कौन हैं ये हाईकोर्ट के जज? जिन पर मंडरा रहा महाभियोग का खतरा, हिंदुओं के पक्ष में सुनाया था ये अहम फैसला
Who is Justice G.R. Swaminathan: विपक्षी INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने के लिए 120 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षरों वाला नोटिस सौंपा। DMK के प्रतिनिधित्व में कनिमोझी,टी.आर. बालू, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन सहित कई विपक्षी नेताओं ने मिलकर जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की है।
यह मांग न्यायाधीश के उस फैसले के बाद उठी है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु सरकार को हिंदू परंपराओं के तहत एक मंदिर में दीपक जलाने की अनुमति देने का निर्देश दिया था। न्यायाधीश के आदेश का पालन न होने पर जस्टिस ने अवमानना का आदेश भी जारी किया था। जानिए क्या है पूरा मामला और कौन हैं मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन?

मंदिर में दीपक जलाने के पक्ष में सुनाया था फैसला?
दरअसल, यह पूरा विवाद तमिलनाडु के मदुरै स्थित तिरुपरनकुन्रम पहाड़ी पर कार्तिकई दीपम उत्सव से जुड़ा है।यह विवाद तिरुपरनकुन्रम पहाड़ी पर दीपक जलाने की प्राचीन हिंदू परंपरा और वहीं स्थित सूफी संत सिकंदर शाह की दरगाह के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव से जुड़ा है। 1 दिसंबर 2023 को न्यायमूर्ति एस. स्वामीनाथन ने सरकार को हिंदू भक्तों को दीप जलाने में सहायता देने का निर्देश दिया, जिसे कुछ विपक्षी दलों ने सांप्रदायिक उकसावा बताया।
ऐतिहासिक रूप से यह पहाड़ी पल्लव व चोल काल से मुरुगन परंपरा का केंद्र रही है, जबकि 13वीं शताब्दी से यहां दरगाह भी मौजूद है। कभी यह स्थल हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक था, लेकिन कार्तिकई दीपम उत्सव में शिखर पर दीप जलाने को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक रोक और विवाद बढ़ते गए, जो आज भी राजनीतिक और धार्मिक तनाव का कारण बना हुआ है।

Who is Justice G.R. Swaminathan: कौन हैं जी.आर. स्वामीनाथन?
जी आर स्वामीनाथन मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) के जज हैं। इन्होंने 1991 में वकालत शुरू की और advocate बने। वर्ष 2014 में उन्होंने मद्रास HC के मदुरै बेंच में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल (Assistant Solicitor General of India) का पद संभाला। 28 जून 2017 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज (Additional Judge) नियुक्त किया गया, बाद में स्थायी (Permanent Judge) बना दिया गया।
जी.आर. स्वामीनाथन प्रोफाइल
- जन्म: 1968, Thiruvarur, तमिलनाडु।
- शिक्षा: बेचलर इन लॉ- Central Law College, Salem और Dr. Ambedkar Government Law College, Chennai।
- 1991 में वकालत की शुरुआत की।
- चेन्नई में वकालत की, इसके बाद मदुरै बेंच में ट्रांसफर हुआ
- 2014: मदुरै बेंच के लिए Assistant Solicitor General of India (ASG) नियुक्त।
- 28 जून 2017: मद्रास हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त।
- अप्रैल 2019: स्थायी न्यायाधीश बने।
- 2019 में अपने दो साल पूरे होने पर "परफॉर्मेंस कार्ड" जारी किया, जिसमें निपटाए गए और लंबित मामलों की जानकारी दी।
- 2024-25 में बताया कि अब तक लगभग 64,798 मामले निपटाए।
- न्यायिक जवाबदेही पर भरोसा, अपने काम का लेखा-जोखा स्वयं सार्वजनिक किया।
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के ऐतिहासिक फैसले
1. Arun Kumar v. Inspector General of Registration (2019) - ट्रांसजेंडर महिला को "दुल्हन" के रूप में मान्यता
इस ऐतिहासिक फैसले में जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने स्पष्ट किया कि ट्रांसजेंडर महिला को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत "दुल्हन (bride)" माना जा सकता है। यह निर्णय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की लैंगिक पहचान (gender identity) को कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इसके साथ ही, उन्होंने अंतर-लिंग (intersex) बच्चों पर बिना चिकित्सकीय आवश्यकता वाली "लिंग बदलने या जननांग सामान्यीकरण (sex-reassignment / genital-normalizing) सर्जरी" पर रोक की बात कही, जो बच्चे की शारीरिक स्वायत्तता (bodily autonomy) की सुरक्षा पर आधारित था।
2. LGBTQ+ और जेंडर अधिकारों के लिए मजबूत मिसाल
इस फैसले को मानवाधिकार विशेषज्ञों और कानूनी विश्लेषकों ने LGBTQ+ अधिकारों, ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों के अधिकारों की दिशा में एक अत्यंत प्रगतिशील और संवेदनशील निर्णय बताया। निर्णय का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसने लैंगिक विविधता की स्वीकृति, निज-पहचान (individual gender identity) और गरिमा (dignity) को संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप स्थापित किया।
3. तमिल शरणार्थियों के अधिकारों की मान्यता
जस्टिस स्वामीनाथन ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में शरणार्थियों के अधिकारों को मान्यता दी। उन्होंने उन भारतीय मूल के तमिल शरणार्थियों के पक्ष में निर्णय दिया जो वतन वापसी और नागरिकता से जुड़े अधिकार चाहते थे। उनके फैसले ने जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों को प्राथमिकता दी और मानवतावादी दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया।
4. क़ैदियों को निजी (private) वैवाहिक मुलाक़ात का अधिकार
उन्होंने एक मामले में कहा कि कैदियों को उनके जीवनसाथी से निजी मुलाकात (conjugal visit / private meeting) का अधिकार है।
5. 58 दिनों में 445 अपीलों के निपटान का प्रस्ताव
2022 में उन्होंने न्यायिक लंबित मामलों को कम करने की कोशिश करते हुए प्रस्ताव रखा कि 58 दिनों में 445 लंबित अपीलों का निपटान किया जाए।
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