कौन हैं साध्वी ऋतंभरा, लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच क्यों मिलने पहुंचे अमित शाह
राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। राम मंदिर के लिए करीब पांच दशकों तक आंदोलन चला। इस आंदोलन में महिला साध्वी भी चर्चाओं में रहीं। उनमें से एक हैं साध्वी ऋतंभरा।
रविवार, 31 दिसंबर को साध्वी ऋतंभरा ने अपना 60वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर वृन्दावन के वात्सल्य ग्राम में षष्ठीपूर्ति महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। आइए आपको बताते हैं आखिर साध्वी ऋतंभरा हैं कौन?

कौन हैं साध्वी ऋतंभरा?
दीदी मां के तौर पर जानी जाने वाली साध्वी ऋतंभरा अपने भाषणों के लिए मशहूर हैं। उनका जन्म लुधियाना के दोराहा में हुआ था। साध्वी बनने से पहले उनका नाम निशा था।
उन्हें ऋतंभरा का नाम हरिद्वार के संत स्वामी परमानंद गिरी की शिष्या बनने के बाद मिला। वो आरएसएस की महिला संगठन राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़ीं। राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने के बाद उन्होंने गंगा माता भारत माता यात्रा निकाली।
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1980 के दशक में उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में शिरकत करना शुरू किया। राम मंदिर आंदोलन में वो हिंदू जागृति अभियान की कमान संभालने लगी। साध्वी ऋतंभरा का नाम 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद लिब्राहन आयोग के 68 आरोपियों की लिस्ट में शामिल था।
आयोग का आरोप था कि साध्वी के तीखे भाषणों ने मस्जिद विध्वंस का माहौल तैयार किया था। हालांकि इसके बाद वो अनाथ बच्चों के लिए बनाए गए वात्सल्य ग्राम और कथाओं की ओर चली गईं। 2020 में लखनऊ की विशेष अदालत ने बाबरी विध्वंस के सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर बनाने के पक्ष में कई इंटरव्यू दिए थे। एक टीवी चैनल को दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि 'राम रहेंगे टाट में, भक्त रहेंगे ठाठ से', ऐसा नहीं होना चाहिए। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकार में राम मंदिर नहीं बनेगा तो फिर कब बनेगा?
आरोपों से रहा है साध्वी का गहरा नाता
1995 में ऋतंभरा ने तब सुर्खियां बटोरीं थी जब उन्हें ईसाइयों के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में इंदौर में गिरफ्तार किया गया था। उस समय कांग्रेस के दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उन्हें 11 दिनों तक जेल में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था।
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इसके बाद वो 2009 में फिर से सुर्खियों में आईं। उन्हें लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उन 68 लोगों में शामिल किया, जिन्होंने मंदिर आंदोलन के दौरान देश को "सांप्रदायिक कलह के कगार पर" पहुंचाया था।
उनके 60वें जन्मदिन पर उन्हें बधाई देने के लिए शाह की यात्रा ने ऋतंभरा को कुछ समय के लिए फिर से खबरों में ला दिया है। यह यात्रा पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में परियोजनाओं का अनावरण करने के एक दिन बाद और मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह से तीन सप्ताह पहले हुई, जिसके साथ वह कभी प्रसिद्ध रूप से जुड़ी थीं।
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