कौन हैं साउथ इंडिया के ‘टाटा’? बेटे को क्यों नहीं बनाया अपना वारिस
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। तमिलनाडू के मशहूर चेटिनाड ग्रुप के 84 साल के चीफ एमएएम रामास्वामी को एक दौर में साउथ इंडिया का टाटा-बिड़ला माना जाता था। उन्होंने अपने पुत्र एमएएमआर मुथैया को अपने ग्रुप का वारिस ना बनाने की घोषणा करके बड़ा हंगामा कर दिया।

हालांकि पुत्र ने पिता से समझौता करने की पेशकश की, पर पिता एमएएम रामास्वामी ने पेशकश को नहीं माना। रामास्वामी ने अपनी हजारों करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति अपने करीबी संबंधी स्पिक ग्रुप के चेयरमेन ए.सी. मुथैया की तरफ से चलाए जा रहे ट्रस्ट को देने का फैसला किया है। कौन हैं साउथ के टाटा-बिड़ला माने जाने वाले रामास्वामी? आइये जानते हैं उनके बारे में 10 खास बातें।
- एमएएम रामास्वामी तमिलनाडू के चेटिनाड ग्रुप के दशकों से प्रमुख हैं। इसका मुख्य बिजनेस सीमेंट का है। जो हजारों करोड़ रुपये का है।
- वे घोड़ों की रेस के बेहद शौकीन हैं। इसमें वे जमकर सट्टा लगाते रहे हैं।
- वे अपने पुत्र से इसलिए नाराज है क्योंकि वह चैरिटी में यकीन नहीं करता।
- रामास्वामी लंबे समय तक भारतीय हाकी संघ के चेयरमेन भी रहे।
- वे जनता दल (सेक्यलूर) की तरफ से राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
- वे अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के वाइस चासंलर भी रहे।
- रामास्वामी बेहद रंगीन किस्म के शख्स हैं। वे यारों के यार रहे हैं।
- वे तमिलनाडू में करुणानिधि से लेकर एज.जी.रामचंद्रन के करीबी रहे हैं।
- कहते हैं कि चेन्नई में उनका बंगला सबसे भव्य है।
- वे साहित्य और संगीत में भी रुचि लेते हैं।












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