'पीएम मोदी ने देश को बेच दिया', पूरी नहीं हो पाई राहुल गांधी की स्पीच, संसद में जमकर भड़के
Budget Session Rahul Gandhi: बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा ने मंगलवार को संसद में एक बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। सोमवार को लोकसभा में शुरू हुए हंगामे की गूंज मंगलवार को भी सदन के गलियारों में साफ सुनाई दी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे इस टकराव के केंद्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने भारत-चीन संबंधों को लेकर एक अप्रकाशित किताब का हवाला दिया था।
इस मुद्दे ने सदन में इतनी तीखी बहस छेड़ दी है कि दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को जब कार्यवाही शुरू हुई, तो उम्मीद थी कि चर्चा सुचारू रूप से चलेगी, लेकिन राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा अपनी बात पर अड़े रहने और सत्ता पक्ष द्वारा उसका कड़ा प्रतिकार करने से माहौल फिर से तनावपूर्ण हो गया। सदन की गरिमा और बोलने के अधिकार को लेकर छिड़ी इस जंग ने संसदीय कार्यवाही को बार-बार बाधित किया।

राहुल गांधी का आरोप, 'मुझे बोलने से रोका जा रहा'
मंगलवार को सदन में राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी बात रखने की कोशिश की। उन्होंने सोमवार के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जिस मैगजीन की जानकारी उन्होंने साझा की थी, उसकी अब पुष्टि हो चुकी है। राहुल गांधी ने अध्यक्ष से अपील करते हुए कहा, "मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। मैंने जिस मैगजीन का जिक्र किया था, वह सच साबित हुई है। मैं अब किसी किताब या पत्रिका का नाम नहीं लूंगा, लेकिन मुझे अपनी बात पूरी करने का अधिकार मिलना चाहिए।"
'मोदी जी घबराए हुए हैं'- राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "मोदी जी घबराए हुए हैं। (अमेरिका-भारत) ट्रेड डील, जो पिछले कुछ महीनों से अटकी हुई थी, उसे नरेंद्र मोदी ने कल रात साइन कर दिया। उन पर बहुत ज़्यादा दबाव है। नरेंद्र मोदी जी की इमेज खराब हो सकती है। मुख्य बात यह है कि हमारे PM कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं। जनता को इस बारे में सोचना चाहिए। पहली बार विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के भाषण पर बोलने नहीं दिया गया।'
उन्होंने आगे कहा, "नरेंद्र मोदी जी ने इस ट्रेड डील में आपकी मेहनत बेच दी है क्योंकि वह कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं। उन्होंने देश को बेच दिया है। नरेंद्र मोदी जी डरे हुए हैं क्योंकि जिन्होंने उनकी इमेज बनाई थी, वे अब इस इमेज को तोड़ रहे हैं....अडानी जी पर अमेरिका में एक केस है, वह असल में मोदी जी पर केस है....एपस्टीन फाइल्स में और भी बहुत कुछ है जो अमेरिका ने अभी तक जारी नहीं किया है। उसकी वजह से भी दबाव है। ये दो प्रेशर पॉइंट्स हैं। देश को यह समझना चाहिए।"
चीन के मुद्दे पर फिर भड़की चिंगारी
जैसे ही राहुल गांधी ने चीन के साथ सीमा विवाद और कूटनीतिक संबंधों का मुद्दा दोबारा उठाया, सदन में हंगामा शुरू हो गया। भाजपा और सहयोगी दलों के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में विपक्षी सांसद भी अपनी सीटों पर खड़े हो गए। राहुल गांधी का आरोप था कि गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार चर्चा से भाग रही है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क था कि नेता प्रतिपक्ष सदन को गुमराह करने के लिए अपुष्ट स्रोतों का सहारा ले रहे हैं।
सरकार बनाम विपक्ष, बैठकों के बाद भी बेनतीजा रहा संवाद
सदन में बने इस गतिरोध को सुलझाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई। इस बैठक के बाद दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू की गई, लेकिन शांति केवल कुछ ही मिनटों तक बनी रही।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "विपक्ष के नेता एक ही बात को बार-बार दोहरा रहे हैं। सदन का कीमती समय बिना किसी ठोस तथ्य के बर्बाद किया जा रहा है। नियमों के खिलाफ जाकर सदन में अप्रकाशित दस्तावेजों का जिक्र करना संसदीय परंपरा के विरुद्ध है।"
कार्यवाही 3 बजे तक स्थगित
शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि लोकसभा अध्यक्ष के लिए सदन को चलाना असंभव हो गया। मंत्रियों के हस्तक्षेप और अध्यक्ष की बार-बार की अपील के बावजूद जब सांसद शांत नहीं हुए, तो दोपहर 3 बजे तक के लिए कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।
धन्यवाद प्रस्ताव पर शुरू हुई यह चर्चा अब पूरी तरह से चीन और अभिव्यक्ति की आजादी के इर्द-गिर्द सिमट गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के आने वाले दिनों में यह तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से संसद तक ले जाने की तैयारी में है।












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