Who is Ravneet Singh Bittu? रवनीत बिट्टू किस जाति से रखते हैं ताल्लुक, जिन्हें राहुल गांधी ने कहा गद्दार
Who is Ravneet Singh Bittu? संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी जुबानी जंग हुई। राहुल गांधी ने बिट्टू को "माय ट्रेटर फ्रेंड" (मेरा गद्दार दोस्त) कहा, जिस पर बिट्टू ने पलटवार करते हुए उन्हें "देश का दुश्मन" करार दिया है। जिसके बाद राजनीति गरमाई हुई है।
दरअसल, ये घटना तब हुई जब बुधवार की सुबह( कांग्रेस सांसद तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और केंद्रीय राज्य मंत्री बिट्टू उनके पास से निकल कर जा रहे थे।

राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को कहा गद्दार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बिट्टू को देखते ही उनसे कहा "यहां एक गद्दार जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा इसका चेहरा देखिए" राहुल गांधी ने हाथ बढ़ाया और कहा "नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस आ जाओगे (कांग्रेस में)।" इस पर बिट्टू ने उन्हें "देश के दुश्मन..." कहकर हाथ मिलाने से मना कर दिया और सीधे संसद के अंदर चले गए। जानते हैं कौन है रवनीत सिंह बिट्टू और किस जाति से रखते हैं ताल्लुक?
Who is Ravneet Singh Bittu कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू
10 सितंबर 1975 को जन्में बिट्टरवनीत सिंह बिट्टू वर्तमान में मोदी सरकार में राज्य मंत्री के तौर पर कार्यरत हैं। उन्हें रेलवे मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का प्रभार मिला है। अगस्त 2024 से वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं।
शहीद बेअंत सिंह के पोते हैं रवनीत सिंह बिट्टू
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू हैं। जिन्होंने राज्य में आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान न्यौछावर कर दी थी। बिट्टू जब 11 वर्ष के थे तब उनके पिता का निधन हो गया था। 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेवंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खास लिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या की थी। 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद वे राजनीति में आए।
रवनीत सिंह बिट्टू चुनाव हार गए, फिर कैसे मोदी सरकार में बने मंत्री?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया है। रोचक तथ्य यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना सीट से हार के बाद भाजपा ने बिट्टू को राज्यसभा के माध्यम से राजस्थान से उच्च सदन में भेजा, जहां वे वर्तमान में सांसद होने के साथ मंत्री पद भी संभाल रहे हैं। बिट्टू को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कभी कांग्रेस के प्रमुख चेहरे रहे बिट्टू के राजनीतिक सफर में यह बड़ा टर्निंग प्वाइंट रहा।
रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस से नाता तोड़ बने भाजपाई
भाजपा में शामिल होने से पहले, रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस पार्टी का हिस्सा थे। उन्होंने पहली बार साल 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा चुनाव जीता था। इसके बाद, साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर भाजपा का दामन थाम लिया था।
भाजपा में शामिल होने के बाद, वह लुधियाना से लोकसभा चुनाव हार गए थे। हालांकि, उन्होंने फिर 2017 और 2019 में लुधियाना से लोकसभा चुनाव जीता। साल 2017 में ही रवनीत सिंह बिट्टू ने जलालाबाद विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
कितने पढ़े-लिखें हैं रवनीत सिंह बिट्टू
रवनीत सिंह बिट्टू ने 1993 में चंडीगढ़ के गुरु नानक पब्लिक स्कूल से 12वीं और 1999 में पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड, चंडीगढ़ से 10वीं उत्तीर्ण की। केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने 1997 में पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से बी.ए. की डिग्री हासिल की है।
रवनीत सिंह बिट्टू की जाति क्या है?
रवनीत बिट्टू अपना पूरा नाम रवनीत सिंह बिट्टू लिखते हैं। पंजाब में "सिंह" उपनाम का प्रयोग सबसे अधिक सिख समुदाय में किया जाता है। सिख धर्म में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना के समय सभी सिख पुरुषों को "सिंह" उपनाम धारण करने का निर्देश दिया था, जिसका अर्थ शेर या साहसी होता है। इसका उद्देश्य जाति-भेद को समाप्त कर समानता और एकता को बढ़ावा देना था।
इसके अलावा पंजाब में कुछ हिंदू समुदायों, जैसे राजपूत, जाट, क्षत्रिय आदि में भी "सिंह" उपनाम देखने को मिलता है। इन समुदायों में यह उपनाम परंपरागत रूप से वीरता, सम्मान और सामाजिक पहचान से जुड़ा रहा है। कुल मिलाकर, पंजाब में "सिंह" एक सम्मानजनक उपनाम है, जो मुख्य रूप से सिखों से जुड़ा है, लेकिन कुछ अन्य समुदायों में भी इसका प्रयोग किया जाता है।












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