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Kartik Maharaj: कौन हैं कार्तिक महाराज? ममता बनर्जी से टकराने वाले साधु को मिला पद्मश्री

Kartik Maharaj Kaun Hai: पश्चिम बंगाल के साधु कार्तिक महाराज को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह घोषणा की। कार्तिक महाराज, जिन्हें स्वामी प्रदीप्तानंद के नाम से भी जाना जाता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं।

कार्तिक महाराज 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान तब चर्चा में आए थे जब उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। बता दें कि ममता बनर्जी के साथ उनका सार्वजनिक विवाद हुआ था। इस दौरान ममता ने उनपर तृणमूल के एजेंटों को अपने आश्रम में बैठने की अनुमति नहीं देने के लिए 'सीधी राजनीति' करने का आरोप लगाया था।

Kartik Maharaj

चलिए जानते है कौन हैं साधु कार्तिक महाराज, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से किया सम्मानित...

साधु कार्तिक महाराज कौन हैं?

कार्तिक महाराज को स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक महाराज अपनी किशोरावस्था में ही भारत सेवाश्रम संघ से जुड़ गए थे। यहां से ही उन्होंने सेवा कार्यों की शुरूआत की और 20 साल की उम्र में संघ नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल ली। उन्हें बेलदंगा, मुर्शिदाबाद भेजा गया, जहां उन्होंने एक आश्रम की स्थापना की।

स्कूल-अस्पताल बनाने में दिया योगदान

कार्तिक महाराज ने बेलंगा और मुर्शिदाबाद में आश्रम के साथ-साथ स्कूल और अस्पताल बनाने में अपना योगदान दिया। वे क्षेत्र में बालिका शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए भी प्रसिद्ध हैं। हालांकि, उन्होंने अपने कार्यों को राजनीति से हमेशा दूर रखा है। हालांकि, वे (कार्तिक महाराज) बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ भी प्रदर्शन करते नजर आए।

अपने बयान से कार्तिक महाराज ने बटोरी थी सुर्खियां

खबर के मुताबिक, कार्तिक महाराज ने यह कहकर भी सुर्खियां बटोरीं थी कि 'भारत का दुर्भाग्य है कि मोहनदास गांधी को राष्ट्रपिता माना जाता है।' उन्होंने हिंदुओं से बंशीधारी कृष्ण के बजाय चक्रधारी कृष्ण की पूजा शुरू करने का आग्रह किया था। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के मुरली वाले रूप को 'रोमांटिक' बताते हुए देवता कृष्ण का योद्धा रूप पूजने के लिए कहा।

धीरे-धीरे बने ब्रह्मचारी

उनके इस बयान पर विवाद भी हुआ था और लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। बता दें कि उनकी यात्रा तब शुरू हुई जब वे किशोरावस्था में भारत सेवाश्रम संघ में शामिल हुए। पहले पुरुलिया और बाद में औरंगाबाद के एक आश्रम में जाकर वे उनकी विचारधारा से प्रभावित हुए और ब्रह्मचारी बनने से पहले स्वामी प्रज्ञानंद महाराज से दीक्षा ली और फिर धीरे-धीरे ब्रह्मचारी बन गए।

ममता बनर्जी से हुआ था विवाद

18 मई 2024 को लोकसभा चुनाव के बीच में टीएमसी सुप्रीमो ने आरामबाग की अपनी सभा में सीधे कार्तिक महाराज का नाम लेते हुए कहा था, "मैं भारत सेवाश्रम संघ का बहुत सम्मान करती हूं, लेकिन जो व्यक्ति तृणमूल के एजेंटों को बैठने नहीं देता, उसे मैं संत नहीं मानती। इसका कारण यह है कि वह प्रत्यक्ष राजनीति करके देश को बर्बाद कर रहे हैं।"

बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने यह भी कहा, "सभी सज्जन समान नहीं होते। सभी संत समान नहीं होते। क्या हम सभी समान हैं? मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैंने इसे पहचान लिया है।" गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के दौरान कार्तिक महाराज के बगल में खड़े नजर आए थे।

कार्तिक महाराज ने ममता बनर्जी को भेजा था नोटिस

इन आरोपों के जवाब में कार्तिक महाराज ने ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजकर उनके संगठन के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणियों के लिए माफ़ी मांगने की मांग की। उन्होंने अपने आश्रम पर संभावित हमलों की चिंताओं के कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय से सुरक्षा भी मांगी थी।

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