कौन हैं गलगोटिया के डीन Ravikant Kisana? लोगों ने इन्हें क्यों बताया सवर्णों का दुश्मन, AI समिट में कराई थू-थू
Ravikant Kisana (Galgotias University): दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जो हुआ, उसने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को अचानक सुर्खियों में ला दिया। यूनिवर्सिटी ने अपने स्टॉल पर एक रोबोट डॉग प्रदर्शित किया, जिसका नाम 'ओरियन' बताया गया। दावा किया गया कि यह उनके छात्रों और फैकल्टी की इनोवेशन का नतीजा है। लेकिन कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर लोगों ने खुलासा कर दिया कि यह रोबोट दरअसल चीन की कंपनी यूनिट्री का कमर्शियल प्रोडक्ट 'Go2' है, जो बाजार में खरीदने के लिए उपलब्ध है।
इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। आयोजकों ने यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटाने को कह दिया। यूनिवर्सिटी की ओर से सफाई आई कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि रोबोट पूरी तरह उनका बनाया हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम में प्रोफेसर नेहा, जो समिट में यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, आलोचना के घेरे में आ गईं और उनसे जवाब भी मांगा गया। इसी हंगामे के बीच एक और नाम सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगा-गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लिबरल एजुकेशन एंड लैंग्वेज के डीन डॉ. रविकांत किसाना।

लोग अब डॉ. रविकांत किसाना के शैक्षणिक बैकग्राउंड, विचारधारा और किताबों को लेकर सवाल उठाने लगे। कुछ यूजर्स ने उनके पुराने बयानों और लेखन को सामने लाकर बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें सवर्णों का दुश्मन बता रहे हैं। आइए जानते हैं कौन हैं रविकांत किसाना।
WHO IS Ravikant Kisana: कौन हैं डॉ. रविकांत किसाना?
डॉ. रविकांत किसाना खुद को अंबेडकरवादी बताते हैं और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर लिखते-बोलते रहे हैं। उनकी किताब "Meet the Savarnas: Indian Millennials Whose Mediocrity Broke Everything" खास तौर पर चर्चा में रही है। इस किताब में उन्होंने सवर्ण समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका की तीखी आलोचना की है। वे सवर्ण शादियों को आत्ममुग्धता से जोड़ते हैं और यूजीसी से जुड़े आंदोलनों को एंटी-डेमोक्रेटिक बताते रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग उन्हें 'सवर्ण विरोधी' तक कह रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे सामाजिक विमर्श का हिस्सा बताते हैं।
डॉ. रविकांत किसाना का एक्स हैंडल Buffalo Intellectual @ProfRavikantK से है। उन्होंने अपने बॉयो में लिखा है, ''Ambedkarite . OBC . Professor, critical caste studies . Author: 'Meet The Savarnas' . Mind Your Buffalo podcast''

रविकांत किसाना शिक्षा और अकादमिक सफर (Ravikant Kisana Education & Academic Journey)
लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक रविकांत किसाना ने जाधवपुर यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने MICA, द स्कूल ऑफ आइडियाज से कम्युनिकेशन और मार्केटिंग में पोस्टग्रेजुएशन किया और वहीं से कम्युनिकेशन/मीडिया स्टडीज में पीएचडी की पढ़ाई भी की।
उनका अकादमिक फोकस मीडिया, समाज, पहचान अध्ययन और क्रिटिकल सोशल थ्योरी जैसे विषयों पर रहा है। वे क्रिटिकल कास्ट स्टडीज, सांस्कृतिक अध्ययन और एथनोग्राफिक रिसर्च से जुड़े मुद्दों पर लिखते-पढ़ाते हैं।

रविकांत किसाना करियर (Ravikant Kisana Career Profile)
रविकांत किसाना ने अपने करियर की शुरुआत कॉरपोरेट और कंसल्टिंग से की। बाद में वे कंटेंट, एडिटोरियल और बिजनेस मैनेजमेंट से जुड़े पदों पर रहे। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह अकादमिक दुनिया का रुख किया।
वे FLAME University, IIM कोझीकोड, वोक्सेन यूनिवर्सिटी और NLSIU बेंगलुरु जैसे संस्थानों से जुड़े रहे। गलगोटिया यूनिवर्सिटी में वे डीन और प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। नवंबर 2025 में इंडिया फेस्टिवल ऑफ पॉडकास्टिंग में उन्हें स्पीकर के तौर पर बुलाया गया था, जहां उनकी पहचान इसी पद के साथ कराई गई।

अब बात रविकांत किसाना की किताब के बारे में (Meet the Savarnas Controversy)
साल 2025 में पेंगुइन रैंडम हाउस से प्रकाशित रविकांत किसाना की किताब "Meet the Savarnas" ने बहस को और तेज कर दिया। किताब में वे सवर्ण समाज को 'कास्ट प्रिविलेज के कूल लेकिन कन्फ्यूज्ड संरक्षक' बताते हैं। शुरुआत में ही वे लिखते हैं कि अगर सवर्ण पाठकों को किताब पढ़कर असहजता होती है तो यह आत्ममंथन का अवसर है।
उनकी सोशल मीडिया पहचान 'Buffalo Intellectual' के नाम से भी है। वे नियमित रूप से समाज, राजनीति और संस्कृति पर पोस्ट करते रहते हैं और पॉडकास्ट भी चलाते हैं। उनकी बायो में नालंदा अकादमी, वर्धा जैसे अंबेडकरवादी संगठनों से जुड़ाव का जिक्र है।
सोशल मीडिया पर क्या बोले रहे हैं लोग, पढ़ें एक्स पोस्ट
सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं
AI समिट में रोबोट डॉग को लेकर उठे विवाद ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही, डीन रविकांत किसाना के विचार और लेखन भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
एक ओर आलोचक उन्हें विभाजनकारी सोच का प्रतिनिधि बता रहे हैं, तो दूसरी ओर समर्थक इसे सामाजिक असमानताओं पर जरूरी बहस मानते हैं। फिलहाल इतना तय है कि AI समिट का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा और इसी बहाने डीन रविकांत किसाना का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
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