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VB G RAM G Bill 2025: मनरेगा की जगह ‘जी राम जी’ बिल लोकसभा में पास, रोजगार में आएंगे ये 10 बदलाव

VB G Ram G Bill 2025: संसद के मॉनसून सत्र के बीच गुरुवार (18 दिसंबर) को लोकसभा में ग्रामीण रोजगार से जुड़ा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G बिल 2025 सदन में पारित करा लिया है। 'जी राम जी' बिल लोकसभा में पास होते ही विपक्ष ने सरकार पर महात्मा गांधी के अपमान और मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया।

विपक्ष का कहना है कि यह बिल 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा और इसी वजह से इसका विरोध किया जा रहा है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर महात्मा गांधी का नाम हटाकर एक ऐतिहासिक योजना की पहचान खत्म कर रही है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में जोरदार नारेबाजी हुई, सांसद वेल में पहुंच गए और कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

VB G Ram G Bill 2025

▶️VB-G RAM G Bill पर 14 घंटे की लंबी बहस, फिर लोकसभा में पास

VB G RAM G बिल पर लोकसभा में करीब 14 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें 98 सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्ष की मांग थी कि बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। आखिरकार बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

बिल के पास होने से पहले विपक्ष ने संसद परिसर में मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में 50 से ज्यादा सांसद शामिल हुए और सरकार से बिल वापस लेने की मांग की गई।

▶️VB-G RAM G Bill 2025 की 3 बड़ी खास बातें

  • ग्रामीण परिवारों को अब पहले से ज्यादा काम मिलने का दावा किया गया है। नए बिल के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान रखा गया है, ताकि साल भर आमदनी का सहारा मजबूत हो सके।
  • खर्च की जिम्मेदारी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। जहां पहले इस योजना का पूरा वित्तीय बोझ केंद्र सरकार उठाती थी, वहीं अब राज्यों को भी अपनी हिस्सेदारी देनी होगी। राज्यों को 10 से लेकर 40 प्रतिशत तक खर्च वहन करना पड़ेगा।
  • खेती को प्राथमिकता देते हुए रोजगार के समय में भी कटौती तय की गई है। बोवाई और कटाई के करीब 60 दिनों के दौरान इस योजना के तहत काम नहीं दिया जाएगा, ताकि खेतों में मजदूरों की कमी न हो और कृषि गतिविधियां प्रभावित न हों।

Viksit Bharat-G RAM G Bill 2025: रोजगार में क्या होंगे 10 बदलाव

🔹 1. अब मनरेगा से आगे की योजना

यह नया कानून गांवों में रोजगार देने की व्यवस्था को आधुनिक बनाता है और इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ता है, ताकि रोजगार सिर्फ काम भर न रहे, बल्कि गांवों का विकास भी हो।

🔹 2. काम के दिन बढ़े, आमदनी ज्यादा सुरक्षित

हर ग्रामीण परिवार को अब साल में 125 दिन तक काम मिलने की गारंटी होगी। इससे गांव के लोगों को ज्यादा दिनों तक कमाई का सहारा मिलेगा। खेती के मौसम में काम बंद रहने से यह साफ है कि 125 दिन का रोजगार कम समय में पूरा करना होगा, यानी काम का मौका ज्यादा होगा।

🔹 3. काम ऐसा जो गांव के काम आए

योजना के तहत चार खास तरह के काम होंगे जैसे पानी से जुड़ी योजनाएं, गांव की सड़क और इमारतें, रोज़गार बढ़ाने वाला ढांचा और मौसम की मार से बचाव के काम, ताकि फायदा लंबे समय तक रहे।

🔹 4. खेती के समय मजदूर खेतों में ही रहें

बोवाई और कटाई के समय करीब 60 दिन तक इस योजना का काम रोक दिया जाएगा, ताकि किसानों को मजदूरों की कमी न हो और खेती प्रभावित न हो।

🔹 5. पैसे और निगरानी में ज्यादा साफ-सफाई

अब पैसे देने का तरीका तय नियमों पर होगा। काम की निगरानी AI और लाइव डैशबोर्ड से होगी, सोशल ऑडिट जरूरी होगा और खर्च की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो।

