Sadanandan Master कौन हैं? संसद की मेज पर क्यों रखे अपने कृत्रिम पैर, भावुक हुए अमित शाह
Sadanandan Master legs cut Kerala: राज्यसभा में सोमवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब मनोनीत सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने अपने कृत्रिम पैरों को सदन की मेज पर रखकर केरल की 'खूनी राजनीति' का दहला देने वाला सच साझा किया। 31 साल पहले केरल में हुए एक जानलेवा हमले में अपने पैर गंवाने वाले सदानंदन मास्टर ने इस कदम के जरिए राजनीतिक हिंसा के दर्दनाक सच को सदन के सामने रखा।
जहां बीजेपी ने इसे विपक्षी विचारधारा की क्रूरता का प्रमाण बताया, वहीं सीपीएम सांसदों ने सदन की मर्यादा का हवाला देते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई।

Sadanandan Master Rajya Sabha Speech: कौन हैं संघर्ष की यह मिसाल?
सी. सदानंदन मास्टर केरल के कन्नूर के रहने वाले एक सम्मानित शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 1994 में, जब वे अपनी बहन की शादी की तैयारियों में व्यस्त थे, तब उन पर राजनीतिक विरोधियों ने जानलेवा हमला किया। महज आरएसएस की विचारधारा से जुड़ाव के कारण उनके दोनों पैर घुटनों के नीचे से काट दिए गए। आज वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हैं और बिना पैरों के भी संसद में अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
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Sadanandan Master Rajya Sabha Speech: मेज पर कृत्रिम पैर और विपक्ष का विरोध
राज्यसभा में अपने पहले भाषण के दौरान सदानंदन मास्टर ने लोकतंत्र और राजनीतिक हिंसा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सदन की मेज पर अपने दोनों कृत्रिम पैर रखते हुए कहा कि जो लोग आज सदन में लोकतंत्र और अधिकारों की दुहाई दे रहे हैं, उन्हीं की विचारधारा ने 31 साल पहले उनके दोनों पैर छीन लिए थे। मास्टर ने भावुक होते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि वैचारिक मतभेद के कारण किसी के अंग काट देना और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाना लोकतंत्र नहीं, बल्कि क्रूर अधिनायकवाद है। उनके अनुसार, वास्तविक लोकतंत्र वह है जहां असहमति का सम्मान हो और हिंसा के लिए कोई स्थान न हो।
Rajya Sabha Artificial Legs Incident: पैर काटने के बाद लगाए 'इंकलाब' के नारे
सदानंदन मास्टर ने उस काली रात का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे हमलावरों ने उन्हें घेरकर जमीन पर गिराया और उनके पैर अलग कर दिए। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि उनके पैर काटने के बाद हमलावरों ने 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जो लोग आज सदन में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की दुहाई दे रहे हैं, उन्हीं की विचारधारा ने दशकों पहले उनके जीवन को शारीरिक रूप से अपंग बना दिया था।
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गृह मंत्री अमित शाह ने की सराहना
गृह मंत्री अमित शाह ने सदानंदन मास्टर के भाषण की सराहना करते हुए कहा कि उनका संघर्ष उन लोगों के लिए आईना है जो 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' की झूठी दुहाई देते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि विचारधारा अलग होने पर किसी की जान लेना या अंग भंग करना लोकतंत्र की हत्या है। यह भाषण उन असंख्य कार्यकर्ताओं के बलिदान को समर्पित था, जिन्होंने केरल में हिंसा के बावजूद अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और देशप्रेम के साथ कभी समझौता नहीं किया।












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