एयर स्ट्राइक पर राजनीति कर कौन देश को कमजोर कर रहा है?
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कैसे शुरू हुई राजनीति?
पुलवामा हमले के बाद हुए एयर स्ट्राइक के बाद विपक्षी दलों ने जिस तरह से भारतीय वायुसेना (IAF)के जांबाजों का गौरवगान किया, वह अभूतपूर्व था। हालांकि, मोटे तौर पर विपक्षी नेताओं ने इस साहसिक फैसले के लिए प्रधानमंत्री की हौसला अफजाई से परहेज ही किया। बाद में मोदी ने खुद ही राजस्थान की एक रैली में भारत की कामयाबी का खुलकर इजहार किया। अगले दिन 21 विपक्षी दलों ने एक साझा बयान जारी करके मोदी सरकार पर सुरक्षा बलों की शहादत का खुलकर राजनीतिकरण करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। फिर क्या था, पाकिस्तान ने विपक्ष के इसी साझा बयान को हथियार बनाकर ये कहना शुरू कर दिया कि भारत पुलवामा हमले का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए दोनों देशों के बीच माहौल खराब कर रहा है। लेकिन, पाकिस्तान के रवैए के बावजूद भी भारत में कोई भी राजनीतिक दल सीखने के लिए राजी नहीं हुआ। खबरों के मुताबिक कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीएस येदियुरप्पा ने ये कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया कि बालाकोट में हुआ एयर स्ट्राइक पूरे देश में फिर से मोदी लहर ला देगा। उन्होंने यहां तक कहा कि अब तो उनकी पार्टी कर्नाटक में 22 सीटें तक जीत सकती हैं। हालांकि, येदियुरप्पा के इस बड़बोलेपन पर उन्हीं की पार्टी के विदेश राज्यमंत्री जरनरल (रि.) वीके सिंह ने तत्काल ऐतराज भी जताया। बाद में येदियुरप्पा ने बयान को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाकर विवाद खत्म करने की भी कोशिश की। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पाकिस्तान ने इसे भी तुरंत लपक लिया और यह बताने की कोशिश शुरू कर दी कि यह सब भारत में चुनाव जीतने के लिए हो रहा है।
कौन रोकेगा राजनीति?
एयर स्ट्राइक को लेकर भारत में जिस तरह की राजनीति हो रही है, उसे पाकिस्तान हथियार बना रहा है और यही बात प्रधानमंत्री को चुभ रही है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि, "मैं उनसे (विपक्ष) कहना चाहता हूं कि मोदी आएगा और जाएगा, लेकिन भारत रहेगा। कृप्या अपनी राजनीति मजबूत करने के लिए भारत को कमजोर करना बंद कीजिए।" उनके मुताबिक मोदी से द्वेष के चलते कुछ लोगों ने भारत से ही घृणा करना शुरू कर दिया है। उनके अनुसार, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दुनिया भारत के साथ है, लेकिन कुछ दल हमारी लड़ाई पर संदेह जता रहे हैं। लेकिन, विपक्ष इससे ठीक उलट आरोप लगा रहा है। बीएसपी अध्यक्ष मायावती खुद मोदी पर आरोप लगा चुकी हैं कि जब उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, तब वे राष्ट्र भावना को ताक पर रखकर बीजेपी कार्यकर्ताओं से बात करके अपना राजनीतिक हित साधना चाहते हैं। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल येदियुरप्पा के बहाने ये कह रहे हैं कि केंद्र में 300 सीटें जीतने के लिए वे कितने जवानों को शहीद करना चाहते हैं।

सबको स्वार्थ से ऊपर उठना चाहिए
ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की चिंता बाजिव है। लेकिन, उन्हें भी यह भी समझना होगा कि विपक्ष को ऐसा मौका मिल क्यों रहा है? अगर येदियुरप्पा ने सही में वो बयान दिया है, तो क्या दूसरों पर सवाल उठाने से पहले वे उनको हिदायत देंगे। क्योंकि, गलतियां दोनों ओर से हुई हैं, जिसका फायदा पाकिस्तान उठा रहा है। अगर सही में लोग चाहते हैं कि मौजूदा हालातों में दुश्मन को कोई भी मौका न मिले, तो सबको संयम बरतना होगा, यही वक्त की नजाकत है।












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