🔹 6. अब पैसे का बोझ सिर्फ केंद्र पर नहीं

VB-G RAM G योजना में सबसे बड़ा बदलाव फंडिंग को लेकर है। पहले मनरेगा में मजदूरी का पूरा पैसा केंद्र सरकार देती थी। अब इस नई योजना में राज्य सरकारों को भी मजदूरी का हिस्सा देना होगा।

🔹 7. केंद्र और राज्यों में पैसा कैसे बंटेगा

पूर्वोत्तर राज्य, हिमालयी राज्य और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खर्च का अनुपात 90 प्रतिशत केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य होगा। बाकी सभी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में यह हिस्सा 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य का होगा।

🔹 8. लेबर बजट खत्म, तय सीमा में पैसा मिलेगा

अब मनरेगा की तरह खुला लेबर बजट नहीं होगा। केंद्र सरकार हर राज्य के लिए सालाना नॉर्मेटिव एलोकेशन तय करेगी। मतलब पहले से तय होगा कि राज्य को कितना पैसा मिलेगा।

🔹 9. ज्यादा खर्च किया तो राज्य देगा पैसा

अगर कोई राज्य अपनी तय सीमा से ज्यादा खर्च करता है, तो अतिरिक्त पैसा राज्य सरकार को खुद देना होगा। इससे राज्यों को खर्च सोच-समझकर करना पड़ेगा।

🔹 10. इलाके के हिसाब से अलग नियम

राज्य सरकार जिले, ब्लॉक या पंचायत के हिसाब से अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी कर सकती है, ताकि स्थानीय खेती के पैटर्न को नुकसान न पहुंचे।

VB G Ram G Bill 2025

▶️'जी राम जी' बिल विवाद: शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने सदन में कहा कि शुरुआत में योजना का नाम सिर्फ नरेगा था और महात्मा गांधी का नाम बाद में जोड़ा गया। उनके मुताबिक 2009 के चुनावों के समय राजनीतिक कारणों और चुनावी फायदा उठाने के लिए इसमें गांधी जी का नाम शामिल किया गया।

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि गांधी जी का सम्मान नाम से नहीं, काम से होता है और नया कानून ग्रामीण गरीबों को ज्यादा मजबूत रोजगार सुरक्षा देगा।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी द्वारा योजनाओं के नाम बदलने की आलोचना पर भी शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने भी नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर कई योजनाएं शुरू की थीं, इसलिए नाम बदलने पर सवाल उठाना दोहरे मापदंड जैसा है।

▶️ VB G RAM G Bill FAQS: वीबी 'जी राम जी' बिल के बारे में सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल और उसके जवाब

G RAM G Bill Full Form: 'जी राम जी' बिल का फुल फॉर्म क्या है?

VB G RAM G Bill का फुलफॉर्म है- विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)
Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)

What is G RAM G Bill: क्या है 'जी राम जी' बिल?

  • विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल मनरेगा की जगह एक नया कानूनी ढांचा लाता है, जो सीधे तौर पर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है। यानी ग्रामीण रोजगार को सिर्फ अस्थायी काम तक सीमित न रखकर, देश के लंबे समय के विकास विजन से जोड़ा गया है।
  • नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को मिलने वाली रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों की आमदनी ज्यादा सुरक्षित होगी और उन्हें साल भर काम के लिए बाहर भटकने की मजबूरी कम होगी।
  • इस योजना में मजदूरी वाले काम को अब स्थायी और उपयोगी ग्रामीण ढांचे से जोड़ा गया है। चार प्राथमिक क्षेत्रों में ऐसे काम कराए जाएंगे, जिनसे गांवों में लंबे समय तक फायदा देने वाली संपत्तियां तैयार होंगी, न कि सिर्फ अस्थायी रोजगार।
  • योजना बनाने की प्रक्रिया को नीचे तक मजबूत किया गया है। विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के जरिए गांव स्तर पर तय होगा कि कहां और किस तरह के काम होने चाहिए। वहीं, इन योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर Viksit Bharat National Rural Infrastructure Stack से जोड़ा जाएगा, ताकि पूरे देश में तालमेल बना रहे।
  • फंडिंग के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब खर्च तय मानकों के आधार पर होगा और योजना केंद्र प्रायोजित ढांचे में चलेगी। इससे पैसे की उपलब्धता पहले से ज्यादा तय रहेगी, जवाबदेही बढ़ेगी और केंद्र व राज्यों के बीच साझेदारी ज्यादा मजबूत होगी।
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