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कौन है पाकिस्तानी दूतावास का अफसर दानिश? जिसने ज्योति मल्होत्रा को बनाया मोहरा! अब खुली जासूसी कांड की परतें!

Ehsan-Ur-Rahim Alias Danish: हरियाणा की यूट्यूबर और ट्रैवल ब्लॉगर ज्योति मल्होत्रा उर्फ ज्योति रानी को 17 मई को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ज्योति के अलावा पंजाब और हरियाणा से 6 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है, इसमें पंजाब के मलेरकोटला की रहने वाली 32 वर्षीय विधवा महिला गजाला का भी नाम शामिल था। ज्योति और गजाला दोनों महिलाओं पर पाकिस्तानी जासूसी करने का आरोप है। ये दोनों महिलाएं एक पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में थीं।

अब तक की जांच में ये सामने आया है कि नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग का अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ ​​दानिश इस जासूसी सिंडिकेट का मुख्य आरोपी है। दानिश ने ही ज्योति मल्होत्रा और गजाला दोनों महिलाओं को जासूसी के लिए मोहरा बनाया। ऐसे में आइए जानते हैं कि ये एहसान-उर-रहीम कौन है और वो ज्योति और गजाला से कैसे मिला?

Ehsan-Ur-Rahim Alias Danish

Who Is Ehsan-Ur-Rahim Alias Danish: कौन है एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश?

🔴 एहसान-उर-रहीम, जिन्हें दानिश के नाम से भी जाना जाता है, पाकिस्तान उच्चायोग, नई दिल्ली में कार्यरत एक कर्मचारी था। भारत सरकार ने 13 मई 2025 को उसे 'अवांछित व्यक्ति' (persona non grata) घोषित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया था। एहसान-उर-रहीम पर भारत में जासूसी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप है।

🔴 ज्योति 2023 में पाकिस्तान गई थी, जहां उसने दानिश के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए। दानिश को भारतीय सरकार ने अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है और 13 मई 2025 को उसे निष्कासित कर दिया गया।

🔴 दानिश ने ज्योति और कुछ अन्य भारतीयों को कई पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (पीआईओ) से मिलवाया। उसने कथित तौर पर शादी का वादा करके और चैट के जरिए रोमांटिक संबंध बनाकर महिलाओं का विश्वास जीता। समय के साथ दानिश ने इन महिलाओं के जरिए गलत तरीकों से पैसे भी ट्रांसफर कराए।

🔴 कई जासूसों ने वित्तीय लेन-देन और वीजा संबंधी गतिविधियों में दानिश के साथ सहयोग किया। कुछ ने उसे भारतीय सिम कार्ड मुहैया कराए और उसके निर्देश पर डिफेंस एक्सपो 2025 का दौरा भी किया।

🔴 जांच में पाया गया कि एहसान-उर-रहीम ने सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Snapchat के जरिए भारतीय नागरिकों से संपर्क किया। उन्होंने गलत नामों का इस्तेमाल करके अपनी पहचान छिपाई और संवेदनशील जानकारी ली।

ज्योति मल्होत्रा पाक उच्चायोग में आयोजित इफ्तार पार्टी में भी हुई थी शामिल

ज्योति मल्होत्रा द्वारा बनाया गया एक वीडियो इस पूरे जासूसी मामले में अहम सबूत बनकर सामने आया है। इस वीडियो में वह नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में आयोजित इफ्तार पार्टी में शामिल होती नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि उसी वीडियो में ज्योति पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से बातचीत करती हुई दिखाई देती हैं। साल 2024 में ज्योति ने ये वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया था।

वीडियो में देखकर साफ-साफ पता चल रहा है कि दानिश और ज्योति के बीच गहरी जान-पहचान है। दानिश ने इस दौरान ज्योति को अपनी पत्नी से भी मिलवाया। ज्योति की दानिश के साथ सहज बातचीत और पाकिस्तान जाने की वजह से एजेंसियों का ध्यान इस ओर गया।

ज्योति मल्होत्रा ने 2023 में कमीशन एजेंटों की मदद से वीजा हासिल कर पाकिस्तान की यात्रा की थी। इस दौरान उसकी नजदीकियां दानिश से बढ़ीं। दानिश के जरिए ही ज्योति का संपर्क पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अन्य एजेंटों से हुआ, जिनमें अली अहसान और शाकिर उर्फ राणा शहबाज शामिल हैं।

पंजाब की 32 वर्षीय विधवा महिला गजाला से कैसे मिला दानिश?

पंजाब के मलेरकोटला की रहने वाली 32 साल की विधवा महिला गजाला 27 फरवरी 2025 को पाकिस्तान का वीजा बनवाने के लिए नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग पहुंची थी। वहीं उसकी मुलाकात दानिश से हुई। गजाला ने दानिश के साथ कुछ निजी जानकारी साझा की और जल्दी ही दोनों की दोस्ती हो गई। दोनों की बात पहले व्हाट्सएप पर होती थी। लेकिन फिर दानिश ने उसे

बातचीत के दौरान दानिश ने गजाला से नजदीकियां बढ़ाईं, वीडियो कॉल पर बातचीत की और उसे शादी का झांसा भी दिया। धीरे-धीरे दानिश ने उसे पैसों का लालच देना शुरू कर दिया। 7 मार्च को उसने फोनपे से 10,000 रुपये और 23 मार्च को गूगल पे से 20,000 रुपये भेजे। इसके अलावा भी दानिश ने कई बार गजाला को पैसे भेजता था।

23 अप्रैल को गजाला अपनी दोस्त बानू नसरीना के साथ दोबारा पाकिस्तान उच्चायोग गई। बानू भी मलेरकोटला की एक विधवा है। दानिश ने फिर से दोनों के वीजा की व्यवस्था करवाई और अगले ही दिन वीजा जारी कर दिया गया।

इस केस में एक और नाम यामीन मोहम्मद का है, जो मलेरकोटला का ही रहने वाला है। उसने दानिश के साथ मिलकर पैसों के लेन-देन और वीजा से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग किया है।

महिलाओं को जासूसी के जास में पहले भी फंसा चुके हैं पाकिस्तानी अधिकारी

एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश का मामला भारत में राजनयिक आड़ में जासूसी गतिविधियों का एक गंभीर उदाहरण है। इस घटना ने भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव को और बढ़ा दिया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सजगता की जरूरत पर भी जोर दिया है।

इसस पहले भी कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें ISI के अधिकारी भारतीय महिलाओं को मोहरा बनाकर जानकारी लेते रहे हैं। इसमें सबसे हाई-प्रोफाइल मामला माधुरी गुप्ता का था, जो पाकिस्तान में भारतीय दूतावास में कार्यरत थीं। उनपर आरोप लगा था कि उसने जमशेद और आईएसआई अधिकारी मुबशर रजा राना को 700 पेजों की गोपनीय जानकारी दी थी। जिसके लिए उन्हें तीन साल की सजा भी हुई थी।

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए कई लोगों पर हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमने सतर्कता बढ़ा दी थी और उसी के तहत हमारी केंद्रीय एजेंसियों और राज्य की खुफिया एजेंसियों से मिली सूचनाओं पर कुछ जिले ऐसे हैं जहां से देश विरोधी तत्वों को पकड़ा गया और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया...उनका चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा और कोशिश की जाएगी कि उन्हें अधिकतम सजा मिले और हमारी खुफिया एजेंसियां ​​पूरी निष्ठा से काम कर रही हैं...यह एक सतत प्रक्रिया है, यह भविष्य में भी जारी रहेगी।"

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