कौन कहता है घट रहे हैं दालों-सब्जियों के दाम
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हालांकि मोदी सरकार के सत्ता में काबिज होने के बाद पेट्रोल के दाम दस बार घटे, पर रसोई से जुड़ा आपका बजट कम नहीं हो रहा है। होगा कैसे, दाल-सब्जियों के दाम जो सही तरह से नहीं घट रहे। दालों जैसे मसूर और अरहर की कीमतों में 30 फीसदी तक इजाफा हुआ है।

गरीबों की सुनो
जानकार मानते हैं कि गरीब और कम आय वर्ग के लोग खाने में चपाती के साथ सब्जियों का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि दाल की कीमत कई साल पहले आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई। पर, अब सब्जियों की कीमत आजादपुर थोक बाजार में भी आसमान छू रही है। आम आदमी के पास आते-आते इसकी कीमत कई गुना और बढ़ जाती है।
हाल फलों-सब्जियों का
अब सब्जियों और फलों का हाल भी सुन लीजिए। इनकी कीमतों में 20 से 50 फीसदी का इजाफा हुआ है और मटर और हरी सब्जियों की कीमतों में तो करीब 100 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।
सबके दाम बढ़े
दिल्ली की अनाज मंडी के भावों पर गौर करें तो 31 जनवरी 2014 से 30 जनवरी 2015 के बीच मटर की थोक कीमत में 106 फीसदी, पालक की कीमत 94 फीसदी, गाजर की कीमत में 89 फीसदी, सेम की कीमत में 68 फीसदी, बंदगोभी की कीमत में 61 फीसदी, बैंगन की कीमत में 57 फीसदी, मेथी की कीमत में 56 फीसदी, भिंडी और हरी मिर्च की कीमत में 47 फीसदी, प्याज की कीमत में 40 फीसदी और टमाटर की कीमत में 33 फीसदी इजाफा हुआ है। प्याज की कीमत 40 फीसदी बढ़ गई है और टमाटर की 33 फीसदी। सिर्फ संतरे और केले की कीमत में गिरावट आई है।
नाराज गरीब
जानकारों के अनुसार,कीमतों में इजाफे के चलते गरीब तबका सरकार से नाराज है। सिर्फ 8 महीने पहले बीजेपी ने दिल्ली में लोकसभा चुनाव में कीमतों को कम करने का दावा करके सातों सीटें झटक ली थी।












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