HS Phoolka joins BJP: 1984 के जख्मों पर मरहम लगाने वाले 'हाथ' ने थामा 'कमल', कौन हैं एच.एस. फूलका?
Harvinder Singh Phoolka Joins BJP: दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले एचएस फूलका (HS Phoolka) औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। बुधवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। आइए जानते हैं कैसा रहा है एचएस फुल्का का अब तक का सियासी और सामाजिक सफर?

सिख दंगों के खिलाफ जंग और 'पद्म श्री' का सम्मान
एचएस फूलका की पहचान केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक प्रखर मानवाधिकार कार्यकर्ता की रही है। 1984 के दंगों के बाद उन्होंने 'सिटिजन जस्टिस कमेटी' (CJC) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कांग्रेस के बड़े नेताओं को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
एचएस फूलका का राजनीतिक सफर?
- 2014: फूलका ने राजनीति की शुरुआत आम आदमी पार्टी (AAP) से की और लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि वह कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से हार गए थे।
- 2017: पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने दाखा सीट से जीत दर्ज की और अकाली दल के दिग्गज नेता मनप्रीत सिंह अयाली को मात दी।
- 2019: जनवरी 2019 में उन्होंने 'आप' से इस्तीफा दे दिया। उस समय उन्होंने राजनीति में आने को अपनी 'गलती' बताया था और कहा था कि वह केवल सामाजिक कार्यों पर ध्यान देंगे। अब 2026 में उन्होंने बीजेपी के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू की है।
कौन हैं एचएस फूलका?
सीनियर एडवोकेट एचएस फूलका का जन्म ओंकार सिंह के परिवार में हुआ था और वर्तमान में उनकी आयु लगभग 61 वर्ष है। वह पेशे से दिल्ली हाई कोर्ट के एक प्रतिष्ठित वकील हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। फुल्का का नाम पंजाब की भदौड़ विधानसभा सीट की मतदाता सूची में दर्ज है। एक लेखक के तौर पर उन्होंने 'व्हेन अ ट्री शुक दिल्ली' जैसी चर्चित किताब भी लिखी है, जो 1984 के दंगों का एक व्यापक दस्तावेज़ मानी जाती है।
2019 में मिला पद्म श्री सम्मान
सामाजिक क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान और न्याय के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 2019 में पद्म श्री सम्मान से भी अलंकृत किया था।












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