा बिखर जाएगी। पार्टी में भारी टूट-फूट होगी। बसपा सभी दलों के निशाने पर होगी और बिना सत्ता के मुकाबला करना मुश्किल होगा। आरके चौधरी, स्वामी प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई नेताओं चुनाव से पहले ही पार्टी छोड़ चुके थे। हार के बाद बचे हुए अपनी ही पार्टी के नेताओं को सहेजना मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही सभी दलों के निशाने पर रही मायावती पर दूसरे दलों के हमले और बढ़ जाएंगे। और वैसा ही हो रहा है।

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