कौन हैं Mausam Benazir Noor? बंगाल चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी को दगा दे कांग्रेस में हुईं शामिल
Mausam Benazir Noor Joins Congress: पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है और नेताओं के दल-बदल का दौर भी शुरू हो चुका है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर कांग्रेस में शामिल हो गईं। उनके इस फैसले के बाद TMC के अंदरखाने में चल रही असंतोष के दावों का दौर शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि वह लोकसभा चुनाव के बाद से नाराज चल रही थीं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मौसम नूर और TMC नेतृत्व के बीच पिछले काफी समय से मतभेद चल रहे थे। बताया जा रहा है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। टीएमसी से उन्हें न तो राज्यसभा में दोबारा भेजने और न विधानसभा चुनाव में टिकट का आश्वासन मिला था। इसी वजह से उन्होंने पार्टी बदल ली।

Mausam Benazir Noor के पार्टी छोड़ने के पीछे कई वजह
- सूत्रों का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मौसम नूर ने अपने भाई और कांग्रेस उम्मीदवार ईसा खान चौधरी के समर्थन में प्रचार किया था। इसे TMC नेतृत्व ने पार्टी अनुशासन का उल्लंघन माना।
- इसी वजह से उनके और पार्टी हाईकमान के रिश्तों में खटास आ गई। मामले के सामने आने के बाद पार्टी की ओर से मौसम नूर को फटकार भी लगाई गई थी। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी।
- इसके बावजूद, वह धीरे-धीरे पार्टी की अहम बैठकों से दूरी बनाने लगीं, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं। उन्हें टिकट का आश्वासन भी नहीं मिला था। यही वजह है कि उन्होंने पार्टी बदल ली।
Bengal Election 2026 पर क्या होगा असर?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिला स्तर पर संगठनात्मक प्रदर्शन को लेकर भी मौसम नूर को लेकर असंतोष था। मौसम नूर पहले भी कांग्रेस में रह चुकी हैं। 2019 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर TMC जॉइन की थी और अब करीब सात साल बाद फिर से अपनी पुरानी पार्टी में लौट आई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में मौसम को कांग्रेस से टिकट मिल सकता है।
कुछ दिन पहले ही हुमायूं कबीर पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बना चुकी हैं। ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते हैं, लेकिन दो बड़े मुस्लिम नेताओं के पार्टी छोड़ने का असर चुनावों में दिख सकता है। खास तौर पर हुमायूं कबीर का मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छा प्रभाव है।












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