Sanjeev Sanyal: मोदी के सलाहकार संजीव सान्याल कौन हैं? किस जाति से? बन सकते हैं बंगाल के नए वित्त मंत्री
Who is Sanjeev Sanyal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, और वो नाम किसी राजनेता का नहीं बल्कि एक ऐसे अर्थशास्त्री का है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े बैंकों और भारत सरकार की फाइलों में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। हम बात कर रहे हैं संजीव सान्याल की। 4 मई को जब बंगाल चुनाव के नतीजों ने इतिहास रचा, तो सान्याल ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट लिखा- "समय की देवी कालचक्र को घुमाती है।"
इस एक लाइन ने इशारा कर दिया था कि बंगाल की सत्ता के गलियारों में कुछ बड़ा होने वाला है। अब चर्चा तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद भरोसेमंद सलाहकार संजीव सान्याल बंगाल के नए वित्त मंत्री बन सकते हैं। दिलचस्प बात ये है कि सोशल मीडिया पर लोग सिर्फ उनकी आर्थिक समझ ही नहीं, बल्कि उनकी बंगाली पहचान, परिवार, राजनीतिक बैकग्राउंड और जाति तक के बारे में जानना चाह रहे हैं। आइए जानें संजीव सान्याल के बारे में।

▶️कौन हैं संजीव सान्याल? (Early Life and Academic Brilliance of Sanjeev Sanyal)
संजीव सान्याल का नाता बंगाल की मिट्टी से बहुत गहरा है। उनका जन्म 1970 में कोलकाता के एक प्रबुद्ध परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा भी कोलकाता के मशहूर सेंट जेवियर्स और सेंट जेम्स स्कूल में हुई। इसके बाद वे दिल्ली आए और श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित 'रोड्स स्कॉलरशिप' जीती और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की।
सरकार में आने से पहले सान्याल ड्यूश बैंक (Deutsche Bank) में मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट के पद पर थे। 2017 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग छोड़कर भारत सरकार के साथ काम करना शुरू किया। वे 2022 तक देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे और कई 'इकोनॉमिक सर्वे' ड्राफ्ट करने में उनकी मुख्य भूमिका रही। वे सिर्फ एक अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन इतिहासकार और लेखक भी हैं। उनकी किताबें 'लैंड ऑफ द सेवन रिवर्स' और 'रिवोल्यूशनरी' बेस्टसेलर रही हैं।

▶️संजीव सान्याल का परिवार (Sanjeev Sanyal Family Legacy)
संजीव सान्याल का परिवार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक स्वर्णिम अध्याय रहा है। वे महान क्रांतिकारी सचिंद्र नाथ सान्याल के पोते (Grand Nephew) हैं। सचिंद्र नाथ सान्याल वही शख्स थे जिन्होंने भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे वीरों को रास्ता दिखाया था। इतना ही नहीं, उनके परदादा नलिनक्ष सान्याल अविभाजित बंगाल की विधानसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप थे। यानी सियासत और देशसेवा उनके डीएनए में है।
▶️क्या है संजीव सान्याल की जाति? (Sanjeev Sanyal Caste)
सामाजिक और सांस्कृतिक नजरिए से देखें तो संजीव सान्याल ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। बंगाल में 'सान्याल' मुख्य रूप से वरेंद्र ब्राह्मण (Varendra Brahmin) उपनाम है। ऐतिहासिक तौर पर यह समुदाय उत्तर बंगाल के वरेंद्र क्षेत्र से जुड़ा रहा है। सान्याल बंगाली जड़ों और ग्लोबल एक्सपोजर का एक ऐसा मिश्रण हैं, जो बंगाल के लोगों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने की काबिलियत रखते हैं।

▶️अब जानिए बंगाल सरकार में संजीव सान्याल की जरूरत क्यों? (Why Bengal Needs Sanjeev Sanyal?)
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शपथ तो ले ली है, लेकिन फिलहाल वित्त मंत्रालय का जिम्मा वो खुद ही संभाल रहे हैं। बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके पास बंगाल में फिलहाल कोई ऐसा विधायक नहीं है जिसके पास अर्थव्यवस्था की गहरी समझ हो। बंगाल की आर्थिक हालत इस वक्त काफी नाजुक है और उसे पटरी पर लाने के लिए किसी 'मास्टरमाइंड' की जरूरत है।
यहीं संजीव सान्याल का नाम सबसे आगे आता है। वे वर्तमान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के पूर्णकालिक सदस्य हैं। दिल्ली में यह चर्चा आम है कि बीजेपी उन्हें किसी सुरक्षित सीट (संभवतः नंदीग्राम या भवानीपुर) से चुनाव लड़वाकर सरकार में नंबर-2 यानी वित्त मंत्री की कुर्सी सौंप सकती है। सुवेंदु की शपथ के दौरान सान्याल का बंगाली धोती-कुर्ते में नजर आना महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

▶️क्या सान्याल बनेंगे 'गेम चेंजर'? (Sanjeev Sanyal Game Changer)
बीजेपी का पिछला रिकॉर्ड रहा है कि वे काबिल नौकरशाहों और विशेषज्ञों को सीधे राजनीति में लाकर बड़ी जिम्मेदारी देते हैं। एस. जयशंकर और हरदीप सिंह पुरी इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। संजीव सान्याल के मामले में भी यही 'एक्सपेरिमेंट' दोहराया जा सकता है। उनकी पत्नी स्मिता बरुआ ने भी चुनाव के दौरान महिलाओं को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है।
सवाल अब यह है कि क्या यह 'धरतीपुत्र' अपनी जड़ों की ओर लौटेगा? अगर सान्याल वित्त मंत्री बनते हैं, तो यह न केवल बंगाल की अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि बीजेपी की ब्रांडिंग के लिए भी एक मास्टरस्ट्रोक होगा। सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक पकड़ और संजीव सान्याल की आर्थिक समझ-यह जोड़ी बंगाल के लिए 'संजीवनी' साबित हो सकती है।












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